Nearly 3 thousand incidents of stubble burning were reported in Haryana and Punjab this year cpcb | सीपीसीबी रिपोर्ट में दावा- हरियाणा और पंजाब में इस साल पराली जलाने की करीब 3 हजार घटनाएं सामने आईं
सीपीसीबी रिपोर्ट में दावा- हरियाणा और पंजाब में इस साल पराली जलाने की करीब 3 हजार घटनाएं सामने आईं

Highlights प्रदूषण के स्रोतों का पता लगाने के लिए इस वर्ष सीपीसीबी ने तीन नये शहरों सोनीपत, मेरठ और रोहतक में टीम भेजी है। सीपीसीबी के आंकड़े के मुताबिक, ‘‘हरियाणा में 2019 में पराली जलाने की 1631 घटनाएं हुई हैं जबकि पंजाब में अभी तक ऐसे 1571 मामले रिकॉर्ड किए गए।’’

हरियाणा और पंजाब में इस वर्ष पराली जलाने की करीब तीन हजार घटनाएं हुईं और सबसे ज्यादा घटनाएं अमृतसर, तरनतारन, पटियाला, करनाल, कैथल और कुरुक्षेत्र में हुईं। यह जानकारी शुक्रवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दी। सीपीसीबी आंकड़ों के मुताबिक हरियाणा और पंजाब में 2019 में पराली जलाने के कुल 3202 मामले सामने आए जबकि 2018 में ऐसी 2544 घटनाएं हुई थीं।

सीपीसीबी के आंकड़े के मुताबिक, ‘‘हरियाणा में 2019 में पराली जलाने की 1631 घटनाएं हुई हैं जबकि पंजाब में अभी तक ऐसे 1571 मामले रिकॉर्ड किए गए।’’ पराली जलाने से राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण काफी बढ़ जाता है। सीपीसीबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली में करीब सात फीसदी प्रदूषण पराली जलाने से होता है। उन्होंने कहा, ‘‘हवा की गति और दिशा को देखते हुए आगामी दिनों में प्रदूषण बढ़ सकता है।’’

सीपीसीबी ने कहा कि सोनीपत, मेरठ और रोहतक में प्रदूषण के बड़े कारक क्रमश: धूल, औद्योगिक कचरे का निपटारा और निर्माण गतिविधियां हैं। प्रदूषण निरोधक शीर्ष निकाय ने दिल्ली- एनसीआर के गाजियाबाद, नोएडा, गुड़गांव, फरीदाबाद, सोनीपत, मेरठ और रोहतक में प्रदूषण के स्रोतों का पता लगाने के लिए 46 टीमों की तैनाती की है। प्रदूषण के स्रोतों का पता लगाने के लिए इस वर्ष सीपीसीबी ने तीन नये शहरों सोनीपत, मेरठ और रोहतक में टीम भेजी है।

सीपीसीबी के प्रस्तुतीकरण में कहा गया है, ‘‘मेरठ में प्रदूषण के सबसे बड़े स्रोत सड़क की धूल और खुले में कचरे का निपटारा करना है। सोनीपत में प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत औद्योगिक कचरे का निपटारा करना और निर्माण गतिविधियां हैं जबकि रोहतक में प्रदूषण का बड़ा स्रोत निर्माण गतिविधि और सड़क की धूल है।’’ 


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