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कठिन समय में पुस्तकें दिखाती हैं सही राह

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: April 23, 2025 07:14 IST

किताबों के संपर्क में रहने वाले लोगों का दिमाग किताब न पढ़ने वाले लोगों की तुलना में 32 फीसदी युवा बना रहता है.

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रेणु जैन

पुस्तकें हमें हमेशा से सही रास्ता दिखाती रही हैं और जीवन का असली मकसद समझाती रही हैं. 23 अप्रैल 1564 को अंग्रेजी साहित्यकार शेक्सपीयर ने दुनिया को अलविदा कहा था तथा संयोगवश उनका जन्मदिन भी उसी तारीख को था. शेक्सपीयर की कृतियों का विश्व की समस्त भाषाओं में अनुवाद हुआ. इसी उपलब्धि को देखते हुए यूनेस्को ने 1995 से और भारत ने 2001 से इस दिन को पुस्तक दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की.

ग्लोबोलाइजेशन के इस युग में किताबें हमसे दूर होती जा रही हैं. पहले ऐसा नहीं था. पुस्तकें हमारी संगी-साथी हुआ करती थीं. हमारे प्राचीन ग्रंथों में भी किताबों के बारे में काफी उल्लेख मिलता है. गीता में तो यहां तक कहा गया है कि ‘ज्ञानात् ऋते न मुक्ति’ अर्थात ज्ञान के बिना मुक्ति संभव नहीं है.

पं. जवाहरलाल नेहरू का पुस्तकों के बारे में कहना था कि ‘जो पुस्तक सबसे अधिक सोचने को मजबूर करे वही उत्तम पुस्तक है.’ जाहिर है कि पढ़ने की आदत से इंसान का दिमाग सतत विचारशील रहता है. इससे उसके सोचने, समझने का दायरा व्यापक होता है, जिसका प्रभाव उसके पूरे जीवन पर पड़ता है.

पुस्तकें पढ़ने की आदत वाला व्यक्ति प्रायः कोई गलत निर्णय नहीं लेता क्योंकि उसकी आदत पड़ जाती है कि हर महत्वपूर्ण बात के अच्छे और बुरे पक्ष पर गहराई से विचार किया जाए उसके बाद ही किसी निर्णय पर पहुंचा जाए. मतलब यह हुआ कि उसका विवेक सदा क्रियाशील रहता है. और विवेकवान व्यक्ति ही जीवन में सफल होते हैं.

इंग्लैंड के एक विश्वविद्यालय के एक शोध के अनुसार जो लोग पढ़ने तथा रचनात्मक गतिविधियों से जुड़े होते हैं, वे हरदम कुछ नया सोचते रहते हैं या करते रहते हैं. मलाला यूसुफजई ने किताबों के बारे में कहा है ‘‘एक किताब, एक कलम, एक बच्चा और एक टीचर पूरी दुनिया बदलने के लिए काफी हैं. किताबों के संपर्क में रहने वाले लोगों का दिमाग किताब न पढ़ने वाले लोगों की तुलना में 32 फीसदी युवा बना रहता है. लगातार पढ़ने की आदत से वे हमेशा अपडेट बने रहते हैं.

यह तो सर्वज्ञात है कि उत्तम स्वास्थ्य के लिए गहरी नींद का होना अतिआवश्यक है. यदि आप अच्छी किताबें पढ़ कर सोने की आदत डाल लेंगे तो आप भी कहेंगे कि वाह क्या दिन निकला है. प्रसिद्ध कवि स्व. भवानीप्रसाद मिश्र की एक कविता की कुछ  पंक्तियां हैं - कुछ लिखकर सो/ कुछ पढ़कर सो/ जिस जगह तू जागा था/ उस जगह से बढ़कर सो.

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