सुप्रीम कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों में समान ड्रेस कोड के लिए दायर की गई जनहित याचिका को किया खारिज, कहा- 'हम इसे सुनवाई के लायक नहीं मानते हैं'

By आशीष कुमार पाण्डेय | Published: September 16, 2022 02:20 PM2022-09-16T14:20:50+5:302022-09-16T14:25:17+5:30

सुप्रीम कोर्ट ने शैक्षिक संस्थाओं में समान ड्रेस कोड लागू करने की मांग को लेकर दायर की गई जनहित याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह ऐसा विषय नहीं है, जिस पर कोर्ट से किसी आदेश की अपेक्षा की जाए।

Supreme Court dismisses PIL filed for uniform dress code in educational institutions, says- 'We do not consider it worth hearing' | सुप्रीम कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों में समान ड्रेस कोड के लिए दायर की गई जनहित याचिका को किया खारिज, कहा- 'हम इसे सुनवाई के लायक नहीं मानते हैं'

फाइल फोटो

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Highlightsसुप्रीम कोर्ट ने शैक्षिक संस्थाओं में समान ड्रेस कोड लागू करने वाली जनहित याचिका को किया खारिजकोर्ट ने कहा यह केंद्र और राज्य सरकारों का विषय है, कोर्ट से इस विषय से कोई संबंध नहीं हैयाचिका में समानता और राष्ट्रीय एकता के नाम पर समान ड्रेस कोड लागू करने का मांग की गई थी

दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा चलाये जा रहे शैक्षणिक संस्थानों में कर्मचारियों और छात्रों के लिए समान ड्रेस कोड लागू करने की मांग को लेकर दायर की गई जनहित याचिका खारिज कर दिया। देश की सर्वोच्च अदालत ने इस संबंध में शुक्रवार को यह ऐसा विषय नहीं है, जिस पर कोर्ट से किसी आदेश की अपेक्षा की जाए। यह पूरी तरह से केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारों का मामला है और इस विषय में दायर की गई जनहित याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता है।

मामले में जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि यह ऐसा कोई गंभीर मामला नहीं है, जिस पर यह अदालत विचार करे या इस संबंध में कोई आदेश पारित करे। इसलिए हम इस याचिका को सुनवाई के लायक नहीं मानते हैं।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज की गई जनहित याचिका में कोर्ट से मांग की गई थी कि वो केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा संचालित देश के तमाम शैक्षिक संस्थाओं में समानता को सुनिश्चित कराने और राष्ट्रीय एकता के साथ बंधुत्व को बढ़ावा देने के लिए समान ड्रेस कोड लागू करने का आदेश पारित करे।

सुप्रीम कोर्ट में निखिल उपाध्याय की ओर से इस जनहित याचिका के मामले में पेश हुए वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने कहा कि शैक्षिक संस्थाओं में समान ड्रेस कोड का मुद्दा दरअसल संवैधानिक मुद्दा है लेकिन चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका की सुनवाई में अपनी अनिच्छा व्यक्त की है। इस कारण हम इस जनहित याचिका को वापस ले रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के वकील गौरव भाटिया भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता हैं और उनकी यह जनहित याचिका कर्नाटक 'बुर्का' विवाद के पृष्ठभूमि में दायर की गई थी। याचिका को खारिज करने वाले जस्टिस हेमंत गुप्ता उस बेंच की भी अध्यक्षता कर रहे हैं, जो कर्नाटक सरकार द्वारा शैक्षणिक संस्थानों में बुर्के से प्रतिबंध हटाने से इनकार करने वाले कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।

जस्टिस गुप्ता की बेंच के समक्ष इस जनहित याचिका को दाखिल करने वाले वकील अश्विनी उपाध्याय और अश्विनी दुबे ने अपील की थी कि वो केंद्र को सामाजिक और आर्थिक न्याय, समाजवाद धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के मूल्यों को विकसित करने के उपायों को बताने के लिए एक न्यायिक आयोग या एक विशेषज्ञ पैनल बनाने का निर्देश दें। वहीं साथ में केंद्र और राज्यों के सरकारी शैक्षिक संस्थाओं में समान ड्रेस कोड लागू करने का आदेश दें ताकि छात्रों के बीच भाईचारा और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा मिले।

वकील अश्विनी उपाध्याय ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट वैकल्पिक रूप से संविधान के संरक्षक और मौलिक अधिकारों के रक्षक है, इस नाते उसे विधि आयोग को तीन महीने के भीतर सामाजिक समानता, भाईचारा, राष्ट्रीय गरिमा और एकता को बढ़ावा देने के लिए सुझाव देने वाली एक रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश देना चाहिए।"

उन्होंने कहा कि सरकारी शैक्षणिक संस्थान धर्मनिरपेक्ष सार्वजनिक स्थान हैं और ये शिक्षा के जरिये ज्ञान और रोजगार के लिए छात्रों को तैयार करके राष्ट्र निर्माण में अहम योगदान दे रहे हैं। इसलिए इन संस्थानों में सभी के लिए समान ड्रेस कोड लागू होना चाहिए न कि यहां पर गैर-जरूरी धार्मिक प्रथाओं का पालन करने के लिए छूट देनी चाहिए।

इसके साथ ही जनहित याचिका में कहा गया था कि शैक्षणिक संस्थानों के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को बनाए रखने के लिए सभी स्कूल-कॉलेजों में एक कॉमन ड्रेस कोड लागू करना बहुत जरूरी है अन्यथा आने वाले समय में नागा साधु भी धार्मिक प्रथा का हवाला देते हुए बिना कपड़ों के विद्यालयों में प्रवेश की अनुमति मांग सकते हैं। (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

 

Web Title: Supreme Court dismisses PIL filed for uniform dress code in educational institutions, says- 'We do not consider it worth hearing'

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