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सोमवार को आकाश में घटेगी अनोखी खगोलीय घटना, नग्न आंखों से देख सकेंगे चन्द्रमा, शुक्र और शनि ग्रह की युति

By बृजेश परमार | Updated: January 22, 2023 19:26 IST

सोमवार को सूर्यास्त के बाद पश्चिम दिशा में चन्द्रमा, शुक्र ग्रह एवं सबसे सुन्दर ग्रह शनि के साथ दिखाई देंगे। जिसे खगोलीय भाषा में चन्द्रमा-शुक्र-शनि युति कहते हैं। इस घटना को आमजन अपने घर से ही बिना किसी साधन के अपनी आंखों से ही बहुत अच्छी प्रकार से देख सकते हैं।

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ठळक मुद्दे 23 जनवरी सोमवार को द्वितीया तिथि पर सायन गणना के अनुसार चन्द्रमा कुम्भ राशि में 27 अंश 2 कला पर होगाशुक्र ग्रह कुम्भ राशि में 25 अंश 13 कला पर होगा एवं उसकी क्रान्ति 14 अंश 29 कला दक्षिण होगीशनि ग्रह भी कुम्भ राशि में 24 अंश 50 कला पर होगा एवं उसकी क्रान्ति 14 अंश 25 कला दक्षिण होगी

उज्जैन: सोमवार 23 जनवरी 2023 को सांय बहुत सुन्दर खगोलीय घटना होने जा रही है। इस दिन सूर्यास्त के बाद पश्चिम दिशा में चन्द्रमा, शुक्र ग्रह एवं सबसे सुन्दर ग्रह शनि के साथ दिखाई देंगे। जिसे खगोलीय भाषा में चन्द्रमा-शुक्र-शनि युति कहते हैं। इस घटना को आमजन अपने घर से ही बिना किसी साधन के अपनी आंखों से ही बहुत अच्छी प्रकार से देख सकते हैं।

शासकीय जीवाजी वेधशाला उज्जैन अधीक्षक डॉ० राजेन्द्र प्रकाश गुप्त के अनुसार 23 जनवरी सोमवार को द्वितीया तिथि पर सायन गणना के अनुसार चन्द्रमा कुम्भ राशि में 27 अंश 2 कला पर होगा एवं उसकी क्रान्ति 16 अंश 59 कला दक्षिण होगी। शुक्र ग्रह कुम्भ राशि में 25 अंश 13 कला पर होगा एवं उसकी क्रान्ति 14 अंश 29 कला दक्षिण होगी। शनि ग्रह भी कुम्भ राशि में 24 अंश 50 कला पर होगा एवं उसकी क्रान्ति 14 अंश 25 कला दक्षिण होगी। 

इस प्रकार चन्द्रमा के साथ शुक्र एवं शनि ग्रह एक ही राशि में अत्यन्त पास-पास हैं। उज्जैन में सायं 6 बजकर 8 मिनिट पर सूर्यास्त के बाद पश्चिम दिशा में हसिए के आकार का चन्द्रमा दिखाई देगा, चन्द्रमा के ठीक नीचे थोड़ा दक्षिण की ओर लट्टू के समान चमकता हुआ शुक्र ग्रह दिखाई देगा। शुक्र ग्रह के ठीक नीचे एवं कम चमकदार शनि ग्रह को देखा जा सकेगा। इस दिन चन्द्रमा सांय 7 बजकर 54 मिनिट पर अस्त हो रहा है। आकाश में यह नजारा लगभग 1 घण्टे 30 मिनिट तक देखा जा सकेगा। 

इस खगोलीय घटना को आमजन अपने घर से ही बिना किसी साधन के अपनी आंखों से ही बहुत अच्छी प्रकार से देख सकते हैं। युति देखने के लिए टेलिस्कोप आदि किसी साधन की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि पास-पास दिखने की स्थिति में भी खगोलीय पिण्ड टेलीस्कोप के दृश्य क्षेत्र से दूरी पर रहते हैं।

टॅग्स :ज्योतिष शास्त्रशुक्र गृहचंद्रमा
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