lok sabha election: leaders campaign, leader strategy for popularity | शरद जोशी का ब्लॉगः बड़ा बनने के लिए प्रचार की दरकार  
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आजकल जब पुरानी अच्छी पीढ़ी की संख्या कम हो रही है, तो नई पीढ़ी के सामने यह सवाल आ रहा है कि किस तरह जुगत जमाकर हम यह स्थान लें और ऐसी कुछ व्यवस्था हो कि इधर मरे नहीं कि उधर आधे झंडे झुक जाएं. इसलिए बड़े कैसे बनें, इस प्रश्न पर काफी दिमागपच्ची की दरकार है और इस संबंधी सभी पुराने फॉमरूलों को समाज के सामने दोहराना बड़ा जरूरी है. जैसे एक यही है कि आदमी अपने प्रयत्नों से बड़ा बनता है.

यह बात वाकई में सोचने और आजमाने काबिल है कि आप ही कोशिश करके बड़े बनिए, कोई दूसरा आपको बड़ा नहीं बनाएगा. बड़ा क्या होता है- प्रचार के आवरण में एक पवित्र आत्मा होती है. दो ही बातें हैं. एक तो अपने को अच्छा रखो; दूसरे, अच्छा-खासा प्रचार करो. अब इन दोनों में एक तीसरी बात जोड़ता हूं, वह है- सामाजिक मजबूरी. हां, तो आत्मा पवित्र होती ही है. यदि आप थोड़ा-सा खयाल रखें तो वह मैली नहीं होगी. थोड़ी मैली हो भी गई तो एकाएक पता नहीं चलता. पता आपको चले तो उसे व्यक्त न कीजिए और दूसरों को पता चल गया तो तब आपका सहारा आपका दूसरा प्रबल सद्गुण करेगा और वह है- प्रचार.

अब प्रचार का पहलू है. यहां इस मुद्दे की बात पर सोचिए कि बड़प्पन की कोशिशों में अपना काम आप ही को करना है. अपना काम दूसरे के भरोसे नहीं छोड़ें. आप खुद अपना प्रचार कीजिए. अखबार जब सामने आता है तो जनसाधारण को यह पता नहीं लगता कि इसमें किस व्यक्ति ने खुद अपनी प्रचार व्यवस्था की है और किसने नहीं की और हो गया. जनता दोनों तरह के आदमी को बड़ा मानती है. अब यह मानिए, अपनी बातों का प्रचार नहीं करना इस युग में सबसे बड़ा पाप है. प्रचार क्यों नहीं करेगा? आप कोई चोरी कर रहे हैं अथवा कोई षड्यंत्र कर रहे हैं? नहीं, आप तो अच्छा काम कर रहे हैं तो फिर छुपाकर क्यों? प्रचार कीजिए.

निर्माण के युग में बड़े बनने का नया फॉमरूला यह है कि दूसरों का काम दूसरों से ही करवाओ और प्रचार अपना करो. खुद उनका काम करना बेकार बात है. उन्हें कहो कि वे स्वयं अपना काम करें. इस तरह से ऐसा कुछ प्रयत्न कीजिए कि निर्माण की जो ऐतिहासिक गति है, उसमें एक बड़े क्षेत्र के प्रेरणा-केंद्र आप माने जाएं. 

काम जनता करे, सेहरा खुद बंधवाइए. सालों बाद भोली जनता मान जाएगी कि जो हुआ सो आपके कारण हुआ. बस, आप बड़े बन जाएंगे. बड़े आदमी आसमान से नहीं उतरते. आज कोई चाहे तो प्रयत्न करके बड़ा हो सकता है.
(रचनाकाल - 1950 का दशक)


Web Title: lok sabha election: leaders campaign, leader strategy for popularity