Highlightsमुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी ने मृतकों के परिवार को एक-एक करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि देने का भी ऐलान किया।स्टाइरीन गैस केंद्रीय तंत्रिका तंत्र, गले, त्वचा, आंखों और शरीर के कुछ अन्य हिस्सों को प्रभावित करती है। सैकड़ों लोगों के आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ, सिर दर्द, उल्टी की शिकायत आ रही है।

विशाखापट्टनम: आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम की एलजी पॉलिमर फैक्ट्री में आज (8 मई) फिर से कोई गैस लीकेज की घटना नहीं हुई है। हालांकि कुछ मीडियो रिपोर्ट में दावा किया गया था कि गैस लीक उसी टैंकर से हुई, जिससे 7 मई को गैस रिसाव हुआ था। इस मामले पर NDRF के डीजी एस. एन. प्रधान जानकारी देते हुए कहा है,  मीडिया में अफवाहें चल रही है कि आज(8 मई) फिर से लीकेज हुआ है तो मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि ऐसा कुछ नहीं हुआ है। गैस लीकेज को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया है इसमें थोड़े फ्यूम्स निकलते हैं जो कि कैंपस के आस-पास रहता है, इसे ये आकलन कर लेना की फिर से लीकेज हुआ है तो सरासर गलत है। मैं मीडिया से अपील करूंगा कि इस तरह की गलत अफवाह न फैलाएं जिससे लोगों में भ्रम फैले। 

विशाखापट्टनम गैस लीक में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 11 लोगों की मौत हो गई और एक हजार लोग प्रभावित हुए हैं। दुर्घटना से होने वाली मौतों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि कम से कम 20 लोग वेंटिलेटर पर रखे गए हैं।

विशाखापट्टनम गैस लीक: गुजरात से बुलाया गया PTBC 

गैस को निष्क्रिय करने के लिए 7 मई की देर रात गुजरात से पैरा-टर्शरी ब्यूटाइल कैटेकोल  (PTBC) लाया गया है। विशाखापट्टनम एयरपोर्ट के डायरेक्टर राज किशोर ने ANI को बताया कि 7 मई की रात साढ़े दस बजे एयर इंडिया की फ्लाइट PTBC केमिकल के साथ हवाईअड्डे पर आई थी। जिसमें 9 लोग भी थे। रात को ही  PTBC केमिकल के साथ 9 लोगों की टीम घटनास्थल के लिए रवाना हो गई थी।  

PTBC केमिकल साउथ गुजरात में बनाया जाता है, जो किसी भी गैस लीकेज को रोकने में मदद करता है और निष्क्रिय करता है। एनडीआरएफ के महानिदेशक एस एन प्रधान ने कहा कि जब तक रिसाव को पूरी तरह बंद नहीं कर दिया जाता तब तक एनडीआरएफ कर्मी दुर्घटनास्थल पर मौजूद रहेंगे। 

जानिए क्या है स्टाइरीन गैस और क्या होता है इसका असर 

विशाखापट्टनम के पास गोपालपत्तनम के तहत आने वाले आर आर वेंकटपुरम गांव में स्थित ‘एलजी पॉलिमर्स लिमिटेड’ के संयंत्र से स्टाइरीन गैस का रिसाव बुधवार (6 मई) देर रात करीब ढाई बजे शुरू हुआ, जिसके कुछ घंटों बाद कई लोग सड़क किनारे और नालों के पास बेहोशी की हालत में पड़े मिले। 

स्टाइरीन एक जहरीली गैस नहीं है और ज्यादा मात्रा में सांस के जरिए शरीर के भीतर जाने पर ही जानलेवा हो सकती है। स्टाइरीन का इस्तेमाल सिंथेटिक रबर और रेजिन बनाने में किया जाता है। 

Visakhapatnam गैस लीक, हादसे के बाद की तस्वीर
Visakhapatnam गैस लीक, हादसे के बाद की तस्वीर

जब रिसाव हुआ तब स्टोरेज टैंक में 1,800 टन स्टाइरीन मौजूद थी। इस गैस का इस्तेमाल पोलिस्टरीन प्लास्टिक, फाइबर ग्लास, रबर और लेटेक्स बनाने में किया जाता है। स्टाइरीन गैस स्नायु तंत्र, गले, त्वचा, आंखों और शरीर के कुछ अन्य भागों पर प्रभाव डालती है।

मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी ने मृतकों के परिवार को एक-एक करोड़ रुपये देने का किया ऐलान, जांच के आदेश 

मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने विशाखापट्टनम में एक फार्मा कंपनी से गैस रिसाव की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है।  मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवार को एक-एक करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि देने का भी ऐलान किया।

प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) डी गौतम स्वांग ने बताया कि मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। सवांग ने कहा, "गैस कैसे लीक हुई और संयंत्र में न्यूट्रलाइजर रिसाव को रोकने में क्यों कारगर साबित नहीं हुआ, इसकी जांच की जाएगी।

Visakhapatnam गैस लीक, जिस फैक्ट्री में हादसा हुआ
Visakhapatnam गैस लीक, जिस फैक्ट्री में हादसा हुआ

फैक्ट्री को लॉकडाउन के बाद खोला जाना था

राज्य के उद्योग मंत्री मेकपति गौतम रेड्डी ने कहा कि एल जी पॉलीमर इकाई को लॉकडाउन के बाद खोला जाना था। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार रसायन को निष्प्रभावी करने के लिए विमान द्वारा गुजरात से पांच सौ किलोग्राम प्रावरोधक मंगाएगी। सूत्रों ने बताया कि संयंत्र में बीस कर्मचारी सुरक्षा नियमों से भली भांति परिचित थे और उन्होंने उचित कदम उठाए जिसके चलते उन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ। 

ग्रेटर विशाखापट्टनम नगर निगम ने गैस के प्रभाव से बचने के लिए ट्विटर पर परामर्श जारी करते हुए लोगों से गीले मास्क पहनने, केले खाने और दूध का सेवन करने की सलाह दी। संयंत्र का संचालन करने वाली दक्षिण कोरियाई फर्म एल जी केम ने कहा है कि वह स्थानीय निवासियों और कर्मचारियों की सहायता के लिए भारतीय अधिकारियों के साथ सहयोग कर रही है। कंपनी ने कहा कि दुर्घटना में उसका कोई कर्मचारी हताहत नहीं हुआ। 

जानें उस कंपनी के बारे में जहां, गैस लीकेज की घटना हुई?

 हिंदुस्तान पॉलिमर कंपनी की स्थापना 1961 में हुई थी। लेकिन 1997 में कंपनी को साउथ कोरिया के एलजी केमिकल ने खरीद लिया था और इसे एलजी पॉलिमर नाम दिया गया था। प्लांट में प्लास्टिक बनाने का काम होता है। 

Web Title: visakhapatnam gas leak again PTBC chemical reached Need to know all details about vizag gas leak
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