वेद प्रताप वैदिक वरिष्ठ पत्रकार व राजनीति विश्लेषक हैं। वे प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया से जुड़े रहे हैं और उसके हिन्दी सेवा 'भाषा' के संस्थापक संपादक रहे हैं।Read More
संसदीय सचिवालय द्वारा जारी की गई आपत्तिजनक शब्दों की सूची का कोई तुक नहीं है, क्योंकि हर शब्द का अर्थ उसके आगे-पीछे के संदर्भ के साथ ही स्पष्ट होता है। इस मामले में अध्यक्ष का फैसला ही अंतिम होता है। ...
सबसे बड़ा आश्चर्य यह है कि इन बुरे दिनों में श्रीलंका की प्रचुर सहायता के लिए चीन आगे क्यों नहीं आ रहा है? राजपक्षे परिवार तो पूरी तरह चीन की गोद में ही बैठ गया था। चीन के चलते ही श्रीलंका विदेशी कर्ज में डूबा है। चीन की वजह से अमेरिका ने चुप्पी साध ...
अब यह स्पष्ट होता जा रहा है कि मुर्मू जीतेंगी और यशवंत सिन्हा हारेंगे। सिर्फ ठाकरे की शिवसेना ही नहीं कई राज्यों की प्रांतीय पार्टियां भी अब खुलकर मुर्मू के समर्थन में आ गई हैं। कोई आश्चर्य नहीं कि आम आदमी पार्टी के नेता भी मुर्मू का समर्थन कर दें, क ...
पुलिस वाले आज भी चाहे जिसको गिरफ्तार कर लेते हैं, बस उसके खिलाफ एक एफआईआर होनी चाहिए, जबकि कानून के अनुसार सिर्फ उन्हीं लोगों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए जिनके अपराध पर सात साल से ज्यादा की सजा हो. ...
इस समय श्रीलंका को जबर्दस्त आर्थिक मदद की जरूरत है. भारत इस मुश्किल से श्रीलंका को निकालने में मदद कर सकता है. यह देश भारत के किसी छोटे से प्रांत के बराबर ही है. ...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंग्रेजों की औपनिवेशिक शिक्षा प्रणाली की दो-टूक आलोचना करते हुए देश भर के शिक्षाशास्त्रियों से अनुरोध किया कि वे भारतीय शिक्षा प्रणाली को शोधमूलक बनाएं ताकि देश का आर्थिक और सामाजिक विकास तीव्र गति से हो सके। ...
आज देश में ऐसे विषयों को तूल दिया जा रहा है, जो देश की उन्नति और समृद्धि में कोई योगदान नहीं कर सकते. हमारे लगभग सभी टीवी चैनल पर भी दिन भर इसी तरह के मुद्दों पर शोरगुल चलता रहता है. ...
सोशल मीडिया कई मौकों पर बहुत उपयोगी साबित हुआ है. हालांकि ये भी सच है कि अब इसका इस्तेमाल निरंकुश संदेशों को फैलाने और अन्य गलत चीजों के लिए भी खूब हो रहा है. ...