टीम इंडिया का ये स्टार क्रिकेटर करना चाहता था सूइसाइड, बताया किस 'चीज' ने घातक कदम उठाने से रोका

Robin Uthappa: टीम इंडिया के स्टार क्रिकेटर रॉबिन उथप्पा ने खुलासा किया है कि वह एक समय अपना जीवन खत्म करने के बारे में सोच रहे थे, लेकिन क्रिकेट ने उन्हें बचा लिया

By अभिषेक पाण्डेय | Published: June 04, 2020 2:20 PM

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ठळक मुद्देरॉबिन उथप्पा एक समय डिप्रेशन से जूझ रहे थे, रोज आते थे मन में सूइसाइड के ख्यालउथप्पा ने कहा कि वह शायद अपना जीवन खत्म कर लेते लेकिन क्रिकेट ने उन्हें बचा लिया

भारतीय क्रिकेटर रॉबिन उथप्पा ने खुलासा किया है कि वह 2009 से 2011 के बीच डिप्रेशन से जूझ रहे थे और हर दिन उनके मन में आत्महत्या करने का ख्याल आता था। उथप्पा ने भारत के लिए 2006 में इंग्लैंड के खिलाफ अपना डेब्यू करने के बाद से अब तक 46 वनडे और 13 टी20 मैच ही खेले हैं।

दो बार आईपीएल विजेता रही कोलकाता नाइटराइडर्स का हिस्सा रह चुके उथप्पा को 2019 आईपीएल नीलामी में राजस्थान रॉयल्स ने खरीदा था।

आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, उथप्पा ने रॉयल्स राजस्थान फाउंडेशन के मंच 'माइंड, बॉडी ऐंड सोल' से बातचीत के दौरान कहा, 'जब मैंने 2006 में अपना डेब्यू किया था तो मैं खुद के बारे में पूरी तरह अवगत नहीं था। उसके बाद से काफी विकास और सीखने का काम हुआ। अब मैं खुद के बारे में अच्छी तरह अवगत हूं और खुद के विचारों और खुद को लेकर पूरी तरह स्पष्ट हूं। अब मेरे लिए अगर मैं कहीं फिसल रहा हूं तो खुद को संभालना ज्यादा आसान है।' 

2009 से 2011 तक डिप्रेशन से जूझता रहा था: रॉबिन उथप्पा

उथप्पा ने कहा, 'मुझे लगता है कि मैं इस जगह तक पहुंचा हूं क्योंकि मैं उन मुश्किल दौरों से गुजरा हूं, जब मैं डिप्रेशन से जूझ रहा था और मेरे अंदर आत्महत्या के ख्याल आते थे। मुझे याद है कि 2009 से 2011 के दौरान, ये नियमित था और मैं इससे हर दिन जूझता था।'

उथप्पा ने कहा, 'एक ऐसा भी समय था जब मैं क्रिकेट के बारे में भी नहीं सोच रहा था, ये शायद मेरे दिमाग में सबसे दूर की चीज थी। मैं इस बारे में सोच रहा था कि मैं कैसे इस दिन जीवित रहूंगा और आगे बढ़ूंगा, मेरे जीवन के साथ क्या हो रहा है और मैं किस दिशा में आगे बढ़ रहा हूं।'

क्रिकेट ने मुझे आत्महत्या से बचा लिया: उथप्पा

उन्होंने कहा, 'क्रिकेट ने मेरे मन को इन विचारों से दूर रखा, लेकिन जिस दिन मैच न हो उस दौरान यह वास्तव में मुश्किल बन गया। मैं उन दिनों बस बैठकर यही सोचता था कि तीन तक गिनूं और दौड़कर बालकनी से नीचे कूद जाऊं, लेकिन किसी चीज ने मुझे रोककर रखा।'

उन्होंने कहा, 'इसके बाद जब मैंने इन चीजों को एक डायरी में लिखना शुरू किया और खुद को एक व्यक्ति के रूप में समझने की प्रक्रिया शुरू की। तब मैंने उन बदलावों के लिए बाहर की मदद लेनी शुरू की, जो मैं अपने जीवन में चाहता था।'

राजस्थान रॉयल्स के बल्लेबाज उथप्पा को अपने जीवन में हुए इन अनुभवों का जरा भी अफसोस नहीं है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि कुछ नकारात्मक होना आवश्यक है। मैं जीवन में संतुलन में यकीन रखता हूं और मेरा मानना है कि कोई जीवन में हमेशा पॉजिटिव नहीं रह सकता। नकारात्मक होना या नकारात्मक अनुभव होना, कभी-कभी मुश्किल समय और क्लेश से गुजरना विकास के लिए आवश्यक हैं।'

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