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निर्यात मांग से सोयोबीन तिलहन उछली, तेल भी ऊंचा, मूंगफली, सरसों में हल्की नरमी

By भाषा | Updated: March 28, 2021 18:08 IST

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नयी दिल्ली, 28 मार्च स्थानीय तेल तिलहन बाजार में गत सप्ताह खाद्य तेलों में मिला जुला रुख रहा। एक तरफ जहां सोयाबीन की तेल रहित खल की निर्यात मांग जारी रहने से सोयाबीन तिलहन और तेल में 300 से 320 रुपये क्विंटल तक की तेजी रही वहीं मूंगफली और सरसों तेल में ऊंचे भाव पर हल्की नरमी रही। सरसों की ताजा आवक का भी बाजार पर दबाव रहा।

बाजार सूत्रों का कहना है कि सोयाबीन तेल सरसों से ऊपर निकला है। सरसों मिल डिलिवरी दादरी का भाव जहां पिछले एक सप्ताह के दौरान 150 रुपये घटकर 12,550 रुपये क्विंटल रह गया। वहीं मूंगफली मिल डिलिवरी तेल गुजरात का भाव भी सप्ताह के दौरान 50 रुपये घटकर 15,250 रुपये क्विंटल रह गया। सरसों तिलहन और मूंगफली तिलहन में भी 20 से 40 रुपये क्विंटल की गिरावट रही।

सूत्रों का कहना है कि सरसों की नई आवक जारी है। रबी मौसम में 89.5 लाख टन सरसों उत्पादन की उम्मीद की जा रही है। पिछले साल का स्टॉक नाम के लिये भी नहीं रहा है। पिछले साल बाजार में पुराना स्टॉक मिलाकर 96 लाख टन से अधिक सरसों की उपलब्धता थी। लेकिन इस साल 89 लाख टन उत्पादन का अनुमान है। इस लिहाज से कारोबारियों को सरसों तिलहन में आने वाले महीनों में मंदा नहीं लग रहा है।

वहीं दूसरी तरफ सोयाबीन तेल गत सप्ताह सरसों तेल से आगे निकल गया। तेल सोयाबीन दिल्ली 20 रुपये गिरकर 13,620 रुपये क्विंटल रहा जबकि तेल सोयाबीन इंदौर 300 रुपये बढ़कर 13,600 रुपये क्विंटल पर पहुंच गया। सप्ताह के दौरान तेल तिल मिल डिलिवरी 140 रुपये गिरकर 14,560 से 17,560 रुपये क्विंटल पर आ गया। कच्चा पॉम तेल कांडला भी इस घटबढ़ के बीच 60 रुपये बढ़कर 11,410 रुपये क्विंटल रहा।

बिनौला मिल डिलिवरी हरियाणा का भाव 20 रुपये की मजबूती के साथ 12,900 रुपये क्विंटल पर बोला गया। वहीं सोयाबीन तिलहन का भाव सप्ताह के दौरान 300 से 320 रुपये क्विंटल की तेजी के साथ 6000- 6,050 रुपये और लूज का भाव 5,900- 5,90 रुपये क्विंटल पर बोला गया।

मक्का खल सरिस्का 3,605 रुपये पर मजबूत बनी रही। अन्य तेल-तिलहनों के भाव पूर्ववत बने हुए थे।

सूत्रों ने कहा कि 'विदेशों में बाजार टूटने पर भी स्थानीय बाजार पर कोई खास फर्क नहीं है क्योंकि आयात अब भी महंगा पड़ रहा है। स्थानीय बाजार में खासकर सरसों तेल के सस्ता पड़ने से सोयाबीन डीगम का आयात कम हो रहा है और आयातित माल की पाइपलाइन खाली है। '

खाद्य तेल उद्योग के जानकारों का कहना है कि इस समय सरसों का पुराना स्टॉक खत्म है जबकि खपत ज्यादा है। ऐसे में सरकार की एजेंसी नाफेड को इस समय सरसों की नयी फसल की बाजार भाव पर खरीद कर स्टॉक करना चाहिए। उनका कहना है कि इससे सरकार को किसानों को लाभदायक दाम दिलाने के साथ-साथ सर्दियों में तेजी के समय बाजार में हस्तक्षेप करने में भी असानी होगी। उनका यह भी कहना है कि सरसों स्टॉक की स्थिति संतुलित रखने के वास्ते सरसों रिफाइंड तेल पर भी रोक लगाई जानी चाहिये।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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