यूपी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामला, बड़े अफसरों पर गिरेगी गाज

By राजेंद्र कुमार | Updated: January 9, 2026 18:36 IST2026-01-09T18:35:00+5:302026-01-09T18:36:53+5:30

अब तक ही जांच से यह सामने जा चुका है कि पेपर लीक का मास्टरमाइंड उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय का गोपनीय सहायक महबूब अली था. महबूब अली के तार कई बड़े अफसरों और कर्मचारियों से जुड़ने होने के सबूत एसटीएफ के हाथ लगे हैं. 

Uttar Pradesh Assistant Professor recruitment exam paper leak case: Senior officers likely to face consequences | यूपी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामला, बड़े अफसरों पर गिरेगी गाज

यूपी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामला, बड़े अफसरों पर गिरेगी गाज

लखनऊ: योगी सरकार में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में जल्दी ही कई बड़े अफसरों पर गाज गिरेगी. इस मामले की हो रहा जांच में लगातार कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. अब तक ही जांच से यह सामने जा चुका है कि पेपर लीक का मास्टरमाइंड उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय का गोपनीय सहायक महबूब अली था. महबूब अली के तार कई बड़े अफसरों और कर्मचारियों से जुड़ने होने के सबूत एसटीएफ के हाथ लगे हैं. 

महबूब अली से बरामद मोबाइल और डिजिटल डाटा के विश्लेषण से ये दावा किया जा रहा है और एक बड़े अफसर सहित तीन लोगों पर एसटीएफ ने अपना ध्यान जमाया है. इस अधिकारी के खिलाफ एसटीएफ को कई पुख्ता साक्ष्य हाथ लगें हैं.  पेपर लीक से जुड़े इन साक्ष्यों के आधार पर इस अधिकारी के खिलाफ एसटीएफ जल्दी ही कार्रवाई करेंगी. ताकि पेपर लीक मामले में सरकार की धूमिल हुई छवि को बेहतर किया जा सके. 

वास्तव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ परीक्षाओं के पेपर लीक मामले को लेकर अखिलेश यादव सरकार पर लगातार हमले करते रहे हैं, लेकिन उनकी भी सरकार में पेपर लीक हुए. इसी क्रम में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा पेपर लीक का मामला हो गया. असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा  बीते साल 16-17 अप्रैल को हुई थी. इस परीक्षा का परिणाम घोषित हो चुका था और इंटरव्यू बाकी थे. इसी बीच एसटीएफ की जांच में पेपर लीक मामले में फर्जी प्रश्न पत्र और अवैध धन वसूली के गंभीर आरोप सामने आए. 

जांच में यह भी पता चला कि भर्ती परीक्षा में सेंधमारी करने वाले गिरोह ने एक-एक अभ्यर्थी से 35-35 लाख रुपए में डील की थी. एडवांस के तौर पर 10 से 12 लाख रुपए लिए गए थे और शेष धनराशि परीक्षा के कुछ दिनों बाद लेने की योजना थी. इस मामले में एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल से मिले साक्ष्यों के बारे में जब शिक्षा सेवा चयन आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष कीर्ति पांडेय को हुई तो उन्होने अपने पद से इस्तीफा. इसके बाद नए साल में एसटीएफ़ ने अपनी जांच रिपोर्ट के बारे में शासन को जानकारी दी तो मुख्यमंत्री योगी ने  गत 7 जनवरी को पूरी परीक्षा रद्द करने का आदेश अधिकारियों को दे दिया. 

जलाई गई थी प्रश्नपत्र की फोटो कापियां 

सीएम योगी के इस फैसले के बाद से अब एसटीएफ ने पेपर लीक मामले के जांच तेज कर दी है. एसटीएफ अब पेपर लीक मामले में जो नए सुराग हाथ लगे हैं, उसके आधार पर विवेचना में लगी है. एसटीएफ को पकड़े गए महबूब अली के मोबाइल आदि के डाटा से कई संदिग्धों का जुड़ाव भी इस मामले में मिला है. आयोग से आयोग से प्राप्त अभ्यर्थियों के डाटा से इस जुड़ाव का मिलान एसटीएफ ने कराया. जिससे यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से परीक्षा में सेंधमारी की थी. इस मामले में आयोग के कई अधिकारी और कर्मचारी भी एसटीएफ की जांच के दायरे में हैं. आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां भी संभव हैं. 

यह भी पता चला है कि  आरोपियों ने पेपर लीक के बाद सबूत मिटाने की कोशिश की. जिन अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्रों की फोटो कॉपी दी गई थी, उनसे वापस लेकर उन्हें जला दिया गया था. ताकि कोई भौतिक साक्ष्य न बचे, लेकिन  आरोपियों के मोबाइल फोन में मौजूद डिजिटल सबूतों के आधार पर एसटीएफ अब इस मामले से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंच रही है. इस मामले में तत्कालीन आयोग अध्यक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि निगरानी में हुई चूक के चलते पूरी भर्ती परीक्षा रद्द करनी पड़ी. चर्चा है कि  उनकी भूमिका की भी जांच हो रही है. 

Web Title: Uttar Pradesh Assistant Professor recruitment exam paper leak case: Senior officers likely to face consequences

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