अमित कुलकर्णी का ब्लॉग: पांडुरंग शास्त्री ने मनुष्य को दिलाया गौरव

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Published: October 19, 2021 01:27 PM2021-10-19T13:27:17+5:302021-10-19T13:34:33+5:30

आज 19 अक्टूबर पद्मविभूषण पांडुरंग शास्त्री आठवले (दादाजी) का जन्मदिन है. संपूर्ण स्वाध्याय परिवार इसे 'मनुष्य गौरव दिवस' के रूप में मनाता है. गत वर्ष 2019-20 में दादाजी का जन्मशताब्दी वर्ष था, परंतु इस वर्ष भी अखिल विश्व का स्वाध्याय परिवार दादाजी की जन्मशताब्दी उत्साह से मना रहा है. 

pandurang shashtri athavale dadaji human values | अमित कुलकर्णी का ब्लॉग: पांडुरंग शास्त्री ने मनुष्य को दिलाया गौरव

पांडुरंग शास्त्री आठवले.

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Highlightsआज 19 अक्टूबर को पद्मविभूषण पांडुरंग शास्त्री आठवले (दादाजी) का जन्मदिन है.संपूर्ण स्वाध्याय परिवार इसे 'मनुष्य गौरव दिवस' के रूप में मनाता है.

19 अक्टूबर पद्मविभूषण पांडुरंग शास्त्री आठवले (दादाजी) का जन्मदिन है. संपूर्ण स्वाध्याय परिवार इसे 'मनुष्य गौरव दिवस' के रूप में मनाता है. गत वर्ष 2019-20 में दादाजी का जन्मशताब्दी वर्ष था, परंतु इस वर्ष भी अखिल विश्व का स्वाध्याय परिवार दादाजी की जन्मशताब्दी उत्साह से मना रहा है. 

आज यदि किसी व्यक्ति के पास पद, पैसा, प्रतिष्ठा हो तभी समाज में उसकी कोई कीमत है, जिसके पास इनमें से कुछ भी न हो उसे दीन-हीन समझा जाता है, ओछा माना जाता है. परंतु मानव की कीमत क्या पद और पैसे से ही है? 

दादाजी के शब्दों में कहें तो, 'पद, पैसा, प्रतिष्ठा यह मसाला-दूध में रहे मसाले जैसा है. यदि दूध में मसाला न डाला गया हो फिर भी दूध की अपनी कीमत तो है ही न! इसी तरह पद, पैसा, प्रतिष्ठा के बिना भी मानव की कीमत है, उसका मूल्य है. सर्वशक्तिमान प्रभु प्रत्येक मानव में बसते हैं 'सर्वस्य चाहं हृदि सन्निविष्टो' यही उसका सच्चा गौरव है.' 

मनुष्य का गौरव उसके पैसा, पद या प्रतिष्ठा की वजह से नहीं बल्कि उसके भीतर बैठी हुई चित् शक्ति की वजह से है. मनुष्य गौरव का यह मुख्य विचार दादाजी ने समझाया.

यदि गहराई में जाकर विचार किया जाए तो समझ में आता है कि मानवीय मूल्यों का अध:पतन होने के कारण आज मानव समाज एक भयानक स्थिति में पहुंच गया है. मानवता, समानता, बंधुत्व ये शब्द केवल पुस्तकों में या बड़ी-बड़ी सभाओं, भाषणों में बोले जाने तक ही सीमित रह गए हैं. 

वास्तव में मानव अपना सत्व और स्वत्व खो बैठा है. परंतु यदि किसी के पास पैसा, पद, बुद्धिमत्ता इनमें से कुछ भी न हो तो ऐसा व्यक्ति गौरव रखे भी तो किस बात का? दादाजी कहते हैं, 'ममैवांशो जीवलोके' मैं प्रभु का अंश हूं इसलिए मैं सामान्य नहीं हूं, मन में इस बात का गौरव होना चाहिए. 

संपूर्ण विश्व का निर्माण करनेवाले, चलाने वाले प्रभु प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में आकर बैठे हैं. इसलिए परसम्मान भी चाहिए. यही मनुष्य गौरव का बीज है. 'भगवान मेरे साथ हैं' केवल इतना बोलकर दादाजी नहीं रुके बल्कि जीवन में भगवान का महत्व बताया, भगवान का स्थान निर्माण किया. 

आजीवन 'मनुष्य गौरव' का विचार लेकर अथक और अविरत घूमनेवाले और लाखों लोगों के जीवन में 'मनुष्य गौरव' द्वारा परिवर्तन लाने वाले ऐसे महापुरुष का जन्मदिन, 'मनुष्य गौरव दिवस' के सिवा और दूसरा क्या हो सकता है? अंत में धनश्री दीदीजी (दादाजी की सुपुत्री और स्वाध्याय कार्य प्रमुख) के शब्दों में कहा जाए तो...

जिक्र जब आएगा इंसान की तरक्की का,
आपका नाम ही बड़े फख्र से जहां लेगा.

 

Web Title: pandurang shashtri athavale dadaji human values

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