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Varuthini Ekadashi 2023: वरुथिनी एकादशी व्रत कल, बन रहा है ये विशेष योग, जानें मुहूर्त, व्रत विधि और महत्व

By रुस्तम राणा | Updated: April 15, 2023 15:24 IST

शास्त्रों में वर्णित है कि जो कोई वरुथिनी एकादशी व्रत का पालन सच्चे मन से करता है उसे वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है और समस्त प्रकार के पापों से छुटकारा मिलता है।

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Varuthini Ekadashi 2023: वैशाख माह कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को वरुथिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसे सौभाग्य प्राप्त करने वाली एकादशी कहा जाता है। शास्त्रों में वर्णित है कि जो कोई वरुथिनी एकादशी व्रत का पालन सच्चे मन से करता है उसे वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है और समस्त प्रकार के पापों से छुटकारा मिलता है। इस साल यह व्रत 16 अप्रैल, रविवार को रखा जाएगा। आइए जानते हैं वरुथिनी एकादशी व्रत का पूजा और पारण मुहूर्त, व्रत विधि और महत्व। 

वरुथिनी एकादशी का मुहूर्त

एकादशी तिथि का आरंभ : अप्रैल 15, 2023 को रात 08 बजकर 45 मिनट सेएकादशी तिथि का समापन :  अप्रैल 16, 2023 को शाम 06 बजकर 14 मिनट परएकादशी व्रत का पारण मुहूर्त : अप्रैल 17, 2023 को सुबह 05 बजकर 54 मिनट से सुबह 08 बजकर 28 मिनट तक

वरुथिनी एकादशी पर खास योग

वरुथिनी एकादशी के पर त्रिपुष्कर योग बनने जा रहा है। इस एकादशी पर त्रिपुष्कर योग का बनना बेहद शुभ माना जाता है। इस योग में एकादशी व्रत करना अत्यंत लाभकारी होगा। 

वरुथिनी एकादशी व्रत विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।इसके बाद कलश की स्थापना करें।कलश के ऊपर आम के पल्लव, नारियल, लाल चुनरी बांधकर रखें।धूप, दीप जलाकर बर्फी और खरबूजे के साथ आम का भोग लगाएं।इसके बाद विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करें।दिन भर व्रत रख अगले दिन व्रत का पारण करें।

वरुथिनी एकादशी तिथि का महत्व

शास्त्रों में इस बात का वर्णन मिलता है कि वरुथिनी एकादशी व्रत का महत्व भगवान श्रीकृष्ण ने पांडव पुत्र युधिष्ठिर को बताया था। कहा जाता है कि इस व्रत को जो कोई भी करता है उसे वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है और जीवनभर सौभाग्य बना रहता है। इस व्रत को करने से मन को सुख-शांति का अनुभव प्राप्त होता है। इस दिन जगत के पालनहार विष्णु जी को तुलसी मिश्रित जल अर्पित करने से घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है और जीवन से दरिद्रता दूर जाती है। व्रत का फल प्राप्त करने के लिए व्रती को व्रत पारण के पश्चात खरबूजा दान करना चाहिए।

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