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राम जेठमलानी का निधन: वाजपेयी सरकार में रहे कानून मंत्री, फिर लखनऊ से लड़ा अटल के खिलाफ लोकसभा चुनाव

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: September 8, 2019 10:45 IST

लोकसभा चुनाव 2014 से पहले उनके संबंध बीजेपी से फिर खराब हो गए थे। भाजपा से निष्कासित किये जाने पर जेठमलानी ने 2013 में पार्टी के विरुद्ध मुकदमा दायर किया था। उन्होंने नुकसान की भरपाई के तौर पर 50 लाख रुपये मांगे भी थे।

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ठळक मुद्देएक वकील के तौर पर उन्होंने सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में अमित शाह की पैरवी भी की।2016 में जेठमलानी लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी के कोटे से राज्यसभा में गए। 

जाने माने वकील राम जेठमलानी का रविवार को निधन हो गया। वह 95 वर्ष के थे। उनके पुत्र महेश जेठमलानी ने बताया कि जेठमलानी ने नयी दिल्ली में अपने आधिकारिक आवास में सुबह पौने आठ बजे अंतिम सांस ली। 

महेश और उनके अन्य निकट संबंधियों ने बताया कि उनकी तबियत कुछ महीनों से ठीक नहीं थी। उनके बेटे ने बताया कि कुछ दिन बाद 14 सितंबर को राम जेठमलानी का 96वां जन्मदिन आने वाला था। महेश ने बताया कि उनके पिता का अंतिम सरकार यहां लोधी रोड स्थित शवदाहगृह में शाम को किया जाएगा। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम जेठमलानी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि देश ने असाधारण प्रतिभा के धनी वकील और एक प्रतिष्ठित शख्स को खो दिया जिसने अदालतों और संसद में काफी योगदान दिया। मोदी ने कहा कि जेठमलानी ‘‘हाजिरजवाब, साहसी और किसी भी विषय पर खुद को निडरतापूर्वक अभिव्यक्त करने से न हिचकने वाले व्यक्ति थे।’’ 

दिग्गज वकील होने के साथ-साथ ही जेठमलानी राजनीति में काफी सक्रिय रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से उनका गहरा नाता रहा है। 

1998 में एनडीए की सरकार में वे अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में मंत्री रह चुके हैं। हालांकि, उन्हें कैबिनेट से निकाल दिया गया था।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लालकृष्ण आडवाणी से नजदीकी के चलते उन्हें वाजेपयी कैबिनेट में शामिल किया गया था।

अटल जेठमलानी को ज्यादा पसंद नहीं करते थे। पूर्व पीएम वाजपेयी उन्हें अपनी कैबिनेट में शामिल नहीं करना चाहते थे। हालांकि 1999 में जेठमलानी को कानून मंत्री बनाया गया। लेकिन कुछ महीनों बाद ही  भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश और अटॉर्नी-जनरल से विवादों के चलते उन्हें मंत्रिमंडल से हटा दिया गया। उनकी जगह वाजपेयी सरकार में दिवंगत बीजेपी नेता अरुण जेटली ने ली थी।

कैबिनेट से निकाले जाने के बाद जेठमलानी इतने खफा हुए कि उन्होंने लोकसभा चुनाव 2004 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी के खिलाफ लखनऊ से चुनाव लड़ा। निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उतरे जेठमलानी को सिर्फ 57000 वोट मिले।

बीजेपी में अटल बिहारी वाजपेयी से सक्रिय नहीं रहने के दौरान वह वर्तमान गृह मंत्री अमित शाह से मिले। एक वकील के तौर पर उन्होंने सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में अमित शाह की पैरवी भी की।

लोकसभा चुनाव 2014 से पहले उनके संबंध बीजेपी से फिर खराब हो गए थे। भाजपा से निष्कासित किये जाने पर जेठमलानी ने 2013 में पार्टी के विरुद्ध मुकदमा दायर किया था। उन्होंने नुकसान की भरपाई के तौर पर 50 लाख रुपये मांगे भी थे। हालांकि इस मामले में उनका बीजेपी से कोर्ट के बाहर हो गया।

2016 में जेठमलानी लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी के कोटे से राज्यसभा में गए। 

टॅग्स :राम जेठमलानीअटल बिहारी वाजपेयीलखनऊ
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