पांच राज्यों के चुनावी नतीजों से बदलेगी अब यूपी की चुनावी चाल! हिमंत बिस्वा सरमा ने अपनी उपयोगिता साबित की अब योगी की बारी

By राजेंद्र कुमार | Updated: May 4, 2026 18:06 IST2026-05-04T18:06:04+5:302026-05-04T18:06:42+5:30

यूपी के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में मिली चुनावी सफलता के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उत्तर प्रदेश में अपने विकास और राष्ट्रवाद के एजेंडे को और आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाएगी.

The election dynamics in UP are set to shift following the results in five states! Himanta Biswa Sarma has proven his utility—now it is Yogi's turn | पांच राज्यों के चुनावी नतीजों से बदलेगी अब यूपी की चुनावी चाल! हिमंत बिस्वा सरमा ने अपनी उपयोगिता साबित की अब योगी की बारी

पांच राज्यों के चुनावी नतीजों से बदलेगी अब यूपी की चुनावी चाल! हिमंत बिस्वा सरमा ने अपनी उपयोगिता साबित की अब योगी की बारी

Highlightsयूपी में सरकार और संगठन को लेकर सीएम योगी की चुनौतियों में होगा इजाफाअखिलेश कांग्रेस के साथ गठबंधन करके क्या यूपी की सत्ता पर काबिज हो पाएंगे?

लखनऊ: देश के पांच राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु,केरल और पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे आ गए हैं. इन पांचों राज्यों के चुनावी परिणाम अब उत्तर प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाने वाले हैं.  कहा जा रहा है, इन राज्यों के चुनाव नतीजे खासकर पश्चिम बंगाल और असम के केवल क्षेत्रीय सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उनका असर देश के सबसे बड़े राजनीतिक राज्य उत्तर प्रदेश (यूपी) की चुनावी रणनीतियों पर भी साफ दिखाई देगा. और यह सवाल उठेगा कि असम में तीसरी बार सत्ता हासिल कर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अपनी उपयोगिता साबित कर दी है. अब यह देखना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ क्या असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की तरह उत्तर प्रदेश में तीसरी बार सरकार बनाने में सफल होंगे? और क्या समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव कांग्रेस के साथ गठबंधन करके केरल की तरह यूपी की सत्ता पर काबिज होने में सफल होंगे.

सीएम योगी और भाजपा दोनों के लिए यूपी बनेगा चुनौती

इस दो प्रमुख सवालों को लेकर यूपी के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में मिली चुनावी सफलता के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उत्तर प्रदेश में अपने विकास और राष्ट्रवाद के एजेंडे को और आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाएगी. भाजपा के नए बने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन यह कह चुके हैं कि यूपी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ही आगामी विधानसभा चुनाव लड़ा जाएगा. यानी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की तरह ही मुख्यमंत्री योगी को यह साबित करना होगा कि वह भी यूपी में तीसरी बार यूपी में सरकार बनाने में सफल होंगे. यह काम आसान नहीं है. 

इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री का पूरा विश्वास सीएम योगी पर और उनकी चुनावी रणनीति पर होना बहुत जरूरी है. यूपी में भाजपा तभी सफल होगी जब विकास, महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर जनता का विश्वास जमे. सिर्फ  हिंदुत्व के मुद्दे को जोर-शोर से उठाने और मुस्लिम तुष्टीकरण को लेकर विपक्ष पर कटाक्ष करने से यूपी में भाजपा की दाल नहीं गलेगी. बीते लोकसभा के चुनाव परिणाम इसका सबूत हैं. सत्ता में होने और योगी आदित्यनाथ के प्रधानमंत्री का पूरा विश्वास होने के बाद भी यूपी में भाजपा अयोध्या सीट तक हार गई और सपा के पिछड़ गई.इसलिए अब यूपी योगी आदित्यनाथ और भाजपा दोनों के लिए बड़ी चुनौती है.

विपक्ष को बदलनी होगी रणनीति

सपा विधायक ज़ाहिद बेग पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा को मिली जीत को लेकर बेहद गंभीर हैं. वह कहते है, इन राज्यों में मिली जीत का असर यूपी में भाजपा और विपक्ष (इंडिया गठबंधन) के जमीनी कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ेगा. अब भाजपा यूपी में योगी मॉडल को लेकर और भी आक्रामक होगी. यानी अल्पसंख्यकों के खिलाफ सख्ती होगी. सरकारी मशीनरी का खुला उपयोग होगा. ऐसे में विपक्ष को अब एकजुट होकर भाजपा के किले को भाजपा के किले को भेदने की रणनीति (ब्लूप्रिंट) तैयार करना होगा. सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय करना होगा और सीटों को लेकर कोई टकराव नहीं करना होगा. पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूला को लेकर ही सीएम योगी और भाजपा को घेरना होगा. 

ज़ाहिद बेग का यह भी कहना है कि बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा को मिली सफलता से यह साफ हुआ है कि जनता केवल बड़े चेहरों पर नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और स्थानीय विकास के ठोस आंकड़ों पर वोट दे रही है. यूपी भाजपा जहां सुरक्षा और सुशासन को ढाल बना रही है, वहीं विपक्ष जातिगत जनगणना और बेरोजगारी को धार दे रहा है. विपक्ष को भाजपा के सुरक्षा और सुशासन की पोल खोलने के लिए मेहनत करनी होगी और राज्य में बढ़ती जा रही बेरोजगारी और भुखमरी को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलना होगा. 

ज़ाहिद बेग का यह भी कहना है कि यह पूरा साल यूपी के लिए चुनावी मोड वाला है. राज्यसभा की 10 सीटों पर हुए हालिया चुनाव और मतदाता सूची से कटे लाखों वोटों के गणित ने पहले ही राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है. अब पांच राज्यों के चुनाव परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि 2027 की लड़ाई केवल बयानों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके लिए सूक्ष्म स्तर पर 'सोशल इंजीनियरिंग' को दुरुस्त करना होगा. और लखनऊ की सत्ता के दावेदारों को पांच राज्यों के चुनाव परिणाम का यह संदेश है कि मतदाता अब साइलेंट है और उसकी चाल को समझने के लिए रणनीति में बड़े बदलाव अनिवार्य हैं.
 

Web Title: The election dynamics in UP are set to shift following the results in five states! Himanta Biswa Sarma has proven his utility—now it is Yogi's turn

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