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सरकार ने 2020-21 में विनिवेश से 32,835 करोड़ रुपये जुटाये, संशोधित लक्ष्य से अधिक

By भाषा | Updated: March 31, 2021 19:51 IST

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नयी दिल्ली, 31 मार्च सरकार ने केंद्रीय लोक उपक्रमों में शेयरों की बिक्री और पुनर्खरीद के जरिये 2020-21 में 32,835 करोड़ रुपये जुटाये। यह चालू वित्त वर्ष के लिये विनिवेश के लिये संशोधित अनुमान से अधिक लेकिन अनुमान 2.10 लाख करोड़ रुपये के आरंभिक बजट से कहीं कम है।

संशोधित अनुमान में पिछले बजट के समय घोषित लक्ष्य को कम कर 32,000 करोड़ रुपये कर दिया गया था। इसका कारण कोविड-19 महामारी के कारण बड़ी कंपनियों में विनिवेश योजना का आगे नहीं बढ़ पाना था।

निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव तुहीन कांत पांडे ने ट्विटर पर लिखा है कि 2020-21 में विभाग को कुल प्राप्ति 71,857 करोड़ रुपये रही। इसमें 32,835 करोड़ रुपये विनिवेश से तथा 39,022 करोड़ रुपये लाभांश के रूप में प्राप्त हुए।

पांडे ने कहा, ‘‘वित्त वर्ष 2020-21 में कुल लाभांश प्राप्ति 39,022 करोड़ रुपये पहुंच गयी जो संशोधित अनुमान 34,717 करोड़ रुपये से अधिक है। साथ ही पिछले वित्त वर्ष के दौरान वास्तविक लाभांश प्राप्ति (35,543 रुपये) से भी ज्यादा है।’’

वित्त वर्ष 2020-21 में सरकार ने शेयर बाजार में सीधे सात बिक्री पेशकश (ओएफएस) के जरिये अपनी हिस्सेदारी बेची। साथ ही इतनी ही संख्या में केंद्रीय लोक उपक्रमों द्वारा शेयरों की पुनर्खरीद पेशकश की गयी जिसमें सरकार ने अपने शेयर बेचे।

सात ओएफएस में टाटा कम्युनिकेशंस लि. (पूर्व में वीएसएनएल) में हिस्सेदारी बिक्री शामिल है। इनके जरिये सरकारी खजाने को चालू वित्त वर्ष में 22,973 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।

वहीं सात सीपीएसई द्वारा शेयर पुनर्खरीद में अपने शेयरों की पेशकश कर सरकार ने 31 मार्च को समाप्त हो रहे वित्त वर्ष में 3,936 करोड़ रुपये जुटाये।

इसके अलावा तीन केंद्रीय लोक उपक्रम...रेल टेल, आईआरएफसी और मझगांव डॉक शिपबिर्ल्स...शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुए और उनके आरंभिक सार्वजनिक निर्गम से 2,802 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।

साथ ही एसयूयूटीआई (स्पेसिफाइड अंडरटेकिंग ऑफ द यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया) के अंतर्गत रखी गयी कंपनियों में हिस्सेदारी बिक्री के जरिये 3,125 करोड़ रुपये जुटाये गये।

एक अप्रैल से शुरू वित्त वर्ष 2021-22 के लिये सरकार ने 1.75 लाख करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य रखा है। यह चालू वित्त वर्ष में जुटायी गयी राशि का पांच गुना है।

अगले वित्त वर्ष में देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी का आईपीओ लाने की योजना है वहीं आईडीबीआई बैंक का भी निजीकरण किया जा सकता है।

इसके अलावा एयर इंडिया, बीपीसीएल, पवन हंस, बीईएमएल, एनआईएनल और शिपिंग कार्पोरेशन के निजीकरण की प्रक्रिया भी दूसरे चरण में पहुंच गयी है। इन उपक्रमों के लिये सरकार को कई रूचि पत्र मिले हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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