Maharashtra Municipal Election 2026: महाराष्ट्र में निकाय चुनाव की वोटिंग, मुंबई में टिकी सबकी निगाहें
By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 15, 2026 05:49 IST2026-01-15T05:49:21+5:302026-01-15T05:49:21+5:30
Maharashtra Municipal Election 2026:महाराष्ट्र में बीजेपी के नेतृत्व वाला महायुति गठबंधन, पैसे वाली BMC पर कंट्रोल के लिए ठाकरे गुट के साथ मुकाबले में है।

Maharashtra Municipal Election 2026: महाराष्ट्र में निकाय चुनाव की वोटिंग, मुंबई में टिकी सबकी निगाहें
Maharashtra Municipal Election 2026: महाराष्ट्र में 29 नगर निकायों के चुनाव के लिए आज 15 जनवरी को मतदान हो रहा है और सबकी नजर मुंबई पर टिकी है, जहां आर्थिक रूप से समृद्ध बीएमसी पर शासन को लेकर भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन महायुति और ठाकरे बंधुओं के मोर्चे के बीच दिलचस्प मुकाबला होने की उम्मीद जताई जा रही है। महाराष्ट्र के नगर निकायों की 2,869 सीट के लिए 15 जनवरी को सुबह 7:30 बजे मतदान शुरू हुआ है और शाम 5:30 बजे समाप्त होगा।
कुल 3.48 करोड़ मतदाता 15,931 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे, जिनमें मुंबई के 1,700 और पुणे के 1,166 प्रत्याशी शामिल हैं। मतगणना 16 जनवरी को होगी।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अनुमान जताया है कि शिवसेना (उबाठा) के प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ गठबंधन करने वाले महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता राज ठाकरे सबसे ज्यादा नुकसान में रहेंगे। उन्होंने पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के दोनों गुटों के एक साथ आने को भी केवल एक स्थानीय घटनाक्रम करार दिया।
फडणवीस ने यह भी कहा कि उपमुख्यमंत्री और राकांपा नेता अजित पवार ने एक-दूसरे के खिलाफ बयान न देने के गठबंधन सहयोगियों के नियम को तोड़ा है। मुख्यमंत्री ने महायुति के उम्मीदवारों के लिए पूरे राज्य में प्रचार किया। महायुति में भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना शामिल हैं। पर्यवेक्षकों के अनुसार, महायुति के तीसरे साझेदार राकांपा को रणनीतिक रूप से प्रचार से दूर रखा गया ताकि “गैर-हिंदू” मतदाताओं को आकर्षित किया जा सके। यह 2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद पहला बीएमसी चुनाव होगा। उस साल एकनाथ शिंदे पार्टी के अधिकतर विधायकों के साथ अलग हो गए थे और बाद में पार्टी का नाम व चुनाव चिह्न दोनों उन्हें मिल गए थे। अविभाजित शिवसेना ने देश के सबसे अमीर नगर निकाय बृह्नमुंबई महानरपालिका (बीएमसी) पर 25 वर्ष तक शासन किया था।
बीएमसी चुनाव और मतगणना के दौरान मुंबई में वरिष्ठ अधिकारियों समेत 25,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। चुनाव से पहले एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम के तहत, दो दशक पहले अलग हुए चचेरे भाई उद्धव और राज ठाकरे मराठी मतदाताओं को एकजुट करने के लिए फिर साथ आए, वहीं पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में राकांपा के प्रतिद्वंद्वी गुटों ने गठबंधन किया है। इस चुनाव में विपक्षी कांग्रेस ने मुंबई में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए महाविकास आघाडी (एमवीए) के अपने सहयोगियों शिवसेना (उबाठा) और शरद पवार की राकांपा (एसपी) का साथ छोड़कर अलग राह अपनाई है। कांग्रेस ने राज्य की राजधानी में प्रकाश आंबेडकर की वंचित बहुजन आघाड़ी और राष्ट्रीय समाज पक्ष से हाथ मिलाया है, जबकि नागपुर में वह अकेले चुनाव लड़ रही है। 29 नगर निगमों के चुनाव छह साल से अधिक समय के अंतराल के बाद हो रहे हैं, क्योंकि इनके कार्यकाल 2020 से 2023 के बीच समाप्त हो गए थे।
इन नगर निगमों में छत्रपति संभाजीनगर, नवी मुंबई, वसई-विरार, कल्याण-डोंबिवली, कोल्हापुर, नागपुर, मुंबई, सोलापुर, अमरावती, अकोला, नासिक, पिंपरी-चिंचवड़, पुणे, उल्हासनगर, ठाणे, चंद्रपुर, परभणि, मीरा-भायंदर, नांदेड़-वाघाला, पनवेल, भिवंडी-निजामपुर, लातूर, मालेगांव, सांगली-मिराज-कुपवाड़, जलगांव, अहिल्यानगर, धुले, जालना और इचलकरंजी शामिल हैं।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने दोनों उपमुख्यमंत्रियों एकनाथ शिंदे और अजित पवार के साथ पूरे महाराष्ट्र में व्यापक प्रचार किया, जबकि उद्धव और राज ठाकरे ने मुंबई, ठाणे, नासिक और छत्रपति संभाजीनगर में अपनी ताकत झोंकी। तेलंगाना के मंत्री मोहम्मद अजहरुद्दीन, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और तमिलनाडु भाजपा के नेता के. अन्नामलाई भी स्टार प्रचारकों में शामिल रहे। महायुति और शिवसेना (उबाठा)-मनसे दोनों के घोषणापत्रों में महिलाओं के लिए लोकलुभावन वादे प्रमुख रहे।
महायुति ने बेस्ट बस यात्रा में महिलाओं को 50 प्रतिशत रियायत देने का वादा किया है, जबकि ठाकरे बंधुओं ने घरेलू कामकाजी महिलाओं को 1,500 रुपये मासिक भत्ता और 700 वर्ग फुट तक के मकानों पर संपत्ति कर माफ करने का आश्वासन दिया है। वहीं कांग्रेस के घोषणापत्र में मुंबई के प्रदूषण से निपटना, बेस्ट बसों का उन्नयन और शहर की वित्तीय सेहत को मजबूत बनाना प्राथमिकता है। मुंबई के महापौर पद की दौड़ भी प्रचार के केंद्र में रही। भाजपा ने दावा किया कि शिवसेना (उबाठा) की जीत से मुस्लिम महापौर बन सकता है, जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने मराठी महापौर होने की बात कही। मुख्यमंत्री फडणवीस ने भी यह गारंटी दी कि महापौर “हिंदू और मराठी” होगा।
227 वार्ड वाले मुंबई में भाजपा 137, शिवसेना 90 और राकांपा 94 सीटों सीट पर चुनाव लड़ रही है। शिवसेना (उबाठा) ने 163, मनसे ने 52, कांग्रेस ने 143 और वीबीए ने 46 उम्मीदवार उतारे हैं। कांग्रेस ने राज्य के बाकी हिस्सों में कुल 1,263 उम्मीदवार खड़े किए हैं। मंगलवार को प्रचार समाप्त होने के बाद फडणवीस ने कहा कि उद्धव ठाकरे के साथ गठबंधन करने वाले राज ठाकरे सबसे ज्यादा नुकसान में रहेंगे।
पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में राकांपा के दोनों गुटों के एकजुट होने को उन्होंने “स्थानीय घटना” बताते हुए कहा कि भाजपा तभी प्रतिक्रिया देगी जब चुनाव के बाद दोनों गुट गठबंधन करेंगे और फिलहाल उन्हें यह असंभव लगता है। फडणवीस ने यह भी कहा कि ठाकरे बंधुओं ने पूरे मन से प्रचार नहीं किया और वे “अपनी राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर लगाने से हिचकते” नजर आए।
साथ ही उन्होंने कहा कि भविष्य में महाराष्ट्र की राजनीति भाजपा के इर्द-गिर्द ही घूमेगी, लेकिन यह भी माना कि चुनावी हार किसी भी पार्टी या नेता का अंत नहीं होती। उन्होंने कहा कि जो दोबारा उभरने की कोशिश करते हैं, वे फिर सफलता पा सकते हैं।