समान नागरिक संहिताः 365 दिन में 4,74,447 विवाहों का पंजीकरण, यूसीसी में आसान हुआ शादी पंजीकरण, जानिए नियम
By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 19, 2026 23:20 IST2026-01-19T22:15:30+5:302026-01-19T23:20:41+5:30
Uniform Civil Code: 316 लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से ही विवाह विच्छेद करने और 68 ने सहवास संबंधों में रहने, दो ने सहवास संबंध समाप्त करने का प्रमाणपत्र भी प्राप्त किया है।

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देहरादूनः उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने से प्रक्रियाएं आसान हो गयी हैं और इसके तहत एक साल में राज्य में साढ़े चार लाख से अधिक शादियों का पंजीकरण हो चुका है। यहां जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार 27 जनवरी को राज्य में यूसीसी लागू हुए एक साल पूरा होने वाला है और इस अवधि में अब तक 4,74,447 विवाहों का पंजीकरण हो चुका है । यूसीसी के तहत अब पति-पत्नी कहीं से भी ऑनलाइन तरीके से विवाह पंजीकरण करवा रहे हैं जबकि पुराने अधिनियम में उन्हें दो गवाहों के साथ तय तिथि पर सब रजिस्ट्रार कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता था।
यूसीसी से पहले ‘उत्तराखंड विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2010’ के तहत, विवाह पंजीकृत किए जाते थे जिसकी पूरी प्रक्रिया ऑफलाइन थी। यूसीसी में विवाह पंजीकरण ऑनलाइन माध्यम से हो रहे हैं जिसमें दंपति या गवाह कहीं से भी, अपने रिकॉर्ड और वीडियो बयान दर्ज कराते हुए पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं।
यही कारण है कि करीब एक साल में सोमवार दोपहर तक 4,74,447 विवाह पंजीकृत हो चुके हैं। यूसीसी में विवाह पंजीकरण का प्रतिदिन औसत 1400 के करीब है जबकि पिछले अधिनियम में विवाह पंजीकरण का प्रतिदिन औसत प्रतिदिन 67 का आता था।
यही नहीं, इस दौरान, 316 लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से ही विवाह विच्छेद करने और 68 ने सहवास संबंधों में रहने, दो ने सहवास संबंध समाप्त करने का प्रमाणपत्र भी प्राप्त किया है। यूसीसी के तहत आवेदन के बाद विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने के लिए 15 दिन की समय सीमा तय है, लेकिन आवेदन करने के बाद औसतन पांच दिन के भीतर ही पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त हो रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड ने यूसीसी लागू करते हुए अन्य राज्यों को दिशा दिखाई है। उन्होंने कहा,‘‘बीते एक साल में जितनी पारदर्शिता और सरलता से यूसीसी के प्रावधानों को लागू किया गया है, उससे लोगों में पूरी प्रक्रिया के प्रति विश्वास बढ़ा है। यही कारण है कि अब बड़ी संख्या में लोग यूसीसी के तहत पंजीकरण करवा रहे हैं। उत्तराखंड यूसीसी हर तरह से एक मॉडल कानून साबित हुआ है।’’