Bharat Jhunjhunwala's Opinion: India should join the construction of belt road | भरत झुनझुनवाला का नजरियाः भारत को बेल्ट रोड निर्माण से जुड़ना चाहिए
भरत झुनझुनवाला का नजरियाः भारत को बेल्ट रोड निर्माण से जुड़ना चाहिए

भरत झुनझुनवाला
आर्थिक विश्लेषक   

चीन के साथ संबंध को हमें दो मायनों में देखना चाहिए। आज विश्व की 75 प्रतिशत जनता भारत, चीन तथा अन्य विकासशील देशों में रहती है। जबकि इनके पास विश्व की केवल 25 प्रतिशत आय है। दूसरी तरफ यूरोप, जापान और अमेरिका में केवल 25 प्रतिशत जनता रहती है। जबकि इनके पास 75 प्रतिशत आय है। पाकिस्तान में इमरान खान ने पूर्व में चीन के बेल्ट रोड इनिशिएटिव का विरोध किया था लेकिन चुनाव जीतने के बाद उन्होंने उसी बेल्ट रोड का समर्थन किया है। उनका पलटी खाना यह दिखाता है कि बेल्ट रोड पाकिस्तान के लिए कितना महत्वपूर्ण है। बेल्ट रोड योजना में चीन से हिंद महासागर तक पाकिस्तान एवं पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगिट क्षेत्न के मध्य से रेल तथा रोड लाइनों का नया नेटवर्क बनाया जाएगा जिससे चीन का माल हिंद महासागर आसानी से पहुंच सके। इस कार्य के लिए पाकिस्तान की सरकार भारी मात्ना में धन खर्च कर रही है। पाकिस्तान के राजस्व का बड़ा हिस्सा बेल्ट रोड में लगने के कारण शेष खर्चो को वहन करने के लिए पाकिस्तान के पास राजस्व नहीं है। इमरान खान ने संकेत दिए हैं कि वे धन की इस कमी की पूर्ति के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष से भारी ऋण की पेशकश करेंगे।
 
लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प मुद्राकोष द्वारा पाकिस्तान को दिए जाने वाले ऋण को चीन की सहायता के रूप में देख रहे हैं। उनका मानना है कि मुद्राकोष द्वारा दिए गए ऋण का उपयोग बेल्ट रोड बनाने में किया जाएगा जिसका अंतत: लाभ चीन को होगा जो कि अमेरिका का प्रमुख प्रतिद्वंद्वी है। अत: पाकिस्तान को चीन तथा अमेरिका के बीच में कठिन रास्ता निकालना है। पूर्व के अनुभव को देखते हुए हम यह मान सकते हैं कि पाकिस्तान अपने इस मनसूबे को पूरा करने में सफल होगा और बेल्ट रोड इनिशिएटिव को बनाना जारी रखेगा। 

बेल्ट रोड इनिशिएटिव के अंतर्गत चीन से यूरोप तथा अमेरिका तक माल ले जाने का भी एक सुगम मार्ग बनाया जाएगा। इससे चीन में बने माल को अफ्रीका तथा यूरोप पहुंचाने का खर्च कम पड़ेगा। अमेरिका की तुलना में चीन की प्रतिस्पर्धा शक्ति बढ़ेगी। अमेरिका के माल को यूरोप में पहुंचाना पूर्ववत समुद्री जहाजों से कठिन रहेगा जबकि चीन का माल बेल्ट रोड के माध्यम से अफ्रीका तथा यूरोप कम खर्च में पहुंच जाएगा।
 
भारत के लिए यह प्रकरण कठिन चुनौती प्रस्तुत करता है। भारत ने बेल्ट रोड का विरोध इस बिंदु पर किया है कि उसका एक हिस्सा गिलगिट के पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मध्य से गुजरता है। इसे भारत अपनी संप्रभुता पर आक्रमण मान रहा है जो कि सही है। भारत का विरोध राजनीतिक दृष्टि से उचित है। लेकिन बेल्ट रोड के बनने से चीन के माल का अफ्रीका और यूरोप को पहुंचना आसान हो जाएगा परंतु भारत के माल का उन्हीं देशों को पहुंचना पूर्ववत कठिन रहेगा। हम चीन से प्रतिस्पर्धा में वैसे ही पीछे हो जाएंगे जैसे अमेरिका पीछे हो जाएगा। अत: हमें कोई युक्ति निकाल भारत को भी बेल्ट रोड इनिशिएटिव से जोड़ना चाहिए जिससे हमारा माल भी यूरोप तथा अफ्रीका उतनी ही आसानी से पहुंच सके जितना कि चीन का माल पहुंच रहा है और हमारी प्रतिस्पर्धा शक्ति में कमी न आए। 

एक संभावना यह है कि भारत चीन पर दबाव डाले कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के बीच से भारत को भी बेल्ट रोड इनिशिएटिव से जोड़ने की सड़क उपलब्ध कराई जाए। यानी भारत का माल कश्मीर फिर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर फिर अफगानिस्तान के रास्ते बेल्ट रोड के माध्यम से अफ्रीका तथा यूरोप पहुंच सके। ऐसा हो जाने से भारत की प्रतिस्पर्धा शक्ति बढ़ जाएगी और भारत को भी बेल्ट रोड इनिशिएटिव का लाभ मिलेगा।

यहां बताते चलें कि भारत द्वारा विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर बेल्ट रोड का विरोध किया जा रहा है जो कि चीन के लिए एक समस्या है। विशेषकर ब्रिक्स देशों द्वारा बनाए गए न्यू डेवलपमेंट बैंक में भारत की अच्छी पैठ है। इस बैंक द्वारा भी बेल्ट रोड इनिशिएटिव के लिए ऋण दिया जा रहा है। भारत चीन पर दबाव डाल सकता है कि न्यू डेवलपमेंट बैंक तथा अन्य अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर वह बेल्ट रोड का विरोध करना बंद कर देगा यदि चीन पाकिस्तान पर दबाव डाले कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मध्य से भारत को बेल्ट रोड से जुड़ने के लिए रास्ता उपलब्ध कराया  जाए।
चीन के साथ संबंध को हमें दो मायनों में देखना चाहिए। आज विश्व की 75 प्रतिशत जनता भारत, चीन तथा अन्य विकासशील देशों में रहती है। जबकि इनके पास विश्व की केवल 25 प्रतिशत आय है।

दूसरी तरफ यूरोप, जापान और अमेरिका में केवल 25 प्रतिशत जनता रहती है। जबकि इनके पास 75 प्रतिशत आय है। इसलिए बेल्ट रोड के माध्यम से चीन और पूर्वी एशिया के अन्य देशों का उठना मूलत: वैश्विक असंतुलन को ठीक करने की तरफ एक सार्थक कदम है। लेकिन दूसरी तरफ हमारा चीन के साथ जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का मसला है वह हमें इस योजना से जुड़ने से रोक रहा है। अत: भारत का प्रयास होना चाहिए कि विकासशील देशों के बड़े हित को साधने के लिए जरूरत हो तो छोटे सामरिक हितों का रास्ता निकाल करके अपने आर्थिक हित को साधना चाहिए। बेल्ट रोड से अपने को अलग रखकर भारत अपने को यूरोप तथा अफ्रीका के बाजार से दूर कर लेगा जो कि अंतत: भारत के मैन्युफैक्चरिंग एवं कृषि क्षेत्नों के लिए बहुत ही हानिप्रद सिद्ध होगा।

भारत एक और कार्य कर सकता है। हमारी महारत सेवा क्षेत्न में है जैसे कॉल सेंटर, लीगल रिसर्च, मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन इत्यादि। इन सेवाओं का हमें वैश्विक पाथवे बनाना चाहिए उसी प्रकार जिस प्रकार चीन उत्पादित माल का वैश्विक पाथवे बेल्ट रोड के माध्यम से बना रहा है। उत्पादित माल को सड़क के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाया जाता है इसलिए बेल्ट रोड बनाना जरूरी था। लेकिन सेवाओं को इंटरनेट से एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाया जाता है। अत: भारत को चाहिए कि इंटरनेट का वैश्विक पाथवे बनाने का प्रयास करे। इंटरनेट के माध्यम से सूचनाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने में सुरक्षा आदि के विभिन्न पहलू हैं जिनको हल करके भारत को एक ग्लोबल इंटरनेट पाथवे बनाना चाहिए। जो कि चीन के बेल्ट रोड के सामने हमारी सेवाओं की प्रतिस्पर्धा शक्ति में सुधार करेगा।

हिंदी खबरों और देश-दुनिया की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें। हमारा यूट्यूब चैनल यहाँ सब्सक्राइब करें। हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!


विश्व से जुड़ी हिंदी खबरों और देश दुनिया की ताज़ा खबरों के लिए यहाँ क्लिक करे. यूट्यूब चैनल यहाँ सब्सक्राइब करें और देखें हमारा एक्सक्लूसिव वीडियो कंटेंट. सोशल से जुड़ने के लिए हमारा Facebook Page लाइक करे