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महाराष्ट्र मंत्रिमंडलः शराब शुल्क में बढ़ोतरी, 14000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय, एससी आयोग को वैधानिक दर्जा, फिजियोथेरेपी और नर्सिंग के छात्रों के लिए वजीफे में वृद्धि

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: June 10, 2025 19:40 IST

Maharashtra Cabinet: मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि एक उच्च स्तरीय अध्ययन समूह ने अन्य राज्यों की नीतियों की पड़ताल की तथा राज्य आबकारी शुल्क, लाइसेंसिंग और कर संग्रह में सुधार के संबंध में सिफारिशें प्रस्तुत कीं।

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ठळक मुद्देफिजियोथेरेपी और नर्सिंग के छात्रों के लिए वजीफे में वृद्धि के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है।नागपुर और अहिल्यानगर जिलों में अतिरिक्त अधीक्षक स्तर के छह कार्यालय बनाने को मंजूरी दी।

मुंबईः महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने मंगलवार को आबकारी विभाग में राजस्व बढ़ाने वाले बदलावों को मंजूरी दे दी, जिसमें शराब पर शुल्क में बढ़ोतरी और नए कार्यालयों एवं पदों का सृजन शामिल है। राज्य मंत्रिमंडल ने राज्य अनुसूचित जाति (एससी) आयोग को वैधानिक दर्जा देने तथा फिजियोथेरेपी और नर्सिंग के छात्रों के लिए वजीफे में वृद्धि के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि एक उच्च स्तरीय अध्ययन समूह ने अन्य राज्यों की नीतियों की पड़ताल की तथा राज्य आबकारी शुल्क, लाइसेंसिंग और कर संग्रह में सुधार के संबंध में सिफारिशें प्रस्तुत कीं।

सीएमओ ने कहा कि मंत्रिमंडल ने विभाग के पुनर्गठन, शराब उत्पादन इकाई, ‘बॉटलिंग प्लांट’ और थोक लाइसेंस की एआई-आधारित निगरानी के साथ एक एकीकृत नियंत्रण प्रकोष्ठ की स्थापना तथा मुंबई में एक नया संभागीय कार्यालय बनाने के साथ-साथ मुंबई शहर, मुंबई उपनगरों, ठाणे, पुणे, नासिक, नागपुर और अहिल्यानगर जिलों में अतिरिक्त अधीक्षक स्तर के छह कार्यालय बनाने को मंजूरी दी।

राज्य ने एक नई श्रेणी भी शुरू की है, अनाज आधारित महाराष्ट्र निर्मित शराब (एमएमएल) जिसका उत्पादन विशेष रूप से स्थानीय निर्माताओं द्वारा किया जाएगा। एमएमएल ब्रांड को नए पंजीकरण की आवश्यकता होगी। विज्ञप्ति में कहा गया है कि इन उपायों से आबकारी शुल्क और संबंधित करों से सालाना 14,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने महाराष्ट्र राज्य अनुसूचित जाति आयोग को वैधानिक दर्जा देने के लिए मसौदा विधेयक को मंजूरी दे दी। यह विधेयक राज्य विधानमंडल के आगामी सत्र में पेश किया जाएगा। आयोग की स्थापना मूल रूप से 2005 में सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को कायम रखने के लिए की गई थी।

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