rss chief mohan bhagwat jharkhand says Hindu's accountability highest in making India | RSS: मोहन भागवत ने कहा- भारत को बनाने में हिन्‍दुओं की जवाबदेही सबसे ज्‍यादा है, हिंदू अपने राष्‍ट्र के प्रति और जिम्‍मेवार बनें
मोहन भागवत (फाइल फोटो)

Highlightsमोहन भागवत ने स्वयंसेवकों से अपील की कि अपनी संस्कृति पर गर्व करते हुए देश को परम वैभव तक पहुंचाने के लिए काम करें.अच्छे-बुरे के लिए सिर्फ हिंदू जिम्मेदार हैं. वह अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते हैं-मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन मधुकर भागवत ने आज यहां आयोजित संघ समागम में कहा कि भारत को तरक्की के रास्ते पर ले जाने की जिम्मेवारी और जवाबदेही हिंदुओं पर है और हिंदुओं को संगठित करने के अलावा संघ का कोई दूसरा काम नहीं है. उन्होंने कहा कि हिंदुत्व के भाव से ही राष्ट्रीय भावना को प्रबल करते हुए एक समतामूलक और शोषणरहित समाज की स्थापना हो सकती है. उन्होंने कहा कि भारत को बनाने में हिन्‍दुओं की जवाबदेही सबसे ज्‍यादा है. हिंदू अपने राष्‍ट्र के प्रति और जिम्‍मेवार बनें. 

झारखंड की राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में स्वयंसेवकों के एकत्रीकरण में उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में एक आरएसएस कार्यकर्ता के साथ अपनी बातचीत को याद करते हुए उन्होंने कहा कि मैंने उनसे कहा कि नेशनलिज्म शब्द का उपयोग मत कीजिए. नेशन कहेंगे चलेगा. नेशनल कहेंगे चलेगा. नेशनैलिटी कहेंगे चलेगा, लेकिन नेशनलिज्म का मतलब हिटलर और नाजीवाद होता है. मोहन भागवत ने कहा कि भारतीय और हिंदू एक-दूसरे के पूरक हैं. अच्छे-बुरे के लिए सिर्फ हिंदू जिम्मेदार हैं. वह अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते हैं. उन्होंने कहा कि भारत को बड़ा करना है तो हिंदू को बड़ा होना होगा. 

हिन्‍दुओं को संघ की शाखा में जरूर आना चाहिए. इससे उनका आत्‍मबल बढ़ेगा- मोहन भागवत

उन्होंने कहा है कि हिन्‍दुओं को संघ की शाखा में जरूर आना चाहिए. इससे उनका आत्‍मबल बढ़ेगा. वे शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनेंगे. उन्‍होंने चेताया कि शाखा में टिकट पाने की लालसा से आने वाले इससे दूर रहें. यहां कोई लोभ-लालच सिद्ध नहीं होगा. किसी पद की चाह में संघ से जुड़ने वालों के लिए आरएसएस में कोई जगह नहीं है. संघ में कुछ लेने नहीं कुछ देने आएं. उन्होंने कहा कि भारत को विश्‍वगुरु बनाना सबका ध्‍येय होना चाहिए. भागवत ने कहा कि राष्ट्रवाद जैसे शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि इसका मतलब नाजी या हिटलर से निकाला जा सकता है, ऐसे में राष्ट्र या राष्ट्रीय जैसे शब्दों को ही प्रमुखता से इस्तेमाल करना चाहिए. उन्होंने कहा कि दुनिया के सामने इस वक्त आईएसआईएस, कट्टरपंथ और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे बड़ी चुनौती हैं. 

मोहन भागवत ने कहा कि विश्व में फैलती कट्टरता विश्व शांति के लिए घातक है. हिंदू चिंतन में ही वैश्विक शांति का भाव है. संघ प्रमुख ने स्वयंसेवकों, भाजपा के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदुत्व के भाव से राष्ट्रीय भावना को प्रबल करते हुए एक समतामूलक और शोषणरहित समाज की स्थापना ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का उद्देश्य है. उन्होंने कहा कि संघ की नीतियां और कार्यपद्धति समाज के लिए अनुकरणीय है. इसका यह अर्थ नहीं कि संघ सभी मामलों में हस्तक्षेप करता है. ऐसा लोग कहते हैं, इमरान खान भी कहते हैं, लेकिन स्वयंसेवक अपने उद्देश्य के प्रति संकल्पित है. उन्होंने कहा देश की जटिलताओं को दूर करने के लिए हिंदू समाज को पहल करनी होगी. जब हिंदू समाज संगठित होगा तो स्वभाविक रूप से उसका प्रभाव उन धार्मिक समुदायों पर होगा जो राष्ट्र कि मुख्यधारा से अलग होकर धार्मिक संबंध में सोचते हैं और कार्य करते हैं. 

मोहन भागवत ने स्वयंसेवकों से अपील की कि अपनी संस्कृति पर गर्व करें

उन्होंने कहा कि मोहन भागवत ने आज वो काम किया है जो भारत के समाजशास्त्री को करना चाहिए था. भारतीय समाज में नेशनलिज्म की अवधारणा थी ही नहीं, हमलोग सभ्यताया समाज की अवधारणा में जीते थे जिसमें संस्कृति, सभ्यता, सामाजिक जीवन का महत्व था. मोहन भागवत ने स्वयंसेवकों से अपील की कि अपनी संस्कृति पर गर्व करते हुए देश को परम वैभव तक पहुंचाने के लिए काम करें. भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए संघ सभी लोगों को साथ लेकर चलता है. स्वयंसेवक समाज में एक आदर्श पेश करें. संघ की नित्य शाखा से ही वे समाज का आदर्श बन सकते हैं. उन्होंने कहा कि संघ के भाषणों से ही भारत विश्वगुरु बनेगा ऐसा नहीं है. शाखा की नित्य साधना को व्यवहार में उतारना होगा.

मोहन भागवत ने कहा कि जब आप राष्ट्र निर्माण का काम करेंगे तो न तो कोई आपको धन्यवाद देगा, न ही आभार प्रकट करेगा. देश हमें सब कुछ देता है. हम भी तो देश को कुछ दें. देश को कुछ देना सीखें. उन्होंने कहा कि समाज में कोई भी आपत्ति-विपत्ति आये, संघ के स्वयंसेवकों को दौड़कर आगे आना चाहिए. हमारा समाज संपूर्ण विश्व को कुटुंब मानता है, इस धारणा को समाज में स्थापित करना होगा. सरसंघचालक के संबोधन से पहले स्वयंसेवकों ने योग व्यायाम, दंड प्रहार, सूर्य नमस्कार आदि का प्रदर्शन किया. इस दौरान प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, रांची के सांसद संजय सेठ समेत कई भाजपा के कई नेता पूर्ण गणवेश में मौजूद थे. 

इस कार्यक्रम के बाद झारखंड और बिहार के तीनों प्रांतों के अधिकारियों के साथ अलग-अलग विषयों पर चर्चा किया. इसमें पर्यावरण संरक्षण, ग्राम विकास, गो संवर्धन, सामाजिक समरसता तथा संयुक्‍त परिवार प्रबोधन विषय मुख्य रहे. वैसे देश एवं राज्य की वर्तमान स्थिति पर भी इस बैठक में चर्चा होगी. संघ प्रमुख रांची में रहकर अलग-अलग विषयों पर संघ प्रमुख संघ के अधिकारियों के साथ चर्चा करेंगे. इसमें पर्यावरण संरक्षण का विषय सबसे महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने का नतीजा चीन में कोरोना वायरस के रूप में दिख रहा है. संघ पर्यावरण संरक्षण को बढावा देने पर सालोभर काम करता है. बैठक में इस कार्य में और तेजी लाने पर चर्चा होगी. बैठक में संयुक्‍त परिवार और सामाजिक समरसता विषय पर भी चर्चा होगी. 23 फरवरी की शाम वह रांची से देवघर के लिए रवाना हो जाएंगे

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