बिहार के 20,000 से अधिक जन प्रतिनिधियों को राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद के द्वारा दिया गया ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली के प्रावधानों के अनुपालन हेतु प्रशिक्षण

By एस पी सिन्हा | Updated: May 7, 2026 19:05 IST2026-05-07T19:05:30+5:302026-05-07T19:05:35+5:30

जारी आदेश में कहा गया है कि इन नियमों का पालन न करना केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं माना जायेगा बल्कि तीन स्तरों पर प्रवर्तन हेतु किए गए प्रावधान के अंतर्गत जो पदाधिकारी अपने कत्र्तव्यों का पालन नहीं करेंगे, उन पर मुकदमा भी चलाया जा सकता है। 

Over 20,000 public representatives in Bihar received training from the State Pollution Control Board on compliance with the provisions of the Solid Waste Management Rules | बिहार के 20,000 से अधिक जन प्रतिनिधियों को राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद के द्वारा दिया गया ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली के प्रावधानों के अनुपालन हेतु प्रशिक्षण

बिहार के 20,000 से अधिक जन प्रतिनिधियों को राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद के द्वारा दिया गया ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली के प्रावधानों के अनुपालन हेतु प्रशिक्षण

पटना: राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली, 2026 के कार्यान्वयन हेतु सभी हितधारकों के लिए एक जारी किए गए विस्तृत निर्देश के आलोक में 20,000 से अधिक जन प्रतिनिधिगण, सभी जिला पदाधिकारी, जिला समन्वयक, प्रखंड समन्वयक तथा प्रखंड स्तर के पंचायती राज पदाधिकारीगण तथा पंचायत स्तर के पदाधिकारियों एवं कर्मियों को प्रशिक्षण जारी किया गया। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली, 2026 के कार्यान्वयन का सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भी लगातार अनुश्रवण किया जा रहा है। जारी आदेश में कहा गया है कि इन नियमों का पालन न करना केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं माना जायेगा बल्कि तीन स्तरों पर प्रवर्तन हेतु किए गए प्रावधान के अंतर्गत जो पदाधिकारी अपने कत्र्तव्यों का पालन नहीं करेंगे, उन पर मुकदमा भी चलाया जा सकता है। 

ज्ञात हो कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 27 जनवरी, 2026 को ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए 2016 से लागू नियमावली के स्थान पर ‘ठोस अपश्ष्टि प्रबंधन नियमावली, 2026’ अधिसूचित किया गया है, जो पूरे देश में 1 अप्रैल, 2026 से   प्रभावी है। उपर्युक्त नियमावली के अक्षरशः अनुपालन के लिए बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् विभिन्न हितधारकों यथा- नगर विकास एवं आवास विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, पंचायती राज विभाग, एवं जिला पदाधिकारी, बिहार के सहयोग से दिनांक 15 अप्रैल से 7 मई 2026 तक माननीय मुखियागण, सभी जिला पदाधिकारी, पंचायत स्तर के पदाधिकारीगण, कर्मीगण यथा- पंचायत सचिव, पंचायत सहायक इत्यादि तथा प्रखंड स्तर के पंचायती राज पदाधिकारीगण के लिए 12 चरणों में आनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया गया। 

गुरुवार को इस श्रंखला के 12वें तथा समापन सत्र में पूर्वी चम्पारण, पश्चिमी चम्पारण तथा शिवहर जिलों के लिए प्रशिक्षण आयोजित किया। नई नियमावली के प्रमुख बिन्दु में 1.कचरे को चार श्रेणियों में अलग करना, 2. खुले में कचरा फेकने अथवा जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना, 3. गीले कचरे का स्थल पर ही प्रसंस्करण करना, 4. उपभोक्ता शुल्क निर्धारण व वसूली करना, 5. बड़े कचरा उत्पन्नकत्र्ता द्वारा जिम्मेदारी का अनुपालन, 6.    पंचायत स्तर पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए आधारभूत संरचना का आकलन करना और कचरा पृथक्करण की शिक्षा के लिए प्रमुख सुविधाकर्ता शामिल है।

प्रषिक्षण के 12वें व अंतिम सत्र का उद्घाटन करते हुए अध्यक्ष, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् डा. शुक्ला ने अपने संबोधन में कहा कि इस नियमावली की मूल अवधारणा चक्रीय अर्थव्यवस्था को सुढृढ़ करना है। देश के सीमित संसाधनों का पुनःचक्रण, पुर्नउपयोग कर इन्हे फिर से उपयोग में लाया जाना है ताकि हमारे संसाधनों का ह्रास न हो। उन्होंने कहा कि कचरों के बड़े उत्पादनकत्र्ताओं यथा- संस्थान, माॅल, एपार्टमेंट आदि पर अपने कचरों के निष्पादन की जिम्मेवारी होगी। यदि वे अपने कचरों का निस्तारण स्वयं नहीं कर सकते हंै तो उन्हें स्थानीय निकाय द्वारा ई.पी.आर. प्रमाण पत्र प्राप्त करना होगा। 

दरअसल सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या. 6174ध् 2023 में दिनांक 5 मई, 2026 को जारी आदेश में कहा गया है कि जिला पदाधिकारी को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत विशेष अधिकार दिये जा रहे हैं, जिसके द्वारा नियमावली के प्रावधानों का अनुपालन नहीं करने वालों पर मुकदमा चलाया जा सकता है साथ ही उनके अधीन एक ‘विशेष कोषांग’ होगा जो अपने क्षेत्र में कचरों का जनन कहां-कहां हो रहा है तथा इन्हें कहां डम्प किया जा रहा है। 

इन सब आंकड़ों का संकलन कर वे मुख्यालय भेजेंगे जहां से सर्वोच्च न्यायालय को भेजा जायेगा। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् के सदस्य-सचिव, नीरज नारायण, भावसे द्वारा इस प्रशिक्षण में शामिल निदेशक, पंचायती राज विभाग तथा प्रखंड, पंचायत स्तर के पदाधिकारीगण, मुखियागण तथा सभी तकनीकी पदाधिकारियों, कर्मचारीगण को संबोधित करते हुए बताया गया कि सर्वोच्चय न्यायालय द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली के प्रावधानों का अनुपालन बाध्यकारी है। इसका अनुपालन नहीं करने वालो पर जुर्माना एवं मुकदमा भी चलाया जा सकेगा। 

उन्होंने प्रशिक्षण में शामिल सभी स्तर के पदाधिकारियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि अध्यक्ष, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् की दूरदर्शिता एवं स-समय कार्रवाई के फलस्वरूप आज इस नियमावली के अनुपालन में लगे करीब 20,000 से अधिक प्रशिक्षुओं जैसे- राज्य के सभी जिलों के जिला पदाधिकारी, जन प्रतिनिधिगण, प्रखंड स्तर के पंचायती राज पदाधिकारीगण, पंचायत स्तर के पदाधिकारीगण जिला समन्वयक, प्रखंड समन्वयक इत्यादि द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त किया गया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी के सामूहिक प्रयास से आने वाले दिनों में बिहार राज्य ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में गिना जाएगा। आनलाईन प्रशिक्षण राज्य पर्षद् के वैज्ञानिक नलिनी मोहन सिंह द्वारा दिया गया।

Web Title: Over 20,000 public representatives in Bihar received training from the State Pollution Control Board on compliance with the provisions of the Solid Waste Management Rules

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