ब्लॉग: दिल्ली से बेंगलुरु और चेन्नई तक...‘स्मार्ट’ और ‘हाईटेक’ सिटी की पोल खोलती बारिश

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Published: September 9, 2022 03:35 PM2022-09-09T15:35:12+5:302022-09-09T15:35:12+5:30

भारत में महानगरों में विकास तो बहुत तेजी से हो रहा है, लेकिन बुनियादी ढांचे को नजरंदाज किया जा रहा है. महानगरों के विकास में आसपास के गांवों को मिलाया जा रहा है, लेकिन गांवों को शहर के सीवेज सिस्टम से जोड़ने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

Delhi to Bangalore and Chennai, rain always exposes our 'smart' and 'hi-tech' cities | ब्लॉग: दिल्ली से बेंगलुरु और चेन्नई तक...‘स्मार्ट’ और ‘हाईटेक’ सिटी की पोल खोलती बारिश

नियोजन के अभाव में पानी-पानी होते महानगर

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कुदरती कहर से हमारे सभी महानगर हलाकान हैं. अगर 24 घंटे भारी बारिश हो जाए तो दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसा महानगर हो या कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु- सब पानी-पानी हो जाते हैं. ‘स्मार्ट’ और ‘हाईटेक’ सिटी का रुतबा दिखाने वाले शहर भी एक-दो दिन की भारी बारिश झेल नहीं पाते. कई-कई फुट पानी में डूबे दिखाई देते हैं. हालत यह है कि बरसात का मौसम आते ही लोगों में खौफ कायम हो जाता है. 

हमारे लगभग सभी महानगरों की हालत एक जैसी है. इस समय बात करें बेंगलुरु की तो बारिश ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. सड़कों पर पानी भर गया, घरों के बेसमेंट जलमग्न हो गए और लोगों को आवागमन के लिए ट्रैक्टर का सहारा लेना पड़ा. ये कोई पहली बार नहीं है कि यहां बारिश इस तरह की आफत लेकर आई है. दरअसल, हमारे नगर और महानगर खराब जल निकासी की व्यवस्था, उचित योजना और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण जलभराव की परेशानी से दो-चार होते रहते हैं और इनके ‘हाईटेक’ होने के दावों की पोल खुल जाती है. 

हमारे महानगरों में विकास तो बहुत तेजी से हो रहा है, लेकिन बुनियादी ढांचे को नजरंदाज करते हुए. महानगरों के विकास में आसपास के गांवों को मिलाया तो जा रहा है, लेकिन गांवों को शहर के सीवेज सिस्टम से जोड़ने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. यही कारण है कि तूफानी बारिश में नालियां बेकार हो जाती हैं और बारिश का पानी सड़कों पर सैलाब बनकर फैल जाता है. शहर कोई भी हो, अचानक और भारी बारिश से निपटने के लिए तैयार नहीं दिखता. नालियां अक्सर कचरे से भरी रहती हैं, जिससे पानी का बहाव रुकता है. 

लगातार बढ़ती आबादी के मुकाबले नालियों का आकार भी छोटा है. अनियोजित कॉलोनियां और अतिक्रमण एक बड़ी समस्या है. भवन और कॉलोनियां खड़ी हो रही हैं लेकिन जलनिकासी की कोई विस्तृत और वृहद योजना नहीं दिखती. समय पूर्व नाले-नालियों की सफाई न होना, उनसे गाद न निकालना बड़ी समस्या का कारण बनता है. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस की एक केस स्टडी के मुताबिक बगैर योजना के शहरीकरण ने प्राकृतिक तरह से जल सोखने या उसकी निकासी क्षेत्रों की क्षमता पर बेहद बुरा असर डाला है. 

एक्सपर्ट कहते हैं कि जब मानव प्राकृतिक बाढ़ के मैदानों यानी वेटलैंड्स पर जबरन अतिक्रमण करता है तो इससे बाढ़ के पानी को सोखने या स्टोर करने वाले प्राकृतिक साधन खत्म होते जाते हैं. भारी बारिश के दौरान ड्रेनेज सिस्टम में पानी का स्तर बढ़ जाता है. नतीजतन ठोस कचरे को सही तरीके से ठिकाने लगाने की व्यवस्था न होने पर नालियां बंद हो जाती हैं. शहरी बाढ़ हमारे महानगरों के लिए एक चुनौती है.  

Web Title: Delhi to Bangalore and Chennai, rain always exposes our 'smart' and 'hi-tech' cities

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