रिजर्व बैंक ने 2021-22 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति का अनुमान बढ़ाकर 5.7 प्रतिशत किया
By भाषा | Updated: August 6, 2021 16:42 IST2021-08-06T16:42:45+5:302021-08-06T16:42:45+5:30

रिजर्व बैंक ने 2021-22 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति का अनुमान बढ़ाकर 5.7 प्रतिशत किया
मुंबई, छह अगस्त भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को आपूर्ति पक्ष की बाधाओं, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और कच्चा माल महंगा होने के चलते चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को बढ़ाकर 5.7 प्रतिशत कर दिया।
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने जून में अपनी पिछली बैठक में चालू वित्त वर्ष के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति के 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था।
आरबीआई ने शुक्रवार को रेपो दर को चार प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया, जिस पर वह बैंकों को अल्पकालिक कर्ज देता है।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि अर्थव्यवस्था अभी कोविड की दूसरी लहर से उबर नहीं सकी है और ऐसे में उदार रुख बनाए रखने का फैसला किया गया है।
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने एमपीसी के फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि इस स्तर पर एक सख्त मौद्रिक नीति अर्थव्यवस्था में शुरु हुए पुनरुद्धार को नुकसान पहुंचा सकती है।
दास ने कहा, ‘‘मुद्रास्फीति 2020-21 की दूसरी तिमाही में ऊपरी दायरे के करीब रह सकती है। लेकिन खरीफ फसल की आवक और आपूर्ति पक्ष के उपायों के कारण यह दबाव 2021-22 की तीसरी तिमाही में कम होना चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए सीपीआई (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) पर आधारित मुद्रास्फीति के 2021-22 के दौरान 5.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह दूसरी तिमाही में 5.9 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 5.3 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.8 प्रतिशत रह सकती है। पहली तिमाही के दौरान सीपीआई मुद्रास्फीति के 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है।’’
खाद्य तेलों, दालों, अंडे, दूध और तैयार भोजन के साथ ही सब्जियों के महंगा होने के कारण जून में खुदरा मद्रास्फीति बढ़कर 6.3 प्रतिशत हो गई।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में कच्चा माल महंगा हो रहा है, लेकिन कमजोर मांग और लागत में कटौती के चलते उत्पादन कीमतों में गिरावट आ रही है।
दास ने कहा कि जिंसों, खासकर कच्चे तेल की कीमतों में काफी तेजी आई है। हालांकि, तेल उत्पादक ओपेक और अन्य देशों के बीच उत्पादन समझौता होने के बाद जुलाई में कीमतों पर दबाव उच्चतम स्तर से कुछ कम हुआ।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा आपूर्ति पक्ष के हस्तक्षेप के कारण जुलाई में खाद्य तेल और दालों की कीमतों में नरमी आई है।
दास ने कहा कि सरकार ने आपूर्ति पक्ष की बाधाओं को दूर करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन आपूर्ति-मांग संतुलन बहाल करने के लिए इस दिशा में ठोस प्रयास जरूरी हैं।
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