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मायावती ने महागठबंधन को दिया करारा झटका, BSP के चलते MP हार सकती है कांग्रेस

By लोकमत समाचार हिंदी ब्यूरो | Updated: September 22, 2018 10:52 IST

MP assembly election: 2003 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में जब कांग्रेस को करारी हार मिली थी, उस चुनाव में कांग्रेस को 25 सीटों पर बसपा के उम्मीदवारों के कारण भाजपा के हाथों हार मिली थी। 

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राजेंद्र परासर 

भोपाल, 22 सितंबर मध्य प्रदेश में कांग्रेस द्वारा बहुजन समाज पार्टी को अनदेखा करना महंगा पड़ सकता है। बसपा द्वारा 22 प्रत्याशियों की सूची जारी करते ही कांग्रेस और बसपा के गठबंधन की उम्मीदें अब समाप्त सी हो गई है। बसपा द्वारा सोचे-समझे तरीके से जातिगत गणित बैठाते हुए यह सूची जारी की है, जिससे कांग्रेस को नुकसान और भाजपा को फायदा नजर आ रहा है।

मध्य प्रदेश में कमलनाथ द्वारा प्रदेश कांग्रेस की कमान संभालते ही इस बात को जोर मिला था कि बसपा के साथ गठबंधन कर कांगे्रस विधानसभा चुनाव में मैदान में उतरेगी। मगर सीटों के बंटवारे पर सहमति न बनने से मायावती खिन्न नजर आई, पहले तो उन्होंने सम्मानजनक सीटें देने की बात कही, मगर जब कांगे्रस समझौते के तहत 30 सीटें बसपा को देने पर सहमत थी, मगर मायावती 50 से ज्यादा सीटें मांग रही थी। इसके चलते कांग्रेस ने लंबे समय से मौन साध रखा था। जब मामला कांग्रेस की ओर से शांत होता नजर आया तो मायावती ने सोची-समझी रणनीति के तहत 22 प्रत्याशियों की सूची जारी कर कांग्रेस को करारा जवाब दे डाला। इस सूची के जारी होते ही कांग्रेस नेता सकते में आ गए। वहीं भाजपा नेताओं में खुशी नजर आ रही है। भाजपा पहले से ही इस गठबंधन को लेकर नाखुश थी, वह चाहती थी कि यह गठबंधन न हो। इसके पीछे बीते तीन चुनावों में यह देखने को मिला है कि बसपा का जहां-जहां प्रभाव रहा, वहां-वहां कांग्रेस को हार तो मिली, मगर भाजपा हारते-हारते उस सीट पर विजय पा गई।

बसपा के कारण कांग्रेस को मिलती रही हार

2003 के विधानसभा चुनाव में जब कांग्रेस को करारी हार मिली थी, उस चुनाव में कांग्रेस को 25 सीटों पर बसपा के उम्मीदवारों के कारण भाजपा के हाथों हार मिली थी। इस चुनाव में बसपा को 2 स्थानों पर जीत हासिल हुइ थी।  इस चुनाव में कांग्रेस को मात्र 38 सीटें मिली थी। 2008 के चुनाव में कांग्रेस को 71 सीटें मिली थी, बसपा को इस चुनाव में मात्र 2 सीटें ही मिल पाई थी, मगर 39 सीटों पर उसने कांग्रेस को नुकसान पहुंचाते हुए भाजपा प्रत्याशी को जीतने में मदद की थी। इसी तरह 2013 के विधानसभा चुनाव में जब कांग्रेस को 58 सीटों पर जीत मिली। इस चुनाव में बसपा के 4 उम्मीदवार जीते थे, मगर बसपा ने इस चुनाव में भी करीब 40 सीटों पर कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया और भाजपा के प्रत्याशियों को जीतने में मदद की थी।

जातिगत समीकरण बैठाकर जारी की सूची

बसपा ने जिन 22 विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशियों की घोषणा की है, वे उसके प्रभाव वाले क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों में बसपा ने जातिगत समीकरण बैठाते हुए सूची को जारी किया है। बसपा द्वारा जारी की गई सूची में सबसे ज्यादा सामान्य वर्ग की 10 सीटें है, जबकि अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित सीटों में से मात्र 7 सीटों पर बसपा ने प्रत्याशी घोषित किए है, जबकि अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित सीटों में से 5 सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए हैं। अधिकांश घोषित सीटों पर पिछड़े वर्ग के मतदाता का प्रभाव रहा है, विशेषकर विंध्य अंचल की घोषित सीटों पर। ये मतदाता बसपा के पक्ष में मतदान करते रहे हैं। बसपा ने इस सूची में आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित पांच सीटों चितरंगी, धोहनी, जैतपुर, बांधवगढ़और सिहोरा में प्रत्याशी उतारकर कांग्रेस को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाने का काम किया है, जबकि रैगांव, अमरपाटन, रामपुर बघेलान, सिरमौर, सेमरिया, देवतालाब और मनगंवा विधानसभा क्षेत्र के पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को प्रभावित करते हुए कांग्रेस को नुकसान और भाजपा को सीधा लाभ पहुंचाने का काम कर दिया है।

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