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Holashtak 2024: कब से शुरू हो रहे हैं होलाष्टक? शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर लगेगी रोक

By रुस्तम राणा | Updated: February 11, 2024 15:26 IST

हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी से फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तक की अवधि को होलाष्टक कहा जाता है। इस साल होलाष्टक 17 मार्च 2024 से लग रहे हैं, जो 24 मार्च को समाप्त होंगे। 

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Holashtak 2024: होली से आठ दिन पूर्व होलाष्टक शुरू हो जाता है। ऐसी मान्यता है कि ये 8 दिन शुभ कार्यों को करने के लिए वर्जित माने जाते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी से फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तक की अवधि को होलाष्टक कहा जाता है। इस साल होलाष्टक 17 मार्च 2024 से लग रहे हैं, जो 24 मार्च को समाप्त होंगे। 

होलाष्टक के दौरान शुभ कार्य होते हैं वर्जित

होलाष्टक के दौरान शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्यों को भूलकर भी नहीं करना चाहिए। इसके अलावा न तो इस दौरान मुंडन, नामकरण, सगाई आदि करनी चाहिए। ये किसी के भी जीवन के सबसे महत्वपूर्ण लम्हों में से एक होते हैं। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि ऐसे मांगलिक कार्यों को शुभ काल-मुहूर्त में किया जाना चाहिए।

ये कार्य भी होलाष्टक काल में नहीं किया जाना चाहिए। इससे अशांति का माहौल बनता है। संभव है कि आपने जो संपत्ति खरीदी या बेची है, वह बाद में आपके लिए परेशानी का सबब बन जाए। इसलिए ऐसी मान्यता है कि कुछ दिन रूककर और होलाष्टक खत्म होने के बाद ही इन कार्यों में हाथ लगाएं।

आप नया व्यापार शुरू करना चाहते हैं या फिर कोई नई नौकरी ज्वाइन करना चाहते हैं तो बेहतर है इन दिनों में इसे टाल दें। आज की दुनिया में व्यवसाय या नौकरी किसी के भी अच्छे जीवन का आधार है। इसलिए होलाष्टक के बाद इन कार्यों को करें। इससे सकारात्मक उर्जा आपके साथ रहेगी और आप सफलता हासिल कर सकेंगे। 

होलाष्टक के समय में नौकरी परिवर्तन नहीं करना चाहिए। नई जॉब ज्वाइन करनी है, तो उसे होलाष्टक के पहले या बाद में करना चाहिए। यदि अत्यंत ही आवश्यक है, ऐसे में किसी विद्वान ज्योतिषि या फिर पंडित से सलाह जरूर लें। होलाष्टक के दौरान कोई भी यज्ञ, हवन आदि कार्यक्रम नहीं करना चाहिए। 

होलाष्टक में क्यों नहीं होते हैं शुभ कार्य

धार्मिक मान्यता के अनुसार, होलाष्टक में वातावरण में नकारात्मकता ऊर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अष्टमी तिथि को चन्द्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहु उग्र अवस्था में रहते हैं। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति होलाष्टक के दौरान कोई मांगलिक काम करता है तो उसे कई तरह की परेशानियां आती है, या फिर वह अधूरा रह जाता है।

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