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Hanuman Jayanti: हनुमान जी के 108 नाम, बना देंगे सभी बिगड़े काम, इस तरह करें जाप

By उस्मान | Updated: April 17, 2019 15:08 IST

हनुमान जयंती (Hanuman Jayanti): हनुमान जी बहुत ही जल्द प्रसन्न होने वाले देवता हैं। उन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है। 'संकटमोचन'  हनुमान जी अपने भक्तों की सदा सहायता करते हैं। 

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हनुमान जी बहुत ही जल्द प्रसन्न होने वाले देवता हैं। उन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है। 'संकटमोचन'  हनुमान जी अपने भक्तों की सदा सहायता करते हैं। बजरंगबली के समक्ष किसी भी प्रकार की मायावी शक्ति ठहर नहीं सकती। महावीर की उपासना तुरंत फलदायी होती है और हर तरह के संकट का नाश करती है।

पवनपुत्र हनुमान को 108 नामों से जाना जाता है और हनुमान जी के इन नाम की उपासना अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। माना जाता है कि चिरंजीवी हनुमान के इन नामों को जपने से चुटकी में बिगड़े काम बन जाते हैं। पंडित दिवाकर आपको हनुमान जी के नाम और उनका मतलब बता रहे हैं- 

1) आंजनेया : अंजना का पुत्र2) महावीर : सबसे बहादुर3) हनूमत : जिसके गाल फुले हुए हैं4) मारुतात्मज : पवन देव के लिए रत्न जैसे प्रिय5) तत्वज्ञानप्रद : बुद्धि देने वाले6) सीतादेविमुद्राप्रदायक : सीता की अंगूठी भगवान राम को देने वाले7) अशोकवनकाच्छेत्रे : अशोक बाग का विनाश करने वाले8) सर्वमायाविभंजन : छल के विनाशक9) सर्वबन्धविमोक्त्रे : मोह को दूर करने वाले10) रक्षोविध्वंसकारक : राक्षसों का वध करने वाले11) परविद्या परिहार : दुष्ट शक्तियों का नाश करने वाले12) परशौर्य विनाशन : शत्रु के शौर्य को खंडित करने वाले13) परमन्त्र निराकर्त्रे : राम नाम का जाप करने वाले14) परयन्त्र प्रभेदक : दुश्मनों के उद्देश्य को नष्ट करने वाले15) सर्वग्रह विनाशी : ग्रहों के बुरे प्रभावों को खत्म करने वाले16) भीमसेन सहायकृथे : भीम के सहायक17) सर्वदुखः हरा : दुखों को दूर करने वाले18) सर्वलोकचारिणे : सभी जगह वास करने वाले19) मनोजवाय : जिसकी हवा जैसी गति है20) पारिजात द्रुमूलस्थ : प्राजक्ता पेड़ के नीचे वास करने वाले

21)सर्वमन्त्र स्वरूपवते : सभी मंत्रों के स्वामी22) सर्वतन्त्र स्वरूपिणे : सभी मंत्रों और भजन का आकार जैसा23) सर्वयन्त्रात्मक : सभी यंत्रों में वास करने वाले24) कपीश्वर : वानरों के देवता25) महाकाय : विशाल रूप वाले26) सर्वरोगहरा : सभी रोगों को दूर करने वाले27) प्रभवे : सबसे प्रिय28) बल सिद्धिकर :29) सर्वविद्या सम्पत्तिप्रदायक : ज्ञान और बुद्धि प्रदान करने वाले30) कपिसेनानायक : वानर सेना के प्रमुख31) भविष्यथ्चतुराननाय : भविष्य की घटनाओं के ज्ञाता32) कुमार ब्रह्मचारी : युवा ब्रह्मचारी33) रत्नकुण्डल दीप्तिमते : कान में मणियुक्त कुंडल धारण करने वाले34) चंचलद्वाल सन्नद्धलम्बमान शिखोज्वला : जिसकी पूंछ उनके सर से भी ऊंची है35) गन्धर्व विद्यातत्वज्ञ, : आकाशीय विद्या के ज्ञाता36) महाबल पराक्रम : महान शक्ति के स्वामी37) काराग्रह विमोक्त्रे : कैद से मुक्त करने वाले38) शृन्खला बन्धमोचक: तनाव को दूर करने वाले39) सागरोत्तारक : सागर को उछल कर पार करने वाले40) प्राज्ञाय : विद्वान

41) रामदूत : भगवान राम के राजदूत42) प्रतापवते : वीरता के लिए प्रसिद्ध43) वानर : बंदर44) केसरीसुत : केसरी के पुत्र45) सीताशोक निवारक : सीता के दुख का नाश करने वाले46) अन्जनागर्भसम्भूता : अंजनी के गर्भ से जन्म लेने वाले47) बालार्कसद्रशानन : उगते सूरज की तरह तेजस48) विभीषण प्रियकर : विभीषण के हितैषी49) दशग्रीव कुलान्तक : रावण के राजवंश का नाश करने वाले50) लक्ष्मणप्राणदात्रे : लक्ष्मण के प्राण बचाने वाले51) वज्रकाय : धातु की तरह मजबूत शरीर52) महाद्युत : सबसे तेजस53) चिरंजीविने : अमर रहने वाले54) रामभक्त : भगवान राम के परम भक्त55) दैत्यकार्य विघातक : राक्षसों की सभी गतिविधियों को नष्ट करने वाले56) अक्षहन्त्रे : रावण के पुत्र अक्षय का अंत करने वाले57) कांचनाभ : सुनहरे रंग का शरीर58) पंचवक्त्र : पांच मुख वाले59) महातपसी : महान तपस्वी60) लन्किनी भंजन : लंकिनी का वध करने वाले

61) श्रीमते : प्रतिष्ठित62) सिंहिकाप्राण भंजन : सिंहिका के प्राण लेने वाले63) गन्धमादन शैलस्थ : गंधमादन पर्वत पार निवास करने वाले64) लंकापुर विदायक : लंका को जलाने वाले65) सुग्रीव सचिव : सुग्रीव के मंत्री66) धीर : वीर67) शूर : साहसी68) दैत्यकुलान्तक : राक्षसों का वध करने वाले69) सुरार्चित : देवताओं द्वारा पूजनीय70) महातेजस : अधिकांश दीप्तिमान71) रामचूडामणिप्रदायक : राम को सीता का चूड़ा देने वाले72) कामरूपिणे : अनेक रूप धारण करने वाले73) पिंगलाक्ष : गुलाबी आँखों वाले74) वार्धिमैनाक पूजित : मैनाक पर्वत द्वारा पूजनीय75) कबलीकृत मार्ताण्डमण्डलाय : सूर्य को निगलने वाले76) विजितेन्द्रिय : इंद्रियों को शांत रखने वाले77) रामसुग्रीव सन्धात्रे : राम और सुग्रीव के बीच मध्यस्थ78) महारावण मर्धन : रावण का वध करने वाले79) स्फटिकाभा : एकदम शुद्ध80) वागधीश : प्रवक्ताओं के भगवान

81) नवव्याकृतपण्डित : सभी विद्याओं में निपुण82) चतुर्बाहवे : चार भुजाओं वाले83) दीनबन्धुरा : दुखियों के रक्षक84) महात्मा : भगवान85) भक्तवत्सल : भक्तों की रक्षा करने वाले86) संजीवन नगाहर्त्रे : संजीवनी लाने वाले87) सुचये : पवित्र88) वाग्मिने : वक्ता89) दृढव्रता : कठोर तपस्या करने वाले90) कालनेमि प्रमथन : कालनेमि का प्राण हरने वाले91) हरिमर्कट मर्कटा : वानरों के ईश्वर92) दान्त : शांत93) शान्त : रचना करने वाले94) प्रसन्नात्मने : हंसमुख95) शतकन्टमदापहते : शतकंट के अहंकार को ध्वस्त करने वाले96) योगी : महात्मा97) मकथा लोलाय : भगवान राम की कहानी सुनने के लिए व्याकुल98) सीतान्वेषण पण्डित : सीता की खोज करने वाले99) वज्रद्रनुष्ट :100) वज्रनखा : वज्र की तरह मजबूत नाखून

101) रुद्रवीर्य समुद्भवा : भगवान शिव का अवतार102) इन्द्रजित्प्रहितामोघब्रह्मास्त्र विनिवारक : इंद्रजीत के ब्रह्मास्त्र के प्रभाव को नष्ट करने वाले103) पार्थ ध्वजाग्रसंवासिने : अर्जुन के रथ पार विराजमान रहने वाले104) शरपंजर भेदक : तीरों के घोंसले को नष्ट करने वाले105) दशबाहवे : दस्द भुजाओं वाले106) लोकपूज्य : ब्रह्मांड के सभी जीवों द्वारा पूजनीय107) जाम्बवत्प्रीतिवर्धन : जाम्बवत के प्रिय108) सीताराम पादसेवा : भगवान राम और सीता की सेवा में तल्लीन रहने वाले 

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