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चीनी कर्ज ऐप मामला: प्रवर्तन निदेशालय ने 76 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की

By भाषा | Updated: May 11, 2021 22:39 IST

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नयी दिल्ली, 11 मई प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कर्ज देने वाली कुछ ऐप कंपनियों के खिलाफ मनी लांड्रिंग जांच के सिलसिले में चीनी नागरिकों के नियंत्रण वाली कुछ वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियों तथा वित्तीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी रजोरपे की 76 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की है।

उल्लेखनीय है कि इन कंपनियों के डराने-धमकाने की युक्ति से तंग आकर कई कर्जदारों ने कोविड-19 संकट की घड़ी में अपनी जान तक दे दी।

केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक बयान में कहा कि मनी लांड्रिंग निरोधक कानून (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत आपराधिक जांच बेंगलुरू सीआईडी (आपराधिक जांच विभाग) द्वारा दर्ज कई प्राथमिकी के आधार पर की जा रही है। सीआईडी को इन कंपनियों से कर्ज ले रखे विभिन्न ग्राहकों से शिकायतें मिली थी कि उनके वसूली एजेंट उन्हें परेशान कर रहे हैं।

ऐसे मामलों में यह पहला प्रकरण है जहां ईडी ने संपत्ति कुर्क की है। साथ ही एजेंसी अन्य राज्यों में भी इस प्रकार के अन्य मामलों की जांच कर रही है।

ईडी के अनुसार जब्त राशि सात कंपनियों से संबद्ध है। इनमें तीन वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियां... मैड एलिफेंट नेटवर्क टेक्नोलॉजी प्राइवेट लि., बैरयोनिक्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लि. और क्लाउड टलस फ्यूचर टेक्नोलॉजी प्राइवेट लि....हैं। इन कंपनियों का नियंत्रण चीनी नागरिकों के पास है। इसके अलावा आरबीआई के पास पंजीकृत तीन गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) हैं।

ये तीन एनीबएफसी X10 फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लि., ट्रैक फिन-एड प्राइवेट लि. और जमनादास मोरारजी फाइनेंस प्राइवेट लि. हैं।

जांच एजेंसी के अनुसार वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियों का डिजिटल कर्ज ऐप के जरिये ऋण वितरण को लेकर एनबीएफसी के साथ समझौता था।

ईडी के अनुसार जब्त राशि में रजोरपे साफ्टवेयर प्राइवेट लि. द्वारा शुल्क के रूप में ली गयी 86.44 लाख रुपये की राशि शामिल है। कंपनी पर आरोप है कि उसने अपने पास कर्ज वितरण और वसूली के लिये पंजीकृत एक कंपनी के बारे में जांच-पड़ताल नहीं की।

बयान में कहा गया है कि पीएमएलए के तहत जारी अस्थायी आदेश के अंतर्गत कुल 76.67 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति कुर्क की गयी है। इन मामलों में कुछ भारतीय भी जांच के घेरे में है।

एजेंसी के अनुसार जांच में पाया गया कि कर्ज देने वाले चीनी ऐप लोगों को अधिक ब्याज दर और प्रसंस्करण शुल्क पर ऋण की पेशकश करते थे।

ईडी ने कहा कि ये ऐप बाद में कर्ज की वसूली के लिये अपने एजेंटों के जरिये डराने-धमकाने समेत हर तरह की रणनीति अपनाते थे। वे कॉल सेंटर के माध्यम से उपयोगकर्ताओं के मोबाइल फोन में उपलब्ध तस्वीरों और संवेदनशील आंकड़े प्राप्त करके उधारकर्ता को बदनाम करने या उन्हें ब्लैकमेल करने की भी धमकी देते थे।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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