लाइव न्यूज़ :

पितृ पक्ष 2018: श्राद्ध से पितरों की होने लगी थी तबीयत खराब, कुछ इस तहर शुरू हुई थी पितृ पक्ष की परम्परा

By मेघना वर्मा | Updated: September 25, 2018 09:21 IST

Pitru Paksha Shradh 2018 (पितृ पक्ष): श्राद्ध के समय भोजन करवाने से बहुत से पितर बीमार होने लगे थे।

Open in App

हिन्दू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण पितृ पक्ष की शुरूआत आज यानी 25 सितंबर से हो गई है। आज से लोग अपने पितरों के आत्मा के तर्पण और शांति के लिए लोग श्राद्ध करेंगे। आपने भी आज तक लोगों को श्राद्ध करते सुना या देखा होगा मगर क्या कभी इस बात पर गौर किया है कि इस पितृ पक्ष में श्राद्ध करने की परम्परा को किसने शुरू किया होगा? क्या कभी ये सोचा है कि भारतवर्ष में सबसे पहला श्राद्ध किसने किया होगा? आज हम आपको बता रहे हैं श्राद्ध की इसी परंपरा के बारे में। आप भी जानिए कब और कैसे शुरू हुई पितृ पक्ष की ये परंपरा। 

महर्षि निमि ने दिया था सबसे पहला श्राद्ध

प्राचीन भारत को देखे तो मान्यता है कि सबसे पहला श्राद्ध महर्षि निमि ने किया था। महाभारत के अनुसार इस श्राद्ध से पहले श्राद्ध का पहला उपदेश अत्रि मुनि ने दिया था। इसी उपदेश के बाद महर्षि निमि ने अपने पितरों का सबसे पहला श्राद्ध किया था। महर्षि ने सबसे पहले अपने पितरों को अन्न का भोग लगाया था। बस इसके बाद श्राद्ध की परंपरा यूं ही आगे बढ़ती चली गई। निमि के बाद सभी ऋषि मुनि श्राद्ध की परंपरा शुरू हो गई। 

बिमार होने लग थे पितर

जब सभी जना लोग अपने पितरों का श्राद्ध करने लगे और अपने पितरों को भोजन करवाने लगे तो बहुत ज्यादा भोग से पितरों का पेट खराब होने लगे। तब सारे पितरे अपनी समस्या लेकर ब्रह्माजी के पास पहुंचे। ब्रह्माजी ने उनसे अग्नि देवता से मदद लेने को कहा। तब अग्नि देवता ने कहा कि अब से जो भी श्राद्ध होगा उसमें हम सब साथ में भोजन ग्रहण करेंगे। जिसके बाद से ही किसी भी श्राद्ध में अग्नि देवता को सबसे पहला भोजन दिया जाता है फिर पितरों को भोग लगाया जाता है। 

श्राद्ध करते समय इन मंत्रों का करें जाप

पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्राचीन काल से ही लोग श्राद्ध को करते आए हैं। पूरी विधि विधान से पूजा, अर्चन करने के बाद अपने पितरों की आत्मा को शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। शास्त्रों में श्राद्ध की ये विधि बताई गई है। जिसका भी पिंडदान आप दे रहे हैं उस समय ध्यान लगाकर गायत्री मंत्र का जाप तथा सोमाय पितृमते स्वाहा का जाप जरूर करें। 

टॅग्स :पितृपक्ष
Open in App

संबंधित खबरें

पूजा पाठमहालया अमावस्या 2025: पितृपक्ष का अंतिम दिन, पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध और दान का विशेष महत्व

कारोबारGST New Rate: रहिए तैयार, केवल 15 दिन में घटेगा दाम?, हर घर की जरूरत, दिनचर्चा में प्रयोग, त्योहार से पहले मीडिल क्लास की जेब...

पूजा पाठPitru Paksha 2025: आज से शुरु हो रहा पितृ पक्ष, जानें पितरों के श्राद्ध का सही नियम और सबकुछ

भारतRohtas Road Accident: राजस्थान से गया जा रही बस की ट्रक से भीषण टक्कर, तीन की मौत; 15 घायल

पूजा पाठSarva Pitru Amavasya 2024 Date: कब है सर्व पितृ अमावस्या? कैसे करें पितृ विसर्जन, जानें विधि और महत्व

पूजा पाठ अधिक खबरें

पूजा पाठPanchang 05 April 2026: आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय, देखें पंचांग

पूजा पाठRashifal 05 April 2026: आज शत्रुओं की चाल से बचें वृषभ राशि के लोग, कर्क राशिवालों के जीवन में खुशियां

पूजा पाठGuru Nakshatra Parivartan 2026: अप्रैल में इन 5 राशिवालों का शुरू होगा गोल्डन पीरियड, मोटी कमाई की उम्मीद

पूजा पाठPanchang 04 April 2026: आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय, देखें पंचांग

पूजा पाठRashifal 04 April 2026: कुंभ राशिवालों को अचानक धनलाभ मिलने की संभावना, जानें सभी राशियों का फल