GST collections in December: नए साल में पैसों की बारिश, दिसंबर में 6.1 प्रतिशत बढ़कर 1.74 लाख करोड़ रुपये
By सतीश कुमार सिंह | Updated: January 1, 2026 16:38 IST2026-01-01T16:19:00+5:302026-01-01T16:38:51+5:30
GST collections in December: सकल जीएसटी संग्रह दिसंबर में 6.1 प्रतिशत बढ़कर 1.74 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा।

GST collections in December
नई दिल्लीः दिसंबर में जीएसटी राजस्व में मामूली लेकिन महत्वपूर्ण सुधार के संकेत मिले। पिछले महीने की सुस्ती के बाद कुछ राहत मिली। नवंबर में सकल जीएसटी संग्रह बढ़कर 1.74 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6.1 प्रतिशत अधिक है, जबकि पिछले वर्ष यह 1.70 लाख करोड़ रुपये था। दिसंबर में जीएसटी वृद्धि की दर पिछले तीन महीनों में सबसे तेज रही, जो सितंबर में सरकार द्वारा दरों को युक्तिसंगत बनाने के बाद से कर राजस्व में क्रमिक सुधार का संकेत देती है। सकल जीएसटी संग्रह दिसंबर में 6.1 प्रतिशत बढ़कर 1.74 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा।
Gross GST collections for December stood at Rs 1.75 lakh crore, up 6.1% year-on-year from Rs 1.65 lakh crore pic.twitter.com/qjthya4EQq
— ANI (@ANI) January 1, 2026
GST collections rise 6.1% to Rs 1.75 lakh crore in December
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दिसंबर महीने में सकल जीएसटी संग्रह 6.1 प्रतिशत बढ़कर 1.74 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। करों में कटौती के बाद घरेलू बिक्री राजस्व में वृद्धि सुस्त रहने से जीएसटी संग्रह की रफ्तार नरम पड़ी है। शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली। दिसंबर 2024 में सकल वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) राजस्व 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा था।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में घरेलू लेनदेन से सकल राजस्व 1.2 प्रतिशत बढ़कर 1.22 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया जबकि आयातित वस्तुओं से राजस्व 19.7 प्रतिशत बढ़कर 51,977 करोड़ रुपये रहा। दिसंबर में कर ‘रिफंड’ 31 प्रतिशत बढ़कर 28,980 करोड़ रुपये रहा।
शुद्ध जीएसटी राजस्व (कर रिफंड समायोजन के बाद) 1.45 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.2 प्रतिशत अधिक है। पिछले महीने उपकर संग्रह घटकर 4,238 करोड़ रुपये रहा, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह 12,003 करोड़ रुपये था।
उल्लेखनीय है कि 22 सितंबर, 2025 से लगभग 375 वस्तुओं पर जीएसटी की दरें कम कर दी गईं। इससे सामान सस्ता हुआ है। इसके अलावा पहले की तरह विलासिता, अहितकर वस्तुओं पर क्षतिपूर्ति उपकर अब नहीं लगाया जाता है। अब केवल तंबाकू एवं संबंधित उत्पादों पर ही यह लगाया जाता है। जीएसटी दरों में कमी से राजस्व संग्रह प्रभावित हुआ है।