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एनआरसी पर बोले सोनोवाल, किसी को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, घबराने की जरूरत नहीं है

By भाषा | Updated: August 30, 2019 12:44 IST

‘‘किसी को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार सभी का ध्यान रखेगी। अंतिम सूची से जिनका नाम बाहर रखा जाएगा, उन्हें भी अपनी नागरिकता साबित करने का पूरा अवसर मिलेगा।’’

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ठळक मुद्देसोनोवाल ने इन लोगों को कानूनी सहायता मुहैया कराने का भी आश्वासन दिया।उन्होंने यह भी कहा कि शनिवार को प्रकाशित होने वाली एनआरसी की अंतिम सूची से यदि किसी का नाम बाहर रह जाता है।

राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) की अंतिम सूची के प्रकाशन से पहले असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शुक्रवार को लोगों से कहा कि वे घबराएं नहीं राज्य सरकार अपनी नागरिकता साबित करने में उन लोगों को मदद करने के लिए हरसंभव कदम उठाएगी जो वास्तव में भारतीय हैं।

सोनोवाल ने इन लोगों को कानूनी सहायता मुहैया कराने का भी आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी कहा कि शनिवार को प्रकाशित होने वाली एनआरसी की अंतिम सूची से यदि किसी का नाम बाहर रह जाता है, तो इसका यह अर्थ नहीं है कि वह विदेशी बन गया है क्योंकि उचित कानूनी प्रक्रिया के बाद विदेशी न्यायाधिकरण (एफटी) ही इस संबंध में निर्णय ले सकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘किसी को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार सभी का ध्यान रखेगी। अंतिम सूची से जिनका नाम बाहर रखा जाएगा, उन्हें भी अपनी नागरिकता साबित करने का पूरा अवसर मिलेगा।’’

जब मसौदा एनआरसी का पिछले साल 30 जुलाई को प्रकाशन हुआ था, तब उसमें से 40.7 लाख लोगों को सूची से बाहर रखे जाने पर खासा विवाद हुआ था। मसौदा में 3.29 करोड़ आवेदकों में से से 2.9 करोड़ लोगों के ही नाम शामिल थे। जिन लोगों को सूची से बाहर रखा गया था, उनके अलावा पिछले महीने प्रकाशित एक सूची में एक लाख से अधिक लोगों के नाम बाहर रखे गए थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल कोई विदेशी न्यायाधिकरण ही उचित कानूनी प्रक्रिया के बाद किसी व्यक्ति को विदेशी घोषित कर सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘एनआरसी से नाम बाहर रखे जाने का यह मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति अपने आप ही विदेशी बन जाएगा।

केवल विदेशी न्यायाधिकरण के पास ही किसी व्यक्ति को विदेशी घोषित करने का अधिकार है, किसी और के पास यह अधिकार नहीं है। यदि किसी को विदेशी घोषित कर भी दिया जाता है, तो भी वह व्यक्ति विदेशी न्यायाधिकरण के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकता है और यदि वह तब भी संतुष्ट न हो, तो वह उच्चम न्यायालय का रुख कर सकता है।’’

सोनोवाल ने लोगों को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार एनआरसी से नाम बाहर रखे जाने के खिलाफ लड़ाई में गरीब लोगों को कानूनी सहायता मुहैया कराएगी ताकि वे विदेशी न्यायाधिकरण और ऊपरी अदालतों में अपना मामला रख सकें।

उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र सरकार ने विदेशी न्यायाधिकरण में अपील के लिए अवधि पहले ही बढ़ाकर 60 दिन से 120 दिन कर दिया हैं। मैं सभी से अपील करूंगा कि वे एनआरसी की अंतिम सूची के शांतिपूर्ण प्रकाशन में पूरे दिल से सहयोग करें।’’

शांति सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे सुरक्षा कदमों के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने पर्याप्त अर्द्धसैनिक बल मुहैया कराए हैं जो राज्य प्रशासन की सहायता कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमने हर जिले में पुलिस अधीक्षकों एवं उपायुक्तों को निर्देश दिए हैं कि वे अतिरिक्त रूप से सतर्क रहें और सुनिश्चित करें कि कहीं भी किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना नहीं हो।

लोगों को चिंता करने या डरने की आवश्कयता नहीं है।’’ सोनोवाल ने 19 अगस्त को संकेत दिया था कि सरकार एनआरसी की अंतिम सूची के प्रकाशन के बाद कुछ लोगों के नाम गलत तरीके से शामिल करने या निकाले जाने से निपटने के लिए कानूनी विकल्पों पर विचार कर सकती है।

उच्चतम न्यायालय ने एनआरसी में नामों को गलत तरीके से शामिल किए जाने या निकाले जाने का पता लगाने के लिए नमूनों की पुन: पुष्टि संबंधी केंद्र सरकार और असम सरकार की याचिका खारिज कर दी थी। 

टॅग्स :एनआरसीअसमअमित शाहसर्बानंद सोनोवाल
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