Rajesh Kumar Yadav blog over Subhash Chandra Bose Birth Anniversary & Azad Hind Government | राजेश कुमार यादव का ब्लॉग: अंडमान में फहराया था आजादी का पहला तिरंगा
नेताजी सुभाष चंद्र बोस। (फाइल फोटो)

जब आजादी के नायकों की बात आती है तो नेताजी सुभाष चंद्र बोस का नाम हमें गौरव से भर देता है. खून के बदले आजादी देने का नारा बुलंद करने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज 23 जनवरी को जयंती है. नेताजी न केवल भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी रहे, बल्कि आजाद भारत की पहली सरकार बनाने का काम भी किया. सुभाष चंद्र बोस ने अंडमान की धरती को भारत की आजादी की पहली संकल्प भूमि बनाया. अंग्रेजों के चंगुल से छूटने वाला भारत का पहला टुकड़ा था अंडमान और निकोबार द्वीप तथा इसका श्रेय जाता है नेताजी सुभाष चंद्र बोस को. 

द्वितीय विश्व युद्ध के शुरू होते ही नेताजी जर्मनी से सिंगापुर आए और उसके बाद उन्होंने भारतीयों से ये वादा किया कि सन 1943 आते-आते वे अपनी धरती पर अपना झंडा जरूर फहराएंगे. इसी दौरान अंडमान पर जापानी सेना का कब्जा हो गया था, क्योंकि ब्रिटिश सेना ने बिना लड़े ही मैदान छोड़ दिया. इसके बाद आजाद हिंद फौज जापानी सेना को इस बात पर मनाने में कामयाब रही कि वह अंडमान और निकोबार को आजाद हिंद सरकार को सौंप दे. 

आजाद हिंद सरकार के पहले प्रधानमंत्री के रूप में नेताजी ने 30 दिसंबर 1943 को पोर्ट ब्लेयर में पहली बार भारतीय जमीन पर तिरंगा फहराया था. झंडा फहराकर नेताजी ने सांकेतिक तौर पर आजाद हिंद सेना के 1943 के अंत तक भारतीय जमीन पर खड़े रहने के अपने वादे को पूरा किया था. इसी के साथ अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह आजाद हिंद सरकार के अधीन हो गया. 

आजाद हिंद सरकार बनते ही सभी राजनीतिक कैदियों को कालापानी कही जाने वाली सेल्युलर जेल से रिहा कर दिया गया और ब्रिटिश अफसरों व सैनिकों को बंदी बनाकर बर्मा भेज दिया गया. 

सुभाष चंद्र बोस ने अंडमान द्वीप का नाम बदलकर शहीद द्वीप और निकोबार द्वीप का नाम बदलकर स्वराज द्वीप कर दिया था. यही नहीं उन्होंने आजाद हिंद सेना के जनरल ए.डी. लोकनाथन को उन दोनों द्वीपों का शासक भी नियुक्त कर दिया था. 

नेताजी ने जिस स्थान पर आजादी का झंडा फहराया था, उसे अब सुभाष चंद्र बोस द्वीप कहा जाता है. जनरल लोकनाथन, आजाद हिंद फौज के चार अन्य अधिकारियों के साथ 11 फरवरी, 1944 को पोर्ट ब्लेयर पहुंचे और अंडमान में आजाद हिंद सरकार की स्थापना की. 

इस प्रकार आजाद हिंद सरकार अब एक निष्कासित सरकार मात्र नहीं रह गई थी अपितु इसके पास अपना भूक्षेत्र, मुद्रा, सिविल संहिता और डाक टिकट भी थे. 

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल ही आजाद हिंद सरकार के 75 साल पूर्ण होने पर लाल किले से तिरंगा फहराया था. ऐसा इतिहास में पहली बार हुआ कि किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने 26 जनवरी और 15 अगस्त के अलावा लाल किले पर तिरंगा फहराया हो. 

इस समारोह में उन 11 देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे, जिन्होंने सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद सरकार को मान्यता दी थी.
 

Web Title: Rajesh Kumar Yadav blog over Subhash Chandra Bose Birth Anniversary & Azad Hind Government
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