म्यांमार: बच्चों, महिलाओं सहित 30 से अधिक की हत्या, शवों को जला दिया गया

By विशाल कुमार | Published: December 26, 2021 08:52 AM2021-12-26T08:52:42+5:302021-12-26T08:55:40+5:30

करेनी ह्यूमन राइट्स ग्रुप ने कहा कि उन्हें आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों के जले हुए शव मिले, जिनमें शनिवार को ह्प्रुसो शहर के मो सो गांव के पास म्यांमार पर शासन करने वाली सेना द्वारा मारे गए बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे शामिल हैं।

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म्यांमार: बच्चों, महिलाओं सहित 30 से अधिक की हत्या, शवों को जला दिया गया

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Highlightsमहिलाओं और बच्चों सहित 30 से अधिक लोग मारे गए और उनके शव जला दिए गए।एक स्थानीय निवासी, मीडिया रिपोर्ट्स और एक स्थानीय मानवाधिकार समूह ने दी जानकारी।

यंगून: एक स्थानीय निवासी, मीडिया रिपोर्ट्स और एक स्थानीय मानवाधिकार समूह के अनुसार, शुक्रवार को म्यांमार के संघर्षग्रस्त काया राज्य में महिलाओं और बच्चों सहित 30 से अधिक लोग मारे गए और उनके शव जला दिए गए।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, करेनी ह्यूमन राइट्स ग्रुप ने कहा कि उन्हें आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों के जले हुए शव मिले, जिनमें शनिवार को ह्प्रुसो शहर के मो सो गांव के पास म्यांमार पर शासन करने वाली सेना द्वारा मारे गए बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे शामिल हैं।

ग्रुप ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा कि हम मानव अधिकारों का उल्लंघन करने वाली अमानवीय और क्रूर हत्या की कड़ी निंदा करते हैं।

राज्य मीडिया ने कहा कि म्यांमार की सेना ने कहा कि उसने गांव में विपक्षी सशस्त्र बलों से हथियारों के साथ आतंकवादियों की एक अनिश्चित संख्या को गोली मार दी और मार डाला। लोग सात वाहनों में सवार थे और सेना के रोकने पर नहीं रुके।

मानवाधिकार समूह और स्थानीय मीडिया द्वारा साझा की गई तस्वीरों में जले हुए ट्रक पर शवों के जले हुए अवशेष दिखाई दे रहे हैं।

1 फरवरी के तख्तापलट का नेतृत्व करने वाले जुंटा का विरोध करने वाले कई नागरिक मिलिशिया में से एक, करेनी राष्ट्रीय रक्षा बल, ने कहा कि मृत उनके सदस्य नहीं थे, बल्कि संघर्ष से शरण लेने वाले नागरिक थे।

नाम न बताने की शर्त पर समूह के एक कमांडर ने बताया कि हम यह देखकर इतने हैरान थे कि सभी शव अलग-अलग आकार के थे, जिनमें बच्चे, महिलाएं और बूढ़े भी शामिल थे

सुरक्षा कारणों से नाम न बताने की शर्त पर एक ग्रामीण ने कहा कि उन्हें शुक्रवार की रात आग लगने की जानकारी थी, लेकिन गोलीबारी होने के कारण वह घटनास्थल पर नहीं जा सके।

लगभग 11 महीने पहले सेना द्वारा नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू की की निर्वाचित सरकार को उखाड़ फेंकने के बाद से म्यांमार में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल है।

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