वेद प्रताप वैदिक वरिष्ठ पत्रकार व राजनीति विश्लेषक हैं। वे प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया से जुड़े रहे हैं और उसके हिन्दी सेवा 'भाषा' के संस्थापक संपादक रहे हैं।Read More
बांग्लादेश की आर्थिक प्रगति दक्षिण एशिया में सबसे तेज मानी जा रही थी. हालांकि अब वह भी आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है. जनता ने बगावत का झंडा थाम लिया है. ऐसे में शेख हसीना की सही सहायता इस समय भारत ही कर सकता है. ...
जगदीप धनखड़ के साथ तमाम विवादों के बावजूद ममता बनर्जी ने उन्हें उप-राष्ट्रपति चुनाव में हराने की कोशिश नहीं की. संभवत: ममता कांग्रेस के उम्मीदवार के समर्थक के तौर पर बंगाल में दिखाई नहीं पड़ना चाहती हैं. ...
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ अगर थोड़ी हिम्मत करें तो वे भारत से मदद मांग सकते हैं. भारत यदि मालदीव, श्रीलंका और नेपाल को कई बिलियन डॉलर दे सकता है तो पाकिस्तान की मदद क्यों नहीं कर सकता? ...
श्रीलंका और मालदीव की तरह भारत सरकार इस समय शाहबाज शरीफ को वैसी ही मदद की पेशकश करके देखे तो शायद भारत-पाक संबंधों में अपूर्व सुधार के द्वार खुल सकते हैं. ...
चीन नैन्सी पेलोसी की ताइवान यात्रा के कारण इतना नाराज हो गया हैं कि उसने ताइवान जानेवाली हर चीज पर प्रतिबंध लगा दिया हैं. संतोष का विषय है कि चीन की तमाम धमकियों के बावजूद पेलोसी ने शांतिपूर्वक अपनी ताइवान-यात्रा संपन्न कर ली. ...
नई शिक्षा नीति की घोषणा कर देना ही काफी नहीं है. पिछले 8 साल में शिक्षा और चिकित्सा में सुधार की बातें बहुत हुई हैं लेकिन अभी तक ठोस उपलब्धि नहीं मिली है. ...
देश में भ्रष्टाचार के बिना यानी नैतिकता और कानून का उल्लंघन किए बिना कोई भी व्यक्ति वोटों की राजनीति कर ही नहीं सकता. रुपयों का पहाड़ लगाए बिना आप चुनाव कैसे लड़ेंगे? ...
कर्ज में डूब रहे राज्यों में भाजपा और कांग्रेस सहित लगभग सभी दलों के राज्य हैं. इसका कारण रेवड़ी-संस्कृति ही है. आज तमिलनाडु और यूपी पर लगभग साढ़े छह लाख करोड़, महाराष्ट्र, पं. बंगाल, राजस्थान, गुजरात और आंध्रप्रदेश पर 4 लाख करोड़ से 6 लाख करोड़ तक का कर् ...