Nationalist Serving Nation - raping minors and supporting rapist, then what India can expect | 'सरकार' की चौकीदारी में पनपते देशभक्त बलात्कारियों के बीच जंजीरों में कैद हिंदुस्तान की बेटियां

ये हिंदुस्तान है साहेब! यहाँ गंगा की पवित्रता की सौगंध खाई जाती है। हिंदुस्तान! जिसकी सरहदों की निगेहबानी हिमालय करता है। इसकी इमारतें चीख-चीख कर बताती हैं कि जालिमों ने इसे बदस्तूर लूटा है और सालों तक ये जंजीरों में कैद रहा है। जिसके जख्म आज भी नश्तर की माफिक हमारे दिलों में चुभते हैं। लेकिन एक जंजीर और है जिसका बोझ हमारा हिंदुस्तान सदियों से उठा रहा है।

ये वो न दिखाई देने वाली जंजीर है जो आज भी मर्द और औरत के बीच फर्क करती है। जिसे हम पुरुषवादी सोच की जंजीर कह सकते हैं। दरअसल यह वो जंजीर है जो सदियों से इस हिन्दुतान की बेटी के पैरों में पड़ी है।

इस जंजीर में कैद बंदिशों का वह नश्तर नासूर बन कर आज भी उसके एहसास को हर वक्त कुरेदता है। देखा जाए तो 'बेटी' की हिफाजत के लिए पुलिस है और कानून भी, लेकिन उसकी इज्जत के साथ खिलवाड़ आज के आधुनिक समाज में बदस्तूर जारी है।

बेशक ये दर्द सदियों पुराना है लेकिन हैरानी इसलिए भभी है कि 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' के इस दौर में भी वो यही सवाल पूछ रही है कि आखिर कब तक सहेगी वो बेइज्जती की ये जंज़ीर। आखिर कब तक?

हर रोज हम देखते हैं बलात्कार और छेड़छाड़ की घटनाएं जैसे आम हो चली हैं. महिलाओं को उपभोग की वस्तु समझा जाने लगा है। हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया जहां एक पोर्न एडिक्ट बेटे ने अपनी ही माँ का बलात्कार किया। देश भर में कोई भी ऐसा राज्य नहीं है जिसमें महिलाएं पूरी तरह सुरक्षित हों। महिलाएं डरी-सहमी दिखाई दे रही हैं क्योंकि दुष्कर्म का दैत्य उनके आगे हर जगह मुंह बाये खड़ा है, यहां तक कि छोटी बच्चियों को भी दरिन्दों द्वारा दुष्कर्म का शिकार बनाया जा रहा है। जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे बहुत भयानक हैं। 

हद तो तब हो जाती है जब "बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ" के इस युग में बेटी के बलात्कार को भी देशद्रोही-देशभक्ति के दृष्टि से देखा जा रहा है। आज के वर्तमान का हिंदुस्तान नेताओं और सरकारों की हक़ीक़त ये है कि इनका उद्देश्य और इरादे बलात्कारियों, दलालों और घोटाले बाजों को बचाने में ही शामिल हो गए हैं।

'सरकार' की चौकीदारी में देश की बेटी के साथ बलात्कार होते हैं और सरकार उनपर पर्दा डालने के लिए हर हथकंडा अपनाती है, जिसमें वो काफी हद तक सफल भी हो जाती है।

खुद को 'राष्ट्रभक्त' कहने वाले इन नेताओं को जरा भी इल्म नहीं होता कि उनकी राष्ट्रभक्ति महज एक छलावा है। लेकिन एक दिन आपकी इसी दोगली 'राष्ट्रभक्ति' से लोगों को इतनी घृणा हो जायेगी कि देशद्रोही का आरोप भी उन्हें सुकून देने लगेगा, क्योंकि आप एक बेटी को न्याय नहीं दे सकते, उसके आरोपी को बचाते हैं तो खोखली है आपकी राष्ट्रभक्ति।

Note- ये लेखक के स्वतंत्र विचार हैं।


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