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ताजा हवा के झोंके जैसा है शिक्षा क्षेत्र में सुधार

By लोकमत समाचार हिंदी ब्यूरो | Updated: July 14, 2018 04:45 IST

परीक्षा के दिनों में स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों में तनाव साफ दिखाई देने लगता है जो अपेक्षाओं के कारण उपजी चिंता और भय से प्रेरित होता है।

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लेखक- डॉ. एस.एस. मंठापरीक्षा के दिनों में स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों में तनाव साफ दिखाई देने लगता है जो अपेक्षाओं के कारण उपजी चिंता और भय से प्रेरित होता है। दुर्भाग्य से ऐसी कोई जादू की छड़ी नहीं है जिसे घुमाकर छात्रों के जीवन से तनाव को दूर किया जा सके। तनाव को नियंत्रित करना एक सक्रिय प्रक्रिया है, जिसका अर्थ है उसके प्रभाव को सीमित करने के लिए कदम उठाना। निष्क्रिय तनाव को तो आसानी से सुझावों और दवाओं के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन सक्रिय तनाव ऐसी चीज है जिससे बचना ही बेहतर है। लेकिन यदि सक्रिय तनाव प्रणालीगत या प्रौद्योगिकी की विफलताओं से प्रेरित हो तो फिर हमें उस पर जरा ठहर कर ध्यान देने की जरूरत है।

इस संदर्भ में, मानव संसाधन विकास मंत्रलय द्वारा सभी प्रतियोगी परीक्षाओं को एक नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के जरिए ऑनलाइन करवाने का निर्णय एक स्वागत योग्य कदम है। यह राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा, नीट,  संयुक्त प्रवेश परीक्षा मेन्स, जेईई मेन्स और नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट, नेट जैसी परीक्षाओं पर लागू होगा, जिन्हें अब तक केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा करवाया जाता रहा है। सीमैट और जीपैट परीक्षा भी अब एनटीए ही आयोजित करेगा। उम्मीद करनी चाहिए कि इसमें पेशेवर दृष्टिकोण अपनाया जाएगा जिससे प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही आएगी। 

हाल के दिनों में कुछ परीक्षाओं के पर्चे लीक होने की घटनाएं सामने आईं जिसके लिए काफी आलोचनाएं की गईं। जब स्कूल या उच्च शिक्षा की दुनिया की सबसे बड़ी शिक्षा प्रणालियों में से एक की गलत कारणों के लिए आलोचना होती है तो क्या होता है? सबसे पहले तो विश्वसनीयता को धक्का पहुंचता है। जो पवित्र धागा छात्रों को एक सूत्र में बांधता है, वह परीक्षा में उनका विश्वास है और जिस निष्पक्षता के साथ यह प्रक्रिया आयोजित की जाती है उससे किसी भी कारण से समझौता नहीं किया जा सकता। यदि प्रश्नपत्र लीक होते हैं तो बच्चे, चाहे वे किसी भी आयुवर्ग के हों, प्रणाली द्वारा अपने आपको ठगा गया महसूस करते हैं, क्योंकि वे देखते हैं कि अपराधियों द्वारा किसी छोटे या बड़े समूह को अनुचित तरीके से लाभ पहुंचाया गया है। बच्चे और अभिभावक हर वह संभव कदम उठाते हैं जो परीक्षा के लिए जरूरी होता है। इसलिए इसे रोकने के लिए ऐसे प्रगतिशील सुधारों को लागू करना जरूरी हो गया था, जिन्हें अब किया गया है।

ऐसे कई पुराने तरीके हैं जो पेपर लीक जैसी घटनाओं से बचने के लिए उठाए जाते हैं- जैसे प्रश्नपत्रों के कई सेट तैयार करना, उनके लिए कोड तैयार करना, विशेष सीलिंग तकनीक का उपयोग करना ताकि उन्हें समय से पहले न तोड़ा जा सके आदि। इसके बावजूद पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं। यह लीक पेपर सेट करने वालों की तरफ से भी हो सकता है या उन कोचिंग क्लास चलाने वालों की तरफ से, जहां वे अपनी सेवाएं प्रदान करते हैं। इसे रोकने के लिए दो-तीन अलग-अलग स्थानों पर पेपर सेट किए गए और कई बार आखिरी समय पर उन्हें बदला भी गया, बारकोडिंग और प्रकाश सेंसिटिव पेंट्स का उपयोग किया गया ताकि लीक को रोका जा सके। परीक्षाओं को लीकप्रूफ बनाने का एक और तरीका हो सकता है, जिसके अंतर्गत सेट किए गए प्रश्नपत्रों को विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर इंटरनेट के जरिए परीक्षा शुरू होने के कुछ ही मिनट पहले पहुंचाया जाए जो कोड के जरिए एनक्रिप्ट हों। बेशक इसके लिए एक मजबूत इंटरनेट और पर्याप्त बैंडविड्थ की आवश्यकता होगी, जिससे समझौता नहीं किया जा सकता। इसके बाद हाईस्पीड फोटोकॉपी मशीन के जरिए उसके प्रिंट वजर्न तैयार किए जाएं। हालांकि यह डिलिवरी साइड का मामला है लेकिन इससे पहले बताए गए सुरक्षा उपायों को अपनाने में कोई बाधा नहीं आती। 

नीट और जेईई जैसी परीक्षाओं का साल में दो बार आयोजन करना और छात्रों के दोनों बार में से जिसमें भी अच्छे नंबर आएं, उसे मान्य करना भी एक अभिनव प्रयास है। इसमें अगर कोई छात्र दुर्भाग्यवश एक बार परीक्षा न दे पाए तो उसके पास दूसरा मौका रहेगा। लेकिन जैसा कि एक महान डच फुटबॉल खिलाड़ी  जोहान क्रूफ ने कहा था : ‘हर लाभ के पीछे एक नुकसान भी छिपा होता है’। यह बात ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली के बारे में भी सच है। इससे निश्चित रूप से कागज की बचत होगी, समय की बचत होगी, पैसे की बचत होगी और यह ज्यादा सुरक्षित भी होगी। लेकिन एक पूरी तरह से ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली वह है जिसमें छात्र अपने उपकरण पर, अपने द्वारा निर्धारित समय पर परीक्षा देते हैं जिसमें कोई भी जांच नहीं करता है। इसलिए इस स्थिति के अनुरूप प्रश्नपत्र में बदलाव किया जाना होगा। प्रश्न ऐसे होने चाहिए जिन्हें पुस्तकों या इंटरनेट से आसानी से पुनप्र्राप्त न किया जा सके। या प्रत्येक प्रश्न में टाइमर भी जोड़ा जा सकता है, जिससे उत्तर खोजने का समय न मिल सके। सेल्फ असेसमेंट को बढ़ावा देने के लिए और भी सुधारों की जरूरत है। 

सीसीटीवी नियंत्रित परीक्षा हॉल आज हममें से कुछ लोगों को भले ही काल्पनिक बातें लगें, लेकिन उनके हकीकत का रूप लेने में ज्यादा देर नहीं है। तकनीक की मदद से आज हजारों किमी दूर बैठकर भी कोई परीक्षक अपने परीक्षार्थियों की हर गतिविधि पर निगाह रख सकता है। सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में सुधारों की दिशा में बढ़ना सिर्फ स्वागत योग्य कदम ही नहीं है बल्कि एक सुखद अभिनव प्रयास है।

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