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कश्मीर में तेजी से बढ़ रही है आत्महत्या करने वालों की संख्या, हुई 16 गुणा वृद्धि, इसमें सैनिक भी शामिल

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: September 9, 2023 16:32 IST

आंकड़े कहते हैं कि कश्मीर में आत्महत्या और आत्महत्या के प्रयासों की दर एक लाख के पीछे 0.5 से बढ़ कर अब एक लाख के पीछे 13 हो चुकी है। रिपोर्ट के बकौल आत्महत्या करने वालों की संख्या में 16 गुणा वृद्धि हुई है।

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ठळक मुद्देकश्मीर फिर से आत्महत्याओं की वादी बनने लगा हैआत्महत्या करने वाले सिर्फ कश्मीरी ही नहीं हैं बल्कि सैनिक भी हैंआत्महत्या करने वालों की संख्या में 16 गुणा वृद्धि हुई है

जम्मू: यह सबके लिए चिंता का विषय हो सकता है कि धरती का स्वर्ग कश्मीर फिर से आत्महत्याओं की वादी बनने लगा है। ऐसा होने के पीछे कई कारण हैं। आत्महत्या करने वाले सिर्फ कश्मीरी ही नहीं हैं बल्कि सैनिक भी हैं। अगर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट पर एक नजर डालें तो पांव के नीचे से जमीन खिसक सकती है क्योंकि वह कहती है कि कश्मीर में आतंकवाद और सड़क हदसों के बाद आत्महत्या से अधिक मौतें हो रही हैं।

इस रिपोर्ट के बकौल आत्महत्या करने वालों की संख्या में 16 गुणा वृद्धि हुई है तो मेडिसीन सैन्स फ्रंटियर की स्टडी का कहना है कि कश्मीर में आत्महत्याओं के कारण मृत्युदर 400 परसेंट की दर से बढ़ रही है। अगर आंकड़ों पर जाएं तो कश्मीर में वर्ष 2021 में 586 लोगों ने आत्महत्या की कोशिशें की थीं। तब जम्मू संभाग में यह आंकड़ा सिर्फ 20 था। जबकि कश्मीर में वर्ष 2021 में ज्यादातर पुरूषों ने इस कदम को उठाया था जिनका प्रतिशत 73 था।  27 प्रतिशत महिलाओं ने इतने भयानक कदम को उठाया था। जबकि वर्ष 2020 में यह अनुपात 71:29 का था।

आंकड़े कहते हैं कि कश्मीर में वर्ष 2020 में बारामुल्ला जिला ऐसे हादसों में सबसे आगे था जहां 73 मामले सामने आए थे तो दूसरे स्थान पर अनंतनाग था जहां 67 मामलों में कश्मीरियों ने मौत को गले लगाने का प्रयास किया था। जबकि श्रीनगर में 51 मामले हुए थे। आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले भी कश्मीर में हो रहे हैं। वर्ष 2021 में अगर ऐसे मामले 41 थे तो वर्ष 2020 में यह संख्या 35 थी। जबकि कोरोनाकाल में वर्ष 2020 में आत्महत्या के 450 मामले समने आए थे जो एक दशक में सबसे ज्यादा थे। स्टडी और रिपोर्ट के बकौल, जम्मू कश्मीर में वर्ष 2017 में आत्महत्या और आत्महत्या के प्रयासों की संख्या 287 थी और 2018 में बढ़ कर यह 330 हो गई। हालंकि वर्ष 2019 में इसमे मामूली सुधार हुआ जब  284 मामले सामने आए।

आंकड़े कहते हैं कि कश्मीर में आत्महत्या और आत्महत्या के प्रयासों की दर एक लाख के पीछे 0.5 से बढ़ कर अब एक लाख के पीछे 13 हो चुकी है। जबकि देशभर में ऐसे मामलों की दर 10.2 परसेंट थी जबकि कश्मीर में यह 10.3 परसेंट थी। आंकड़े कहते हैं कि वर्ष 2010 से लेकर 2020 तक कश्मीर में 3024 आत्महत्या के मामले सामने आए थे। इन आंकड़ों में सेना, बीएसएफ या सीआरपीएफ के जवानों द्वारा कश्मीर में तैनाती के दौरान की जाने वाली आत्महत्याओं के आंकड़े शामिल नहीं हैं।

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