Sam Pitroda 'hua to hua' remark may be its language error damage caused | लोकसभा चुनाव: भाषाई अर्थ-भावार्थ के कारण...'हुआ तो हुआ' पर इतना हंगामा हुआ?
सैम पित्रोदा

राजस्थान से लेकर पश्चिम बंगाल तक और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक इतनी भाषाएं, बोलियां हैं कि एक भाषा के शब्द का अर्थ, भावार्थ और वजन दूसरी भाषा में जा कर बदल जाता है, यही वजह है कि सैम पित्रोदा के- हुआ तो हुआ, पर इतना हंगामा हुआ. हालांकि, 1984 के सिख दंगों को लेकर दिए इस बयान पर मचे हंगामे के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैम पित्रोदा ने माफी मांग ली और कहा कि- मेरी हिंदी खराब है, मैं जो हुआ, वो बुरा हुआ, कहना चाहता था. बुरा हुआ को मैं दिमाग में ट्रांसलेट नहीं कर पाया. मेरे बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया.

कुछ हद तक यह बात सही भी है, क्योंकि हिन्दी के कई शब्द गुजराती में अलग अर्थ-भावार्थ रखते हैं. यही नहीं, कई शब्द तो ऐसे हैं जो एक भाषा से दूसरी भाषा में जा कर गाली तक में बदल जाते हैं, हालांकि भाषाई मर्यादा के कारण ऐसे शब्दों का उल्लेख नहीं किया जा सकता, लेकिन उनका उपयोग किसी को भी परेशानी में डाल सकता है. 

बाई एक ऐसा शब्द है जो एक राज्य से दूसरे राज्य में एकदम अलग अर्थ रखता है. कहीं यह माता के तुल्य सम्माननीय है, कहीं कामवाली बाई है, तो कहीं कोठेवाली बाई! हिन्दी का राजीनामा गुजराती में जा कर त्यागपत्र में बदल जाता है, तो गुजराती में पागलपन के लिए जो शब्द उपयोग में लिया जाता है, उसका उच्चारण करके ही कोई हिन्दीभाषी पगला सकता है?

हिन्दी में अकस्मात दुर्घटना हो सकती है, लेकिन गुजराती में तो अकस्मात का मतलब ही दुर्घटना है. गुजराती में ऐसे अनेक शब्द हैं, जिनके अर्थ, भावार्थ और वजन दूसरी भाषाओं से एकदम अलग हैं.इतना ही नहीं, कुछ शब्दों के अर्थ एकदम उल्टे हैं, जैसे नमक को गुजराती में मीठूं कहते हैं. यदि दक्षिण भारत में कोई पूछे कि- तमिल तेरी मां, तो उस पर गुस्सा होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वह केवल यह जानना चाहता है कि- तुम्हें तमिल आती है क्या?

दिलचस्प बात यह है कि एक राज्य से दूसरे राज्य में पहुंच कर कई बार हिन्दी तक बदल जाती है, शब्दों के लिंग बदल जाते हैं. कहीं दही खट्टा होता है, तो कहीं खट्टी, कहीं तार डाले जाते हैं, तो कहीं तार डाली जाती है, कहीं ट्रक पलटता है, तो कहीं ट्रक पलटती है, कहीं समीकरण सुलझाया जाता है, तो कहीं सुलझाई जाती है!कई ऐसी कहावतें भी हैं, जिनमें गालियों का उपयोग किया गया है, हालांकि अब ऐसी कहावतें ज्यादा प्रचलन में नहीं हैं, किन्तु कभी-कभार ये छप भी जाती हैं.

कई बार कुछ शब्दों के उच्चारण के चलते भी गलतफहमी हो जाती है, जिसका शिकार खुद पीएम मोदी हो चुके हैं. पीएम मोदी की गुजरात के पाटन में रैली थी, जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था. करीब पन्द्रह सेकेंड के इस वीडियो के लिए यह दावा किया जा रहा था कि पीएम मोदी ने अपने संबोधन में गाली का इस्तेमाल किया? हालांकि, सच्चाई यह है कि पीएम मोदी ने कोई गाली नहीं दी, वे तो पानी की समस्या के बारे में गुजराती में अपना नजरिया पेश कर रहे थे.सियासी सयानों का मानना है कि भाषाई गड़बड़ी के कारण- हुआ तो हुआ, लेकिन बहुत बुरा हुआ!


Web Title: Sam Pitroda 'hua to hua' remark may be its language error damage caused
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