साल भर में 282 करोड़ रुपये बढ़ गई नए संसद भवन की निर्माण लागत, 29 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ अब 1250 करोड़ रुपये होगा खर्च

By विशाल कुमार | Published: January 21, 2022 07:40 AM2022-01-21T07:40:20+5:302022-01-21T07:43:35+5:30

नये संसद भवन के निर्माण का ठेका टाटा प्रोजेक्ट्स को 917 करोड़ रुपये में दिया गया था। हालांकि उसमें 29 फीसदी की बढ़ोतरी के बाद परियोजना की कुल लागत 1250 करोड़ रुपये हो जाने की उम्मीद है।

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साल भर में 282 करोड़ रुपये बढ़ गई नए संसद भवन की निर्माण लागत, 29 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ अब 1250 करोड़ रुपये होगा खर्च

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Highlightsनये संसद भवन के निर्माण की अनुमानित लागत में 282 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हो गई है।नये संसद भवन के निर्माण का ठेका टाटा प्रोजेक्ट्स को 917 करोड़ रुपये में दिया गया था।29 फीसदी की बढ़ोतरी के बाद परियोजना की कुल लागत 1250 करोड़ रुपये हो जाने की उम्मीद है।

नई दिल्ली: नये संसद भवन के निर्माण की अनुमानित लागत में एक साल में ही 282 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हो गई है। सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, नये संसद भवन के निर्माण का ठेका टाटा प्रोजेक्ट्स को 917 करोड़ रुपये में दिया गया था। हालांकि, उसमें 29 फीसदी की बढ़ोतरी के बाद परियोजना की कुल लागत 1250 करोड़ रुपये हो जाने की उम्मीद है।

सूत्रों ने इसकी वजह इस्पात, इलेक्ट्रॉनिक्स और जरूरत के अन्य सामान व कार्यों का खर्च बढ़ जाना बताया है। उन्होंने बताया कि लोकसभा सचिवालय इस सिलसिले में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) को मंजूरी दे सकता है।

सूत्रों ने बताया कि इस महीने की शुरुआत में सीपीडब्ल्यूडी ने लागत में वृद्धि को सैद्धांतिक मंजूरी देने का लोकसभा सचिवालय से अनुरोध किया था। इस परियोजना के क्रियान्वयन का जिम्मा सीपीडब्ल्यूडी के पास है।

इस भवन के निर्माण कार्य को इस साल अक्टूबर महीने तक पूरा कर लेने का लक्ष्य रखा गया है। कोशिश है कि संसद का शीतकालीन सत्र नये संसद भवन में हो।

सूत्रों ने बताया कि सीपीडब्ल्यूडी ने निर्माण लागत में वृद्धि की वजह इस्पात की खरीद में होने वाली अत्यधिक लागत को बताया है क्योंकि इसे भूकंप रोधी नियमों के अनुरूप बनाया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक सीपीडब्ल्यूडी ने कहा है कि इलेक्ट्रॉनिक्स पर खर्च इसलिए बढ़ गया है क्योंकि अत्याधुनिक ऑडियो-विजुअल सिस्टम लगाए जाने हैं जिनमें दोनों सदनों में सांसदों के बैठने के स्थान पर टैबलेट रखा जाना शामिल है।

सूत्रों का कहना है कि इसी प्रकार बैठक कक्षों और मंत्रियों के कमरों में उच्च गुणवत्ता वाले प्रौद्योगिकीय उपकरणों को लगाए जाने पर विचार किया जा रहा है।

लागत में वृद्धि का एक अन्य कारण यह भी बताया गया है कि परियोजना को क्रियान्वित करने में उच्चतम न्यायालय के विभिन्न निर्देशों का भी पालन करना पड़ रहा है। 

मसलन, परियोजना स्थल से खुदाई की गई मिट्टी को बेचना नहीं है बल्कि उसे बदरपुर में प्रस्तावित इको पार्क में हस्तांतरित करने का शीर्ष अदालत का निर्देश है।

एक सूत्र ने कहा, ‘‘लोकसभा सचिवालय को इस परियोजना की लागत में वृद्धि को मंजूरी देने के अनुरोध संबंधी प्रस्ताव मिला है और इसे मंजूरी मिल सकती है।’’

बता दें कि, पुराने संसद भवन का निर्माण 94 साल पहले लगभग 83 लाख रुपये में किया गया था। नए भवन के निर्माण के बाद पुराने भवन को संग्रहालय में तब्दील कर दिया जाएगा।

नए संसद भवन में लोकसभा और राज्यसभा के कक्ष बड़े होंगे, जिसमें लोकसभा के लिये 888 जबकि राज्यसभा के लिये 384 सीटों की व्यवस्था होगी। संयुक्त सत्र बुलाने के लिये लोकसभा कक्ष में 1,272 सीटों की व्यवस्था होगी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 10 दिसंबर को इस परियोजना की आधारशिला रखी थी। भवन का निर्माण टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के तहत किया जा रहा है और इसका 40 फीसदी काम पूरा हो चुका है।

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