'मोसाद' के टॉप पोजिशन पर नियुक्त हुईं दो महिला एजेंट, पूरी दुनिया में हो रही है चर्चा

By आशीष कुमार पाण्डेय | Published: August 24, 2022 10:45 PM2022-08-24T22:45:01+5:302022-08-24T22:53:13+5:30

इजरायल ने मोसाद की कमान दो शीर्ष महिला खुफिया एजेंटों के हाथों में थमा दी है, जिसे पूरी दुनिया किलिंग मशीन कहती है।

Two female agents appointed to the top position of 'Mossad' in Israel, are being discussed all over the world | 'मोसाद' के टॉप पोजिशन पर नियुक्त हुईं दो महिला एजेंट, पूरी दुनिया में हो रही है चर्चा

फाइल फोटो

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Highlightsमोसाद में दो महिला एजेंटों की नियुक्ति शीर्ष पदों पर हुई, पूरी दुनिया में हो रही है चर्चामोसाद को खौफ का दूसरा नाम कहा जाता है, जिसका नाम आते ही दुनिया के दूसरे देश सतर्क हो जाते हैंइजरायल की मोसाद अपने रहस्य और खुफिया ऑपरशन के लिए पूरे विश्व में कुख्यात और विख्यात है

तेल अविव: इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद में दो महिला एजेंट टॉप पोजिशन पर पहुंची हैं। इजरायल सरकार के इस फैसले से पूरी दुनिया आश्चर्य में है और इसकी चर्चा जोरों पर है। जी हां, ये खबर उस मोसाद के बारे में है, जिसे खौफ का दूसरा नाम कहा जाता है, जिसका नाम सुनते ही जेहन में अंदेशे के बादल उठने लगते हैं।

मोसाद रहस्य, रोमांच और खुफिया ऑपरशन के लिए पूरे विश्व में कुख्यात एक ऐसी इंटेलिजेंस एजेंसी है, जिसके होने मात्र की खबर से लोगों को समझ में आने लगता है कि कुछ अप्रत्याशित होने वाला है। हम उस मोसाद की बात कर रहे हैं, जिसे हासिल है दुनिया की सबसे तेज खुफिया एजेंसी होने का और आज हम इजराइल से नाता रखने वाले इस संगठन की चर्चा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इजरायल ने मोसाद की कमान दो शीर्ष महिला खुफिया एजेंटों के हाथों में थमा दी है, जिसे दुनिया किलिंग मशीन कहती है।

अब आप सोच रहे होंगे कि खुफियागिरी की खुराफात से इन महिलाओं का क्या ताल्लूक है तो हम आपको बता रहे हैं। मोसाद में एजेंट 'ए' यानी 'एलेफ' जो हिब्रू वर्णमाला का पहला अक्षर होता है, उन्हें खुफिया अथॉरिटी का नया डायरेक्टर बनाया है। वहीं एजेंट 'के' यानी 'कुफ' को पहली बार ईरान डेस्क के प्रमुख के तौर पर जिम्मेदारी दी गई है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि मोसाद में टॉप लेवल पर पहुंचने वाली पहली एजेंट अलीज़ा मैगन थीं, जिन्हें इजरायल की सरकार ने आज से लगभग तीन दशक पहले डिप्टी डायरेक्टर बनाया था और जिनकी अगुवाई में इजरायल ने कई खुफिया ऑपरेशन्स को अंजाम दिया था।

मोसाद में इंटेलिजेंस अथॉरिटी में बतौर डायरेक्टर नियुक्त होने वाली एजेंट 'ए' 20 सालों का अनुभव रखती हैं खुफिया ऑपरेशन्स को लीड करने का और अब वो ईरान के परमाणु कार्यक्रम, आतंकवाद से निपटने और अरब देशों के साथ इजरायल के संबंधों के लिए बनने वाली स्ट्रेटेजी को भी कमांड करेंगी।

वहीं एजेंट 'के' यानी 'कुफ' मोसाद में ​​ईरान डेस्क की प्रमुख होंगी। इनका काम होगा ईरानी खतरे के सभी पहलुओं से निपटने के लिए इजरायल की ओर से स्ट्रेटेजी बनाने का। इसके अलावा एजेंट 'के' इजरायल की अन्य सुरक्षा सेवाओं के साथ मिलकर मोसाद के इंटरनल ऑपरेशन्स के लिए जिम्मेदारी होंगी।

तो यह थी जानकारी एजेंट 'ए' और एजेंट 'के' की नियुक्ति के बारे में चौंकाने वाली जानकारी, लेकिन ये मोसाद क्या है, क्यों कहते हैं कि इसे किलिंग मशीन और मोसाद के वो कौन-कौन से कारनामों हैं, जिनके कारण दुनिया इस बात को मानने के लिए मजबूर है कि इंटेलिजेंस में मोसाद का कोई सानी है।

तो हम बता रहे हैं आपको मोसाद के बनने के पीछे की असली कहानी और उसके कुछ सनसनीखेज ऑपरेशन्स के बारे में।

दुनिया के नक्शे पर आज से 73 साल पहले साल 1948 में उभरने वाले यहूदियों के देश इजराइल को, बनने के 24 घंटे के भीतर ही जंग में कूदना पड़ा था। जंगी हालात के कारण इजराइल के पहले प्रधानमंत्री डेविड बेन-गुरियन के जेहन में यह बात तैरने लगी थी कि अगर इजराइल की अरब राज्य से रक्षा करनी है तो उन्हें एक ऐसे खुफिया एजेंसी की जरूरत है, जो सामने न होते हुए इजरायल के लिए वो सारा काम कर सके, जिसे इजरायल वैश्विक दबाव में सीधे तौर पर नहीं कर सकता है।

लगभग 11 साल की जद्दोजहद के बाद प्रधानमंत्री डेविड बेन-गुरियन 13 दिसंबर, 1949 को मोसाद का गठन किया, जिसे इजरायली सेना के खुफिया विभाग, आंतरिक सुरक्षा सेवा और विदेश विभाग का कॉकटेल कहा गया। प्रधान मंत्री डेविड बेन-गुरियन ने मोसाद की कमान थमाई रूवेन शिलोआ को हाथों में और वो बने इसके पहले डायरेक्टर और आज की तारीख में इसके डायरेक्टर हैं डेविड बार्निया।

मोसाद का अब तक सबसे खुफिया ऑपरेशन 'रॉथ ऑफ गॉड' को माना जाता है, जिसे दुनिया अमूमन ऑपरेशन 'म्यूनिख' भी कहता है। दरअसल 5 सितंबर 1972 को जर्मनी के म्यूनिख शहर में फलस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन यानी पीएलओ से जुड़े आतंकियों ने ओलिंपिक गांव में हमला करके 11 इजरायली खिलाड़ियों की हत्या कर दी थी।

इसके बाद इजरायल की मोसाद ने लगभग 20 सालों तक पूरी दुनियाभर में खून की होली खेली थी और म्यूनिख हमले में शामिल एक-एक संदिग्धों को चुन-चुनकर मारा था। इश्क के बारे में तो पता नहीं बदला लेने के मामले में मोसाद ने साफ कर दिया था कि उसके लिए सब कुछ जायज है और इजरायल ने भी इस ऑपरेशन से दुनिया को स्पष्ट संदेश दे दिया था कि उनके शब्दकोश में माफी शब्द नहीं है।

मोसाद के इस आक्रामक ऑपरेशन पर विश्व के जानेमाने फिल्म निर्देशक स्टीवन स्पीलबर्ग ने साल 2005 में 'म्यूनिख' के नाम से एक एक्शन थ्रिलर फिल्म बनाई थी।  स्पीलबर्ग की यह फिल्म जॉर्ज जोनास के साल 1984 में लिखी किताब वेंजेंस पर आधारित थी।

अगर आपको मोसाद और उसके खुफिया ऑपरेशन्स को समझना है कि तो फिल्म 'म्यूनिख' जरूर देखिये। साल 2005 में यह फिल्म ऑस्कर में पांच श्रेणियों में रखी गई थी। इसके अलावा इस फिल्म ने पूरी दुनिया भर में लगभग 130 मिलियन डॉलर कमाए थे। वहीं 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' ने भी इस फिल्म को 21वीं सदी की अब तक की सर्वश्रेष्ठ फिल्म बताया है।

अब बात करते हैं मोसाद द्वारा मिग-21 चुराने की घटना के बारे में। जी हां, मोसाद ने रूस के विकसित किये मिग-21 को सिर्फ इसलिए चुरा लिया था कि उसे मिग-21 की टेक्निकल बातों को जानना था क्योंकि उसके सिर पर अरब देशों के साथ जंग के बादल मंडरा रहे थे।

मोसाद का एक एजेंट, जो वैसे तो वो इराकी पायलट था। लेकिन इजरायल की गर्लफ्रेंड ने उसे इस काम के लिए तैयार किया था। इराकी पायलट ने 16 अगस्त 1966 को ईरान की राजधानी तेहरान से मिग-21 की रूटीन उड़ान भरी लेकिन वो रूका सीधे इजरायल में जाकर। मजेदार बात यह है कि इजरायल ने उसे इस कारनामे के लिए लाखों डॉलर और फैमिली को प्रोटेक्‍शन दिया और उसने इजरायल को मिग-21 दे दिया।

साल 1976 में मोसाद ने एक ऐसे ऑपरेशन को अंजाम दिया, जिसे देखकर पूरी दुनिया कांप उठी थी। जी हां, इस ऑपरेशन का नाम था 'थंडरबोल्‍ट'। दरअसल 27 जून 1976 को इजरायल से ग्रीस जा रहे एक यात्री विमान को अगवा कर लिया गया था। इस प्‍लेन में सबसे ज्यादा इजरायली नागरिक थे। अहरण के बाद इस विमान को लीबिया होते हुए युगांडा के एंतेबे एयरपोर्ट पर लैंड कराया गया।

तारीख थी 28 जून और 5वें दिन मोसाद ने 'थंडरबोल्‍ट' को अंजाम देकर 3 जुलाई की रात में एंतेबे एयरपोर्ट पर ऐसा महाल बोला कि वहां के तानाशाह ईदी अमीन की सेना भाग गई और इजरायल सभी बंधकों को छुड़ा लिया। इस ऑपरेशन को मोसाद ने 48 घंटे से भी कम वक्त में अंजाम दिया था और इसमें कुल दो जाने गईं थी।

वहीं युंगाडा आर्मी के करीब 50 सैनिक मारे गए थे। इतना ही नहीं जब इजरायली कमांडोज बंधकों को वापस लेकर लौटने लगे तो उन्होंने एंतेबे एयरपोर्ट पर मौजूद सभी फाइटर प्‍लेन्‍स को बमों से उड़ा दिया था और ईदी अमीन हाथ मलता हुआ रह गया।

युगांडा सरकार ने ऑपरेशन के बाद अस्पताल में बीमार एक वद्ध यहूदी महिला को मार दिया था और दूसरे जिस शख्स की जान इस ऑपरेशन में गई वो थे जोनाथन नेतन्याहू, बाद में जिनके छोटे भाई बेंजामिन नेतन्याहू इजरायल के प्रधानमंत्री भी बने।

तो इस तरह के कई खुफिया ऑपरेशन मोसाद ने अंजाम दिये हैं, जिसके कारण उसे दुनिया की सबसे तेज खुफिया एजेंसी होने का खिताब हासिल है और मोसाद के बारे में यह भी कहा जाता है कि उसके एजेंट एक बार जो ठान लेते हैं, उसे वो करके रहते हैं।

Web Title: Two female agents appointed to the top position of 'Mossad' in Israel, are being discussed all over the world

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