लाइव न्यूज़ :

आकांक्षा, आत्मविश्वास और एक युवा राष्ट्र का युवा स्वप्न

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: January 12, 2026 07:50 IST

राष्ट्रीय युवा दिवस का वास्तविक अर्थ यहीं निहित है. यह दिन हमें याद दिलाता है कि राष्ट्र का भविष्य घोषणाओं, नारों या जनसंख्या के आंकड़ों से तय नहीं होता, बल्कि उस भरोसे से तय होता है जो एक समाज अपने युवाओं पर करता है.

Open in App

डॉ. अनन्या मिश्र

भारत आज एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर खड़ा है जहां ‘युवा’ केवल जनसंख्या आंकड़ों की श्रेणी नहीं, बल्कि नीति, राजनीति और राष्ट्रीय भविष्य की केंद्रीय धुरी बन चुका है. विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र के अनुमान बताते हैं कि भारत की लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है और 2030 तक भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा कार्यशील आयु वर्ग होगा. यह तथ्य अक्सर गर्व से डेमोग्राफिक डिविडेंड के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन इतिहास व राजनीतिक अर्थशास्त्र हमें सावधान करते हैं कि जनसंख्या तभी लाभदायक बनती है, जब उसे दृष्टि, अवसर और भागीदारी मिलती है.

इसी संदर्भ में राष्ट्रीय युवा दिवस केवल एक सांस्कृतिक या प्रतीकात्मक अवसर नहीं है, बल्कि यह एक नीतिगत प्रश्न खड़ा करता है : क्या भारत अपने युवाओं को केवल आर्थिक उत्पादकता की इकाई के रूप में देख रहा है, या उन्हें लोकतंत्र का सह-निर्माता और नैतिक साझेदार भी मान रहा है? रोजगार, कौशल और उद्यमिता आवश्यक हैं, किंतु पर्याप्त नहीं. जब तक युवा नीति-निर्माण, शासन और सार्वजनिक विमर्श में वास्तविक भागीदारी का अनुभव नहीं करता, तब तक ‘युवा-केंद्रित विकास’ एक अधूरा दावा ही रहेगा.

ऐसे में स्वामी विवेकानंद को स्मरण करना केवल ऐतिहासिक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि वैचारिक हस्तक्षेप बन जाता है. विवेकानंद को अक्सर प्रेरक वक्ता के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जबकि वे आधुनिक भारत के सबसे गहरे राजनीतिक-सामाजिक चिंतकों में से थे. उन्होंने युवा को राष्ट्र की नैतिक ऊर्जा माना : ऐसी ऊर्जा जो महत्वाकांक्षा से संचालित हो, लेकिन उत्तरदायित्व से अनुशासित रहे.  उनके लिए आत्मविश्वास आत्ममुग्धता नहीं था, बल्कि चरित्र, आत्मसंयम और सेवा-भाव से उपजा हुआ साहस था. आज, जब सफलता को प्रायः व्यक्तिगत उपलब्धि, उपभोग और दृश्यता से मापा जा रहा है, विवेकानंद का यह दृष्टिकोण एक आवश्यक वैचारिक संतुलन प्रस्तुत करता है.

समकालीन भारत का युवा पहले से कहीं अधिक राजनीतिक रूप से सजग है. वह प्रश्न करता है, असहमति दर्ज करता है और सार्वजनिक मुद्दों पर अपनी उपस्थिति चाहता है. यह किसी भी जीवंत लोकतंत्र का संकेत है.  किंतु असली चुनौती युवाओं की मुखरता नहीं, बल्कि संस्थाओं की ग्रहणशीलता है. क्या हमारी राजनीतिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक संरचनाएं इस ऊर्जा को केवल नियंत्रित करना चाहती हैं, या उसे दिशा और स्थान भी देना चाहती हैं? विवेकानंद का युवा आलोचक भी था और निर्माता भी.

वह व्यवस्था पर प्रश्न उठाता था, लेकिन उसके सुधार की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटता था.  आज के भारत को ठीक इसी प्रकार के सहभागी, दीर्घदृष्टि-संपन्न युवा नेतृत्व की आवश्यकता है. आंकड़े बताते हैं कि भारतीय युवा आज विज्ञान, तकनीक, खेल, संस्कृति और सार्वजनिक सेवा जैसे हर क्षेत्र में निर्णायक भूमिका निभा रहा है.

भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम विश्व के अग्रणी इकोसिस्टम्स में गिना जाने लगा है और इसमें युवाओं की केंद्रीय भूमिका है. लेकिन विवेकानंद हमें चेताते भी हैं कि यदि युवा ऊर्जा केवल आर्थिक लक्ष्यों तक सीमित रह जाए, तो वह राष्ट्र को तेज तो बना सकती है, पर दिशा नहीं दे सकती. दिशा तब आती है, जब वही ऊर्जा नैतिक स्पष्टता, सामाजिक संवेदनशीलता और सार्वजनिक उत्तरदायित्व से जुड़ती है.

राष्ट्रीय युवा दिवस का वास्तविक अर्थ यहीं निहित है. यह दिन हमें याद दिलाता है कि राष्ट्र का भविष्य घोषणाओं, नारों या जनसंख्या के आंकड़ों से तय नहीं होता, बल्कि उस भरोसे से तय होता है जो एक समाज अपने युवाओं पर करता है.  यदि भारत अपने युवाओं को चेतन नागरिक, विचारशील भागीदार और नैतिक उत्तराधिकारी के रूप में स्वीकार करता है, तो यही युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति बनेंगे, और उस राष्ट्रीय स्वप्न के सबसे विश्वसनीय वाहक भी, जिसकी कल्पना विवेकानंद ने वर्षों पहले की थी.

टॅग्स :राष्ट्रीय युवा दिवसYouth Affairs Departmentभारत
Open in App

संबंधित खबरें

विश्वअबू धाबी में रोकी गई ईरानी मिसाइलों के मलबे की चपेट में आने से घायल 12 लोगों में 5 भारतीय शामिल

भारतमाफ कीजिए मुनिश्रीजी, आप गलत बोल गए

पूजा पाठBaisakhi 2026: सिर्फ पंजाब ही क्यों? भारत के इन 5 शहरों में भी दिखती है बैसाखी की रौनक, चेक करें बेस्ट स्पॉट्स

भारतImport Duty Cut: सरकार ने आज से 41 वस्तुओं पर हटाया आयात शुल्क, चेक करें पूरी लिस्ट

कारोबारOracle Layoffs: IT सेक्टर की दिग्गज कंपनी ओरेकल की छंटनी से हाहाकार, एक साथ 30,000 कर्मचारियों को निकाला; जानें क्यों?

भारत अधिक खबरें

भारतराष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टीः उत्तरार्द्ध में उत्तराधिकार के लिए संघर्ष

भारतदिल्ली और उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में महसूस हुए भूकंप के झटके, अफगानिस्तान में आया भूकंप

भारतकेंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ग्रीनविच मीन टाईम को महाकाल स्टेंडर्ड टाईम में बदलने पर दिया जोर

भारतदलित समुदाय के 22 फीसदी वोट पर जमीन अखिलेश की निगाह , 14 अप्रैल पर अंबेडकर जयंती पर गांव-गांव में करेगी कार्यक्रम

भारतराघव चड्ढा पर आतिशी का बड़ा आरोप, 'BJP से डरते हैं, अगला कदम क्या होगा?'