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कांग्रेस संगठन में फ़ेरबदल की हो रही तैयारी, सोनिया गांधी कर रही हैं मंथन, 30 वर्षों से संसदीय दल गठित नहीं, कई हटेंगे

By शीलेष शर्मा | Updated: August 6, 2020 19:10 IST

पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सोनिया गांधी जल्दी ही पार्टी में संसदीय दल का गठन करना चाहती हैं। उल्लेखनीय है कि लगभग पिछले 30 वर्षों से पार्टी में कोई संसदीय दल गठित नहीं किया गया नतीज़ा चुनावों में उम्मीदवारों का चयन चुनाव समिति द्वारा ही किया जाता रहा है।

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ठळक मुद्देसोनिया ने यह पहल उस समय की जब राज्यसभा सांसदों के साथ हुयी चर्चा के दौरान युवाओं और वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद के संकेत उभर कर सामने आये। सोनिया कार्यसमिति के स्वरूप में भी बदलाव चाहती हैं, जिसके तहत अनेक वरिष्ठ महासचिवों को हटा कर यह ज़िम्मेदारी पार्टी के युवा नेताओं को देने का इरादा है। अम्बिका सोनी, गुलाम नबी आज़ाद, मुकुल वासनिक सरीखे नेताओं को दूसरे कामों की ज़िम्मेदारी देने पर पार्टी में मंथन ज़री है।

नई दिल्लीः कांग्रेस अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी पार्टी संगठन में व्यापक फ़ेरबदल को लेकर इन दिनों अपने सिपहसालरों से मंथन कर रहीं हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार सोनिया ने यह पहल उस समय की जब राज्यसभा सांसदों के साथ हुयी चर्चा के दौरान युवाओं और वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद के संकेत उभर कर सामने आये।

पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सोनिया गांधी जल्दी ही पार्टी में संसदीय दल का गठन करना चाहती हैं। उल्लेखनीय है कि लगभग पिछले 30 वर्षों से पार्टी में कोई संसदीय दल गठित नहीं किया गया नतीज़ा चुनावों में उम्मीदवारों का चयन चुनाव समिति द्वारा ही किया जाता रहा है।

ऐसे भी संकेत मिले हैं कि नए अध्यक्ष पर कोई फ़ैसला हो सोनिया कार्यसमिति के स्वरूप में भी बदलाव चाहती हैं, जिसके तहत अनेक वरिष्ठ महासचिवों को हटा कर यह ज़िम्मेदारी पार्टी के युवा नेताओं को देने का इरादा है।

अम्बिका सोनी, गुलाम नबी आज़ाद, मुकुल वासनिक सरीखे नेताओं को दूसरे कामों की ज़िम्मेदारी देने पर पार्टी में मंथन ज़री है। पूर्व,पश्चिम, उत्तर और दक्षिण के लिए अलग-अलग उपाध्यक्ष भी नियुक्त किये जा सकते हैं।

केंद्रीय स्तर पर होने वाले फ़ेरबदल के साथ साथ कुछ राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों को बदलने की तैयारी है। इधर राज्य सभा में नये नेता प्रति पक्ष को लेकर भी पार्टी में हलचल है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को यह ज़िम्मेदारी सौंपना चाहती हैं,क्योंकि गुलाम नबी आज़ाद की राज्य सभा सदस्यता फ़रवरी 2021 में समाप्त हो रही है व उनके पुनः राज्यसभा पहुँचने की फ़िलहाल  कोई संभावना नहीं है। नेता प्रति पक्ष के लिये आनंद शर्मा भी जी तोड़ कोशिश कर रहे हैं। 

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