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बिहार में NDA के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी LJP या अकेले, पार्टी की बैठक में आज फैसला! चिराग पासवान के तेवर तल्ख

By विनीत कुमार | Updated: September 7, 2020 10:08 IST

बिहार विधानसभा चुनाव-2020 में एलजेपी चिराग पासवान के नेतृत्व में अकेले मैदान में उतर सकती है। चिराग पासवान के लगातार तल्ख अंदाज इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं। इस संबंध में आज एलजेपी की अहम बैठक भी है।

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ठळक मुद्देबिहार चुनाव में NDA से अलग होकर चुनाव लड़ सकती है लोक जनशक्ति पार्टीनीतीश कुमार पर लगातार हमलावर हैं चिराग पासवान, दलितों के मुद्दे पर मुख्यमंत्री को घेरा

बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी जारी है। इस बीच आज इस बात का फैसला हो सकता है कि लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) चुनाव में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के साथ उतरेगी या फिर किसी और रास्ते पर चलेगी। एलजीपी की कमान अभी राम विलास पासवान के बेटे चिराग पासवान के हाथ में है।

पार्टी की अहम बैठक से पहले चिराग पासवान ने रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र भी लिखा और पिछले 15 सालों में मारे गए सभी लोगों के परिवार के सदस्यों के लिए नौकरी देने की मांग की।

चिराग पासवान का ये पत्र नीतीश कुमार के हाल में उन निर्देशों के बाद आया है जिसमें उन्होंने एससी या एसटी समाज से मारे गए लोगों के परिवार के सदस्यों के लिए नौकरी का प्रावधन देने के लिए कानून बनाने की बात कही थी। पासवान ने इसी घोषणा के बाद अपने पत्र में लिखा कि जब तक पिछले 15 साल में मारे गए सभी दलितों के परिवार को नौकरी नहीं मिलती, इसे नीतीश कुमार के चुनावी स्टंट के तौर पर ही देखा जाएगा।

गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से लगातार चिराग पासवान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोलते रहे हैं। बीजेपी ने इस दौरान सुलह के भी संकेत देने की कोशिश की। बीजेपी चीफ जेपी नड्डा ने भी कहा था कि एनडीए के सभी साझेदार चुनाव में एक साथ उतरेंगे। हालांकि, चिराग पासवान पिछले कुछ दिनों से लगातार कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए बिहार सरकार के कदम, बाढ़, लॉकडाउन सहित सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते रहे हैं।

'दलितों से किया वादा नहीं निभाया गया'

चिराग पासवान ने अपनी चिट्ठी में आरोप लगाया है कि दलितों के साथ किए गए वादों को राज्य सरकार की ओर से नहीं निभाया गया है। उन्होंने लिखा, 'यह वही सरकार है जिसने सभी दलित परिवारों को तीन डिसमिल जमीन देने का वादा किया था। लेकिन सरकार के अपने वादे को पूरा नहीं करने से दलित निराश हैं। लोग मुझसे फोन करके पूछ रहे हैं कि क्या अनूसुचित जाति के लोगों की हत्या के मामले में नौकरी देने का सरकार का वादा केवल चुनावी स्टंट है।' 

चिराग ने साथ ही लिखा, 'आप पिछले 15 साल से मुख्यमंत्री हैं। आपको सभी मारे गए लोगों के परिवार के सदस्य को एक महीने में नौकरी देनी चाहिए और एससी-एसटी हत्या के मामले के जल्द निपटारे की कोशिश करनी चाहिए।'

बहरहाल, एलजेपी सूत्रों के अनुसार आज होने वाली बैठक में बिहार में चुनावी रणनीति पर फैसला किया जाएगा। पार्टी के एक सीनियर नेता ने बताया, 'हम केंद्र में बीजेपी के साथ हैं और हमें उनसे कोई समस्या नहीं है। लेकिन पिछले एक साल में सुशांत सिंह राजपूत केस के अलावा मुख्यमंत्री ने कभी चिराग पासवान से बात नहीं की है। ऐसा भी लगता है कि कुछ एंटी-इनकंबेंसी है।'

बिहार चुनाव में कैसी होगी एलजेपी की रणनीति

आज की बैठक में इसे लेकर फैसला संभव है। बताया जा रहा है कि अगर एलजेपी ने एनडीए गठबंधन के साथ जाने का फैसला अगर नहीं लिया तो पार्टी अकेले चुनाव लड़ सकती है। ऐसे में एलजेपी बीजेपी के उम्मीदवारों के सामने अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी। हालांकि, जेडीयू के खिलाफ चुनाव जरूर लड़ेगी।

एक एलजेपी नेता ने कहा, इससे सुनिश्चित होगा कि जब अगली सरकार बनेगी तो बीजेपी हमारी भी आवाज सुनने पर विचार करेगी। ये भी कहा जा रहा है कि अगर एलजेपी गठबंधन के साथ चुनावी मैदान में उतरती है तो उसे बहुत कम सीटें दी जा सकती हैं। वहीं जेडीयू सूत्र के अनुसार एलजेपी और अधिर सीटें चाहती है। बिहार में एलजेपी से अभी दो विधायक हैं। 

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