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Economic Survey Budget 2024 Live: देश में 2030 तक सालाना 78.5 लाख नौकरी की जरूरत, पीएलआई योजना, मित्र कपड़ा योजना और मुद्रा योजनाएं की भूमिका अहम...

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: July 22, 2024 15:47 IST

Economic Survey Budget 2024 Live: गैर-कृषि क्षेत्र में प्रतिवर्ष 78.5 लाख नौकरियों की मांग में पीएलआई योजना (5 वर्षों में 60 लाख रोजगार सृजन), मित्र कपड़ा योजना (20 लाख रोजगार सृजन) और मुद्रा जैसी मौजूदा योजनाएं पूरक भूमिका निभा सकती हैं।

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ठळक मुद्देकामकाजी उम्र में हर कोई नौकरी की तलाश नहीं करेगा।औसतन लगभग 78.5 लाख नौकरियां सृजित करने की जरूरत है।भूमि पर कानूनों में सुधार करके रोजगार सृजन में तेजी ला सकती हैं।

Economic Survey Budget 2024 Live: देश में बढ़ते कार्यबल को देखते हुए गैर-कृषि क्षेत्र में 2030 तक सालाना औसतन 78.5 लाख नौकरियां सृजित करने की जरूरत है। संसद में सोमवार को पेश 2023-24 की आर्थिक समीक्षा में यह कहा गया है। समीक्षा में नौकरियों की संख्या का एक व्यापक अनुमान दिया गया गया है। बढ़ते कार्यबल के लिए इन नौकरियों को देश में सृजित करने की जरूरत है। इसमें कहा गया कि कामकाजी उम्र में हर कोई नौकरी की तलाश नहीं करेगा। उनमें से कुछ खुद का रोजगार करेंगे और कुछ नियोक्ता भी होंगे।

समीक्षा में कहा गया है कि आर्थिक वृद्धि नौकरियों से ज्यादा आजीविका पैदा करने के बारे में है। इसके लिए सभी स्तर पर सरकारों और निजी क्षेत्र को मिलकर प्रयास करना होगा। इसमें कहा गया है कि कार्यबल में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी धीरे-धीरे घटकर 2047 में 25 प्रतिशत रह जाएगी, जो 2023 में 45.8 प्रतिशत थी।

समीक्षा में कहा गया है, ‘‘परिणामस्वरूप, भारतीय अर्थव्यवस्था को बढ़ते कार्यबल की जरूरतों को पूरा करने के लिए गैर-कृषि क्षेत्र में 2030 तक सालाना औसतन लगभग 78.5 लाख नौकरियां सृजित करने की जरूरत है।’’ इसमें सुझाव दिया गया है कि गैर-कृषि क्षेत्र में प्रतिवर्ष 78.5 लाख नौकरियों की मांग में पीएलआई योजना (5 वर्षों में 60 लाख रोजगार सृजन), मित्र कपड़ा योजना (20 लाख रोजगार सृजन) और मुद्रा जैसी मौजूदा योजनाएं पूरक भूमिका निभा सकती हैं।

इसमें कहा गया है कि बढ़ते कार्यबल को संगठित रूप देने, उन क्षेत्रों में रोजगार सृजन की सुविधा प्रदान करने, जो कृषि से स्थानांतरित होने वाले श्रमिकों को अपना सकते हैं और नियमित वेतन/वेतन रोजगार वाले लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा लाभ सुनिश्चित करने की चुनौतियां भी मौजूद हैं। समीक्षा में सुझाव दिया गया है कि राज्य सरकारें अनुपालन बोझ को कम करके और भूमि पर कानूनों में सुधार करके रोजगार सृजन में तेजी ला सकती हैं।

नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 2030 तक 30.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश आएगा: आर्थिक समीक्षा

भारत में 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्य को पूरा करने के लिए 30.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होगी। सोमवार को संसद में पेश आर्थिक समीक्षा 2023-24 के अनुसार, इसे प्राप्त करने के लिए वित्त जुटाने के साथ-साथ प्रतिस्पर्धी शर्तों पर निवेश और भूमि अधिग्रहण के मुद्दों का समाधान आवश्यक है।

आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि 2024 से 2030 के बीच भारत में नवीकरणीय ऊर्जा (आरई) क्षेत्र में लगभग 30.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश आने की उम्मीद है। समीक्षा के अनुसार, इससे संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में महत्वपूर्ण आर्थिक अवसर पैदा होंगे। समीक्षा कहती है कि भारत में स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र को 2014 से 2023 के बीच 8.5 लाख करोड़ रुपये (102.4 अरब डॉलर) का नया निवेश मिला।

जबकि नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को अप्रैल, 2000 से मार्च, 2024 तक 17.88 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) मिला। नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए प्रतिस्पर्धी शर्तों पर आवश्यक वित्त और निवेश जुटाने के संबंध में आर्थिक समीक्षा में बैंकिंग क्षेत्र को तैयार करने पर जोर दिया गया है।

भूमि अधिग्रहण के संबंध में सर्वेक्षण में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वाली भूमि की पहचान, उसका रूपांतरण (यदि आवश्यक हो), भूमि सीलिंग अधिनियम से मंजूरी, भूमि पट्टा किराया पर निर्णय, राजस्व विभाग से मंजूरी तथा अन्य ऐसी मंजूरियों की ओर संकेत दिया गया है। इसमें सुझाव दिया गया है कि नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण में राज्य सरकारों को प्रमुख भूमिका निभानी चाहिए।

साल 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के मद्देनजर ये सुझाव महत्वपूर्ण हैं। भारत ने 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा संसाधनों से बिजली उत्पादन के लिए 50 प्रतिशत कुल स्थापित क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। समीक्षा में कहा गया है कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की राष्ट्रीय विद्युत योजना के अनुसार, गैर-जीवाश्म ईंधन (जलविद्युत, परमाणु, सौर, पवन, बायोमास, लघु जलविद्युत, पंप भंडारण पंप) आधारित क्षमता 2023-24 में कुल स्थापित क्षमता के 441.9 गीगावाट में से लगभग 203.4 गीगावाट (कुल का 46 प्रतिशत) है।

गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता 2026-27 में बढ़कर 349 गीगावाट (57.3 प्रतिशत) और 2029-30 में 500.6 गीगावाट (64.4 प्रतिशत) होने का अनुमान है। समीक्षा के अनुसार, भारत के हरित बदलाव से नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में रोजगार के अवसरों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की संभावना है।

इसमें कहा गया, “... साल 2030 तक स्वच्छ ऊर्जा पहल से 238 गीगावाट सौर और 101 गीगावाट नई पवन ऊर्जा क्षमता स्थापित करके 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म बिजली उत्पादन क्षमता हासिल करके लगभग 34 लाख नौकरियां (अल्पकालिक और दीर्घकालिक) पैदा की जा सकती हैं।”

टॅग्स :बजट 2024बजटNirmal Sitharaman
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