rape cases in India blog by meghna verma | रिश्तों के ऊपर हावी हो चुका है लोगों का वहशीपन

सुबह उठते ही अखबार के पहले पन्ने पर बालात्कार की एक खबर, टीवी खोलने पर स्क्रीन पर रेप की एक खबर, मतलब हर जगह रेप और छेड़छाड़ के मामले सुनाई दे रहे हैं। लोगों की मानसिकता और हैवानियत इस कदर बढ़ गई है कि लोग बच्चियों तक को नहीं छोड़ रहे। कठुआ में मासूम बच्ची के साथ गैंगरेप के मामले में इतना शोर मचने के बाद भी एक दिन भी ऐसा नहीं है जब किसी नाबालिग लड़की या बच्चियों के साथ रेप का मामला सामने न आया हो। 

दंरिदों की दरिदंगी इतनी बढ़ गई है कि पहले तो वो रेप करते है बाद में अपनी करतूत छिपाने के लिए बड़ी ही बेरहमी से उनका कत्ल भी कर देते हैं। हाल ही में हुए बिहार का केस सुनकर उस वक्त मुझे और अजीब लगा जब पता चला की पीड़ित बच्ची के साथ उसी स्कूल के प्रिंसिपल और शिक्षकों ने उसका बलात्कार किया। एक टीचर और बच्चे के बीच का रिश्ता जितना प्योर होता था वो उतना ही डरावना और वहशीपन से भरता जा जा रहा है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब लोग अपनी लड़कियों को स्कूल तक छोड़ना भेज देंगे। 

ये हैवानियत इतनी बढ़ गई है कि इसने भाई-बहन, बाप-बेटी तक के रिश्ते को नहीं बख्शा है। लोग अपनी ही बहन और अपनी बेटी को अपनी हवस का शिकार बनाने पर तुले हुए हैं। हवस इस कदर बढ़ गई है कि बस लड़की होना चाहिए, बेटी हो, बहन हो या मां। किसी भी रिश्ते पर इसका इतना बुरा असर पड़ा है कि लोग सिर्फ अपनी हैवानियत दिखा रहे हैं।

छेड़छाड़ जैसी घटनाओं में अक्सर आपने सुना होगा कि लोग कहते हैं अगर अपनी बेटी या बहन होती तो तू ऐसा करता? अब तो ये भी लाइन और ये सवाल भी कहीं ना कहीं गलत हो साबित होते नजर आ रहे हैं। जल्दी ही कोई हवसी आपको इसका जवाब भी हां कहता दिखाई देगा। फिर बस भारतीय कानून है चलता रहेगा। 


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