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मध्य प्रदेश कांग्रेसः टैलेंट हंट का मकसद और पुरानी परंपरा, पिछले 23 वर्षां में केवल 15 महीने ही कांग्रेस सत्ता में रही...

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: February 18, 2026 20:00 IST

Madhya Pradesh Congress: आवेदन पत्रों का वितरण प्रारंभ हो गया है और 28 फरवरी आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि है.

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ठळक मुद्देMadhya Pradesh Congress: कांग्रेस की विचारधारा का होना चाहिए.Madhya Pradesh Congress: पिछले 23 वर्षां में केवल 15 महीने ही कांग्रेस सत्ता में रही.Madhya Pradesh Congress: कांग्रेस को यह समझना होगा कि यह स्थिति क्यों पैदा हुई?

Madhya Pradesh Congress:मध्य प्रदेशकांग्रेस ने एक नई पहल की है. पार्टी प्रवक्ताओं के नए बैच की भर्ती के लिए टैलेंट हंट प्रोग्राम शुरू किया है. मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार की मानें तो टैलेंट हंट का मकसद योग्य प्रवक्ताओं, अनुसंधान समन्वयकों और प्रचार समन्वयकों की तलाश करना है. 20 राज्य प्रवक्ता, कई मीडिया पैनलिस्ट और मंडल तथा जिला स्तर पर दो-दो प्रवक्ता चुने जाने हैं. जाहिर सी बात है कि जो चुने जाएंगे, उन्हें कांग्रेस की विचारधारा का होना चाहिए.

आवेदन पत्रों का वितरण प्रारंभ हो गया है और 28 फरवरी आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि है. सामान्य तौर पर यह सब सुनना अच्छा लग रहा है. जो समझ रखने वाले युवा हैं या जिनकी रुचि शोध में है और भारत को नई दिशा देने की तमन्ना रखते हैं, उनके लिए यह नया अवसर हो सकता है. मध्यप्रदेश में कांग्रेस बुरे दौर में है. पिछले 23 वर्षां में केवल 15 महीने ही कांग्रेस सत्ता में रही.

कांग्रेस को यह समझना होगा कि यह स्थिति क्यों पैदा हुई? ऐसा तो कतई नहीं कहा जा सकता कि कांग्रेस के पास टैलेंट की कमी थी, इसलिए पार्टी लोगों से दूर होती चली गई! कांग्रेस में एक से एक टैलेंटेड नेता और कार्यकर्ता रहे हैं लेकिन कांग्रेस के बारे में यह राय क्यों बनती चली गई कि वहां टैलेंट हंट का मतलब टैलेंट का शिकार करना है?

क्यों यह राय बनती चली गई है कि कांग्रेस में जो भी व्यक्ति टैलेंटेड होता है, उसके खिलाफ ऐसी भितरघात होती है कि वह टिक ही नहीं पाए? कांग्रेस के नेताओं को ही ऐसा क्यों लगता रहा है कि कांग्रेसी अपने ही लोगों का शिकार करते हैं, झूठे आरोपों में फंसाते हैं? क्यों इतने सारे नेता कांग्रेस को छोेड़कर चले गए? लोग क्यों ऐसा कहते हैं कि आलाकमान को चापलूसों की फौज ने घेर रखा है?

क्या कांग्रेस में शशि थरूर से ज्यादा टैलेंटेड कोई है? फिर उनकी उपेक्षा क्यों हो रही है? कांग्रेस को ये सारी बातें सोचनी होंगी. केवल टैलेंट को चुन कर पार्टी में लाने से काम नहीं चलेगा. टैलेंट के लिए पूरा परिवेश तैयार करना होगा ताकि वे देश के लिए जो सोचते हैं, उसे क्रियान्वित करने का मौका उन्हें मिले.

पार्टी में लोकतांत्रिक व्यवस्था तैयार करनी होगी ताकि सबके लिए समान अवसर उपलब्ध हो सके. कांग्रेस को सोचना होगा कि उसका मुकाबला ऐसी भारतीय जनता पार्टी से है जिसके नेता चौबीसों घंटे सक्रिय और समर्पित रहते हैं. कांग्रेस के हाल क्या हैं? नेताओं की तो फिर भी थोड़ी पूछ-परख हो जाती है,

क्या कार्यकर्ताओं से बात करने वाला भी कोई है? कांग्रेस को सोचना होगा कि उसकी बदहाली लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है. लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब विपक्ष में भी हौसले वाली पार्टी हो. कांग्रेस के भीतर हौसला कहीं नजर नहीं आ रहा है. टैलेंट ढूंढ़िए मगर टैलेंट का शिकार मत कीजिए! 

टॅग्स :मध्य प्रदेशकांग्रेसKamal Nath
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