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कानूनी प्रतिबंध, मशहूर नर्मदा घाट पर सेल्फी खींची, तो जाना पड़ सकता है जेल

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: August 31, 2019 14:25 IST

खरगोन के जिलाधिकारी गोपालचंद्र डाड ने बताया, "मुझे मीडिया के जरिये पता चला है कि जिले के खलघाट, नावड़ाटोड़ी, सिरवेल महादेव आदि स्थानों पर नदियों और जलभराव वाले अन्य स्थानों पर लापरवाहीपूर्वक सेल्फी खींचे जाने के कारण दुर्घटना से जनहानि हुई है।

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ठळक मुद्देधारा 188 के तहत मुजरिम को एक महीने तक के कारावास या 200 रुपये तक के जुर्माने या दोनों सजाओं का प्रावधान है। सेल्फी खींचे जाने पर दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 के तहत कानूनी पाबंदी लगा दी है।

भारी बारिश के चलते नर्मदा और अन्य नदियों में बाढ़ के मद्देनजर मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में प्रशासन ने घाटों और जलभराव वाले अन्य स्थानों पर सेल्फी खींचने के पर दो महीनों के लिये कानूनी प्रतिबंध लगा दिया है।

खरगोन के जिलाधिकारी गोपालचंद्र डाड ने बताया, "मुझे मीडिया के जरिये पता चला है कि जिले के खलघाट, नावड़ाटोड़ी, सिरवेल महादेव आदि स्थानों पर नदियों और जलभराव वाले अन्य स्थानों पर लापरवाहीपूर्वक सेल्फी खींचे जाने के कारण दुर्घटना से जनहानि हुई है। इसलिये मैंने नर्मदा, कुंदा और अन्य नदियों के घाटों, पुल-पुलियाओं और रपटों समेत जलभराव वाले सभी स्थानों पर किसी व्यक्ति या जन समूह द्वारा सेल्फी खींचे जाने पर दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 के तहत कानूनी पाबंदी लगा दी है।"

उन्होंने बताया कि खरगोन जिले के जिन स्थानों पर 26 अक्टूबर तक सेल्फी खींचे जाने पर पाबंदी लगायी गयी है, उनमें इंदौर से करीब 100 किलोमीटर दूर मशहूर पर्यटन स्थल महेश्वर के नर्मदा घाट भी शामिल हैं। प्रशासन ने वहां इस पाबंदी को लेकर चेतावनी बोर्ड भी लगा दिये हैं।

डाड ने बताया कि सूबे के सिवनी में जिलाधिकारी के रूप में पिछले साल पदस्थ रहने के दौरान उन्होंने एक बांध और जलभराव वाले अन्य स्थानों के पास सेल्फी खींचने पर सीआरपीसी की धारा 144 के ही तहत पाबंदी लगायी थी। उन्होंने दावा किया कि इस कानूनी प्रावधान के बाद सिवनी में जलभराव वाले क्षेत्रों में लोगों के लापरवाहीपूर्वक सेल्फी खींचने के दौरान डूबकर मरने के हादसों में कमी आयी थी।

अधिकारियों ने बताया कि सीआरपीसी की धारा 144 के तहत लगाये गये किसी प्रशासनिक प्रतिबंध का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति के खिलाफ भारतीय दंड विधान (आईपीसी) की धारा 188 (किसी सरकारी अधिकारी के आदेश की अवज्ञा) के तहत प्राथमिकी दर्ज कराये जाने का प्रावधान है।

भारतीय दंड विधान की धारा 188 के तहत मुजरिम को एक महीने तक के कारावास या 200 रुपये तक के जुर्माने या दोनों सजाओं का प्रावधान है। 

टॅग्स :बाढ़कमलनाथ
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