Shobhna Jain blog on digital strike against China | शोभना जैन का ब्लॉग: चीन के खिलाफ 'डिजिटल स्ट्राइक' सही कदम, लेकिन आगे बरतनी होगी सावधानी
शोभना जैन का ब्लॉग: चीन के खिलाफ 'डिजिटल स्ट्राइक' सही कदम, लेकिन आगे बरतनी होगी सावधानी

चीन की हाल की बढ़ती आक्रामकता और विस्तारवादी मंसूबों  से निबटने के लिए सरकार  एक तरफ जहां कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर निबटने का प्रयास कर रही है, वहीं सरकार ने इस  सप्ताह 59 चीनी मोबाइल ऐप को देश की संप्रभुता और अखंडता के प्रति खतरा मानते हुए प्रतिबंध लगाकर चीन को कड़ा संदेश दिया. 

पूर्वी लद्दाख में चीन की बढ़ती आक्रामकता और वास्तविक नियंत्नण रेखा पर घात लगा कर गत 15 जून की खूनी मुठभेड़ में 20 भारतीय शूरवीरों की जघन्य हत्या किए जाने के बाद यह पहला ऐसा कदम है जबकि भारत ने चीन को साफ तौर पर अल्टीमेटम दिया है कि भारत ने उसके साथ अपने रिश्तों पर पुनर्विचार करना शुरू कर दिया है. 

निश्चय ही यह आर्थिक, राजनीतिक और तकनीकी दृष्टि से बड़ा कदम है. संदेश स्पष्ट है कि अगर किसी संसाधन को देश की संप्रभुता और अखंडता के लिए खतरा माना जा रहा है तो फिर उनको संदेह का लाभ नहीं दिया जा सकता है. इस संदेश से चीन बौखला गया है. इस कदम से चीनी अर्थव्यवस्था, बाजार और तकनीकी कंपनियों का राजस्व  प्रभावित होगा. 

साथ ही इससे भारत ने चीन को संदेश दे दिया है कि वह उसके साथ मौजूदा सीमा तनाव को दूर करने के लिए सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी रखेगा लेकिन संबंधों को सहज बनाने की भारत की तमाम कोशिशों और वुहान भावना की विश्वास बहाली की तमाम सहमतियों की उसने जिस तरह से धज्जियां उड़ाई हैं, उससे वह अब अपनी चीन नीति पर पुनर्विचार करने के मोड में आ गया है. साइबर सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक ऐप्स को प्रतिबंधित करने के साथ यह संकेत है कि भारत सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कड़ी कार्रवाई करने से हिचकेगी नहीं.

सरकार के इस फैसले का असर सिर्फ भारत और चीन में ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर दिखाई दे रहा है. चीनी कंपनियों की विश्वसनीयता के सामने पहले ही संकट है और भारत जैसे बहुत बड़ी जनसंख्या वाले लोकतंत्न का यह कदम चीनी कंपनियों की वैश्विक साख को और भी प्रभावित करेगा.

 भारत सरकार आत्मनिर्भर होने की बात पर जोर देकर संभवत: अप्रत्यक्ष रूप से चीन पर अपनी निर्भरता घटाने का संकेत दे रही थी. आगे कुछ और बड़े फैसले भी वह कर सकती है. दूरसंचार, रेलवे, परिवहन सहित अनेक मंत्नालयों ने चीनी कंपनियों के कुछ अनुबंध रद्द किए हैं और ऐसे कुछ टेंडर भी रद्द कर दिए हैं, जहां पर चीनी कंपनियां दावेदार थीं और देश में जनता के स्तर पर चीनी सामान के बहिष्कार की मांग भी जोर पकड़ रही है. भारत अब चीन के व्यवहार और प्रतिक्रिया को भांपता रहेगा. अगर उसका आक्रामक और शत्नुतापूर्ण रुख जारी रहता है तो दायरा और बढ़ सकता है.

कोविड-19 और मौजूदा सीमा टकराव के बीच देश में चीन के आर्थिक बहिष्कार और आत्मनिर्भर होने की बात जोर-शोर से चल रही है, लेकिन यह दूरगामी लक्ष्य है. भारत का फौरी लक्ष्य है पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य पाने का. कुछ विचारकों का मत है कि इस तरह के कदमों से विदेशी निवेश पर असर पड़ेगा, ऐसे में संतुलन बनाते हुए विदेशी निवेश को भी प्रोत्साहित करना है, लेकिन यह बात स्पष्ट है कि विदेशी निवेश को प्रोत्साहन देने के निर्णय के बावजूद भारत चीनी निवेशकों को अनुमति नहीं देगा. सरकार को इन तमाम समीकरणों पर ध्यान देते हुए और इसके प्रभावों को मद्देनजर रखते हुए सावधानी से कदम उठाने होंगे. ऐसे में चीनी उत्पादों का बहिष्कार किस हद तक हो पाएगा, यह तो भविष्य में ही पता चल सकेगा. जहां तक आत्मनिर्भर बनने का सवाल है तो पहले एक ऐसा दौर था जब हम कई मामलों में आत्मनिर्भर थे. बहुत से कच्चे माल में हम चीन से काफी आगे थे.

ऐसे में चीन के साथ मौजूदा विवाद से सबक लेते हुए भारत को भावी चुनौतियों का सामना करने की रणनीति सावधानी से बनाने की जरूरत है. एप्स पर प्रतिबंध एक छोटी अच्छी शुरुआत कही जा सकती है लेकिन आर्थिक रिश्तों का दायरा बहुत व्यापक है. इस पर सावधानी से कदम उठाने होंगे.

Web Title: Shobhna Jain blog on digital strike against China
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