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ग्लोबल विंड एंड सोलर 2025ः नवीकरणीय ऊर्जा में पिछड़ते अमीर देश

By निशांत | Updated: February 12, 2026 05:49 IST

Global Wind and Solar 2025: रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास 234 गीगावॉट की प्रस्तावित पवन और यूटिलिटी-स्केल सोलर क्षमता है, जो उसे दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल करती है.

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ठळक मुद्देआज जो सबसे बड़ी छलांग दिख रही है वह चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों में है.अमेरिका और भारत, दोनों की संयुक्त क्षमता से लगभग तीन गुना है. भारत भी इस बदलती तस्वीर का अहम हिस्सा है.

Global Wind and Solar 2025: दुनियाभर में हवा और सूरज से बिजली बनाने की रफ्तार पहले से कहीं तेज हो गई है. लेकिन इस तेजी की कहानी में एक अहम मोड़ है. नेतृत्व अब अमीर देशों के हाथ में नहीं, बल्कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं के पास जाता दिख रहा है. ग्लोबल एनर्जी मॉनिटर की ‘ग्लोबल विंड एंड सोलर 2025 आउटलुक’ रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 तक दुनिया भर में पवन और यूटिलिटी-स्केल सोलर परियोजनाओं की कुल पाइपलाइन रिकॉर्ड 4.9 टेरावॉट तक पहुंच गई है. यह पिछले साल के मुकाबले 11 फीसदी की बढ़ोत्तरी है. यानी कागज पर और जमीन पर, दोनों जगह नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार जारी है. लेकिन इसका भूगोल बदल रहा है. रिपोर्ट बताती है कि आज जो सबसे बड़ी छलांग दिख रही है वह चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों में है.

अकेले चीन में इस समय 448 गीगावॉट पवन और सोलर क्षमता निर्माणाधीन है, जो दुनिया के कुल निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स का लगभग आधा हिस्सा है. 2025 में चीन की कुल ऑपरेशनल पवन और सोलर क्षमता 1.6 टेरावॉट से आगे निकल चुकी है. यह अमेरिका और भारत, दोनों की संयुक्त क्षमता से लगभग तीन गुना है. भारत भी इस बदलती तस्वीर का अहम हिस्सा है.

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास 234 गीगावॉट की प्रस्तावित पवन और यूटिलिटी-स्केल सोलर क्षमता है, जो उसे दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल करती है. ब्राजील (401 गीगावॉट) और फिलीपींस (146 गीगावॉट) भी इस नए रिन्यूएबल भूगोल में प्रमुख नाम हैं. इसके उलट, दुनिया की सबसे अमीर अर्थव्यवस्थाओं की स्थिति सवाल खड़े करती है.

जी-7 देशों, जिनके पास दुनिया की लगभग आधी संपत्ति है, उनके हिस्से में वैश्विक पवन और सोलर पाइपलाइन का सिर्फ 11 फीसदी आता है. 2023 के बाद से उनकी कुल प्रस्तावित क्षमता लगभग 520 गीगावॉट पर ही अटकी हुई है. यह अंतर साफ तौर पर जलवायु लक्ष्यों और जमीनी अमल के बीच बढ़ती खाई को दिखाता है.

रिपोर्ट एक और अहम बदलाव की ओर इशारा करती है. डिस्ट्रीब्यूटेड सोलर, यानी रूफटॉप और छोटे पैमाने की सोलर क्षमता अब ऊर्जा संक्रमण की रीढ़ बनती जा रही है. ग्लोबल एनर्जी मॉनिटर के ग्लोबल सोलर पाॅवर ट्रैकर के मुताबिक, दुनिया में करीब 900 गीगावॉट डिस्ट्रीब्यूटेड सोलर क्षमता पहले से चालू है.

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का अनुमान है कि मौजूदा और प्रस्तावित सोलर क्षमता का लगभग 42 फीसदी हिस्सा इसी श्रेणी में आता है. चीन, भारत और ब्राजील यहां भी शीर्ष देशों में शामिल हैं. यह तस्वीर साफ कहती है कि रिन्यूएबल एनर्जी का भविष्य अब सिर्फ तकनीक या निवेश की कहानी नहीं रह गया है. यह नेतृत्व, राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्राथमिकताओं की कहानी बन चुका है. दुनिया सोलर और पवन ऊर्जा के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन सवाल यह है कि इस दौड़ में दिशा कौन तय करेगा.

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