Ambedkar Jayanti 2026: डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर जिन्हें प्यार से 'बाबासाहेब' के नाम से याद किया जाता है। हल साल 14 अप्रैल को बाबा साहेब की जयंती मनाई जाती है जिसे अंबेडकर जयंती कहा जाता है। अंबेडकर न केवल भारतीय इतिहास की एक महान हस्ती थे, बल्कि एक ऐसी परिवर्तनकारी शक्ति भी थे जिनके विचार आज भी देश की लोकतांत्रिक और सामाजिक चेतना को दिशा देते हैं। 1891 में एक वंचित दलित परिवार में जन्मे अंबेडकर ने व्यवस्थागत भेदभाव पर विजय पाई और एक विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, दार्शनिक तथा भारतीय संविधान के मुख्य निर्माता के रूप में उभरे। उनका पूरा जीवन उत्पीड़ितों के लिए न्याय, समानता और गरिमा की अथक खोज को समर्पित था।
अंबेडकर जयंती के अवसर पर उनकी विरासत को सम्मान देने के लिए, हम आपको यहां कुछ फिल्मों के बारे में बता रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य पाठकों को उन फिल्मों से रूबरू कराना है जो केवल मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव, मानवाधिकारों के हनन और न्याय की जटिल प्रक्रिया को गहराई से दर्शाती हैं।
1- Article 15 (2019) – हिंदी: सच्ची घटनाओं से प्रेरित यह फ़िल्म ग्रामीण भारत में व्याप्त जाति-आधारित भेदभाव के मुद्दे को गहराई से टटोलती है; इसमें आयुष्मान खुराना ने मुख्य भूमिका निभाई है।
2- Court (2014) – मराठी: एक मार्मिक और संयमित कोर्टरूम ड्रामा, जो न्याय प्रणाली और समाज के वंचित वर्गों के बीच की खाई को उजागर करता है।
3- Karnan (2021) – तमिल: मारी सेल्वराज द्वारा निर्देशित एक अत्यंत सशक्त फ़िल्म, जो जाति-आधारित उत्पीड़न और उसके विरुद्ध होने वाले विद्रोह को दर्शाती है; इसमें धनुष ने मुख्य भूमिका निभाई है।
4- Asuran (2019) – तमिल: सच्ची घटनाओं पर आधारित यह फ़िल्म दिखाती है कि किस प्रकार एक दलित परिवार हिंसक जातिगत उत्पीड़न का डटकर मुकाबला करता है। इस फ़िल्म में धनुष ने अपने अभिनय का एक शानदार प्रदर्शन किया है।
5- Periyar (2007) – तमिल (बायोपिक): पेरियार ई.वी. के जीवन पर आधारित एक जीवनीपरक फिल्म। रामासामी, एक समाज सुधारक जिन्होंने जाति और धार्मिक रूढ़िवादिता के खिलाफ लड़ाई लड़ी।
6- नागराज मंजुले की ट्रिलॉजी (मराठी): फैंड्री (2013) – एक दलित लड़के की दिल को छू लेने वाली कहानी, जो एक ऊँची जाति की लड़की के प्यार में पड़ जाता है।
7- सैराट (2016) – एक प्रेम कहानी जो जाति-आधारित ऑनर किलिंग (इज्जत के लिए हत्या) के कारण दुखद मोड़ ले लेती है।
8- झुंड (2022) – सच्ची घटनाओं पर आधारित, जिसमें अमिताभ बच्चन मुख्य भूमिका में हैं; यह फिल्म झुग्गी-झोपड़ियों के बच्चों को फुटबॉल के ज़रिए बाधाओं को पार करते हुए दिखाती है।
9- मंडेला (2021) – तमिल: एक राजनीतिक व्यंग्य जो ग्रामीण तमिलनाडु में जातिगत विभाजन के मुद्दे को हास्य के माध्यम से उठाता है। योगी बाबू का अभिनय ज़बरदस्त है।
10- भीड़ (2023) – हिंदी: अनुभव सिन्हा द्वारा निर्देशित, यह फिल्म COVID लॉकडाउन और देश के बँटवारे (Partition) के बीच समानताएँ दर्शाती है, साथ ही जाति, वर्ग और पलायन जैसे मुद्दों को भी गहराई से टटोलती है।
11- परियेरुम पेरुमल (2018) – तमिल: मारी सेल्वराज द्वारा निर्देशित, यह एक बेहद भावुक फिल्म है जो जातिगत उत्पीड़न का सामना कर रहे एक लॉ स्टूडेंट की कहानी बयाँ करती है।
12- विसारनाई (2015) – तमिल: पुलिस की बर्बरता और व्यवस्थागत भ्रष्टाचार पर आधारित एक विचलित कर देने वाली फिल्म, जो सच्ची घटनाओं पर आधारित है।