Why a successful people like bhaiyyu ji maharaj, himanshu roy and mukesh pandey commits suicide | आखिर लाखों लोगों को हौसला देने वाले भय्यूजी महाराज जैसे लोग भी खुदकुशी क्यों कर लेते हैं ?

खुदकुशी या सुसाइड - ये नाम जब भी कानों पर पड़ते हैं तो मन इस अहसास से भर जाता है कि मरने वाले के मन में दर्द कितना होगा जिसे वो बर्दाश्त नहीं कर पाया। मंगलवार दोपहर को एक ऐसी ही घटना कानों में पड़ी। खबर मिली की देश के मशहूर आध्यातमिक गुरू भय्यू जी महाराज ने खुदकुशी कर ली है। हमेशा की तरह एक बार में इस खबर पर यकीन नहीं हुआ। लेकिन, जब इस बात की पूरी तरह से पुष्टि हुई तो मन सन्न हो गया। थोड़ी देर अपनी ऑफिस की कुर्सी पर बैठकर सिर्फ यही सोचता रहा कि क्या दुनिया में लोगों को आध्यात्म और 'जीने का तरीका' सीखाने वाले एक संत की जिंदगी भी इतनी तनाव भरी हो सकती है कि उसे खुदकुशी करनी पड़े?

वैसे तो किसी की भी मौत की खबर दुखी कर जाती है। लेकिन, किसी ऐसे का चले जाना जो समाज को प्रेरित करता हो या प्रेरणाश्रोत रहा हो, अंदर तक तोड़ जाता है। भय्यू जी महाराज से पहले भी कई ऐसे लोगों ने इसी तरह मौत को गले लगाया है। हाल ही में मुंबई पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर रहे हिमांशु रॉय ने भी अपनी सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली थी। इस खबर ने भी पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। हिमांशु को मुंबई पुलिस के 'सुपर कॉप' कहा जाता था। लेकिन, कैंसर जैसी बीमारी ने एक 'सुपर कॉप' को इस तरह तोड़ दिया कि उसे खुद को गोली मारना कम दर्दनाक लगा। 

ठीक इसी तरह बक्सर के डीएम मुकेश पांडे ने भी अपनी इहलीला समाप्त कर ली थी। मुकेश एक युवा और तेजतर्रार ऑफिसर थे। लेकिन, निजी जीवन में चल रहे तनाव और परेशानियां उन्हें गाजियाबाद के रेलवे ट्रैक तक ले आई जहां उन्होंने परिस्थितियों से लड़ने से बेहतर ट्रेन के पहिए के नीचे कटकर मरना बेहतर समझा।

बॉलीवुड और टीवी की दुनिया भी इससे अछूती नहीं रही है। एक ऐसे आर्टिस्ट थे जिन्होंने अचानक मौत को गले लगाना बेहतर समझा। इनमें से कुछ को ऐसे थे जिनका करियर पूरे शबाब पर था। और ऐसे वक्त में उन्होंने मौत को गले लगाया जो सबको स्तब्ध कर गया। जिया खान, प्रत्युषा बनर्जी कुछ ऐसे नाम है जिनके मन में दर्द इतना गहरा उतर चुका था कि मौत का दर्द सहना उन्हें ज्यादा आसान लगा।

ऊपर जिन शख्सियतों के बारे में मैनें बात की है वो अपने जीवन में सफल व्यक्ति के तौर पर अपनी पहचान बना चुके थे। एक आध्यात्मिक गुरु था जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी झुककर प्रणाम करते थे। वहीं, एक सफल IPS और एक सफल IAS और कोई सफल फिल्मी सितारा जिसके जैसा बनने का सपना भारत का हर युवा देखता है। लेकिन, इन घटनाओं ने इतना तो साफ कर दिया है कि चाहे कितनी भी सफलता आपके कदम क्यों ना चूम ले, लेकिन, जीवन का एक सच ये भी है कि अकेलापन और तनाव आपको अंदर तक तोड़ने में ज्यादा वक्त नहीं लगाते।

ये सब देखकर डर भी लगता है और ये सोचने पर मजबूर भी कर देता है कि क्या हमारा भी कोई अपना इसी दर्द से तो नहीं गुज़र रहा? और अगर ऐसा है तो इसका तत्काल निदान ढूंढना ज़रूरी है। जिंदगी है तो मौत भी होगी ही। लेकिन, इस तरह होने वाली मौतें हमारे दिल में चोट तो पहुंचाती ही है। साथ ही साथ हमारे सभ्य और सुदृढ़ समाज पर एक सवालिया निशान भी छोड़ जाती हैं।


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